अगर हमें कोई कुछ बता रहा हो.. हमें वो पसंद नहीं आ रहा हो.. क्यूंकि हम उसका अर्थ अपने विचारों से लगाते है. स्वामी वाणी

Nov 5, 2023 | प्रेरनादाई कथा, हिंदी

Share

स्वामी भक्तो ..बहोत बार हम कुछ पढ़ते है या सुनते है लेकिन बहोत बार बार हम उसका अर्थ हमारी समझ की तहत लगाते है.. उससे बहोत बार हमें निराशा आती है या हमारे मन में शंका निर्माण होती है.. यह नियम केवल अध्यात्म में ही नहीं तो हमारे जीवन में लागु होता है.. इसे हम स्वामी वाणी से समझ ते है.. श्री रामकृष्ण देसाई नाम के स्वामी भक्त थे उन्हें संतान नहीं थी.. स्वामी महाराज ने उन्हें आशीर्वाद दिया तुम्हें संतान होगी आप दोनों मुंबई जाकर बोरी की वृक्ष की सेवा करो.. अब उन दोनों को लगा की बोरी की वृक्ष की पूजा तो नहीं की जाती जरूर स्वामी महाराज ने जल्दी जल्दी में पिपल के वृक्ष के जगह बोरी कहाँ होगा यह सोचकर वो दोनों पीपल के वृक्ष की सेवा करने लगे.. पर उन्हें कोई अनुभूति नहीं आयी.. वो एक दिन मुंबई के मठ में दर्शन करने गए थे तब उन्होंने स्वामी वाणी के बारे में बताया तो वो संन्यासी ने कहाँ स्वामी महाराज ने बोरी का वृक्ष कहाँ यानी स्वामी सूत की करने को बोला है.. उनको अपनी गलती का एहसास हुवा..उन्होंने स्वामी सूत की सेवा शुरू की उन्हें स्वामी वाणी की अनुभूति आयी उन्हें संतान की प्राप्ति हुवी..बोलो श्री स्वामी समर्थ महाराज की जय..देखो ईश्वर के लीला से हमें संकेत लेकर अपने जीवन में उसे लागु करना है.. नहीं तो ईश्वर की लीला..सिर्फ सुनने और पढ़ने तक सीमीत रह जायेंगी..देखो यह लीला पढ़कर सुनकर हमारे मन अनेक बाते आ रही होगी..लेकिन सोचो कभी कभी कोई हमें अच्छी बात बताता है लेकिन हम उसका गलत अर्थ निकालते है और हमारे मन में उस व्यक्ति के प्रति क्रोध उत्पन्न करते है.. बहोत बार उसके कहने का अर्थ अलग होता है हम गलत अर्थ लेते है.. इसलिए हमें तुरंत कोई भी गलत धारणा धारण करनी नहीं है.. इस पर और चिंतन मनन करो.. !

संदर्भ -स्वामी वाणी

 


Share
और पढिये !!

सच्ची पितृ पूजा

हर साल हम पितृ पूजा करते है.. हमारी संस्कृति में साल में १६ दिन हमारे पूर्वजों  की पूजा के लिए दिए है.. यह हमारे पूर्वजों  के प्रति सदभावना व्यक्त करने का दिन... सचमें हमारे पूर्वजोंने कितना विचार पूर्वक यह सब बनाए है..सचमें यह सब देखने के बाद गर्व होता है.. लेकिन कुछ...

श्री महालक्ष्मी पूजा

भाई और बहनो  आप सभी को नमस्कार ! हम सभी लोग अभी श्री गणपति बाप्पा और  साथ में कुछ लोग श्री महालक्ष्मी की भी पूजा कर रहे... सभी तरफ खुशियों का वातावरण है... या सभी पूजा पाठ जब देखता हु... उसके पीछे अपने पूर्वजों  की जो धारणा थी बहोत ऊँची थी... गणपति के साथ... श्री...

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन इनका जन्म ५ सितम्बर १८८८  को तिरुत्तनी गांव जो  चित्तोर जिल्हे में  तमिळनाडू राज्य में हुवा था | उन्होंने अपनी शिक्षा दर्शनशास्त्र में M.A. किया | उन्होंने शिक्षा पूरी होने के बाद साहयक प्रोफेसर का काम मद्रास प्रेसि डेंसी कॉलेज में और बाद में...

गजानन महाराज चरित्र दर्शन ३

गजाजन महाराज बोल रहे है - यह सम्पूर्ण सृष्टि ब्रम्ह व्याप्त है... यहाँ मैला या शुद्ध ऐसा कोई भेद नहीं   श्री गजानन महाराज जी ने भोजन किया यह हम ने दूसरी लीला में देखा... अब श्री महाराज जी का भोजन ख़त्म होने के बाद...उनको पीने के लिए  पानी चाहिए...यह विचार बंकटलाल...

श्री गजानन महाराज दर्शन लीला-2

श्री बंकटलाल अग्रवाल जी बोले हमारा शेगांव धन्य है... ब्रम्हांड नायक योगिराज शेगांव  में आये। ..!! हमने प्रथम लीला में देखा ब्रम्हांड नायक श्री गजाजन महाराज कूड़े में फेंके हुवे फेके हुंए थाली से चावल के शीत उठाकर खा रहे थे ! अभी यह जो दृश्य है वह आने जाने वाले लोग...

श्री स्वामी समर्थ तारक मंत्र..मनन 2

जिथे स्वामी पाय तिथे न्युन काय - ज्या घरात स्वामी सेवा केली जाते तिथे कश्याची कमतरता नसते. या ठिकाणी घरात म्हणजेच आपले ह्रदय मंदिर. ज्या वेळेस आपण स्वामींची सेवा करतो त्या वेळेस हळू हळू आपले मनाला स्थिरता प्राप्त होते. मनाची शुद्धता झाली कि हृदयातून स्वामी नाम येऊ...

श्री दास गणू महाराज

इनका नाम श्री गणेश दत्तात्रेय सहस्रबुद्धे उनको हम सब श्री दास गणू महाराज जी के नाम से जाने जाते है | उनका जनम शके १७८९, पौष शुद्ध एकादशी (दि.०६ /०१/१८६८) को हुवा था | उनका घर का आर्थिक स्तर बहोत अच्छा था | उनकी शिक्षा ४ तक हुवी थी | वे सदैव आनंदी एवं हसत मुख रहते थे |...

श्री स्वामी समर्थ तारक मंत्र..मनन १

खरं तर तारक मंत्र म्हणजे प्रत्येक स्वामीं भक्ता साठी स्वामीं च कवच आहे..प्रत्येक शब्द हा स्वामीं अनुभूती आहे..खरंतर ज्यांनी हा तारक मंत्र शब्द रुपात गुंफला..त्यांची भक्ती ची अवस्था ही खूपच वरच्या पात्रते ची असणार..आणि त्यामुळेच स्वामींनी आपल्या सर्वांसाठी तारक मंत्र...

श्री गजानन महाराज प्रथम दर्शन लीला

परब्रम्ह श्री गजानन महाराज कुछ न बोलके भी हमे बता रहे है " अन्न ही परब्रम्ह है" श्री गजानन महाराज लीला - शेगांव में एक देवीदास पातुरकर नाम के गृहस्थ रहते थे ! वह मठाधिपति थे ! एक दिन उनके लड़के की ऋतु शांति का विधी घर मे थी उस वजह से उन्होंने अनेक लोगोंको को भोजन करने...