हमें संकट में ईश्वर को दोष न देते हुवे ईश्वर का प्रसाद समझकर उस पर कार्य करना है.. स्वामी वाणी

Nov 5, 2023 | प्रेरनादाई कथा, हिंदी

Share

हमारे जीवन में कोई समस्या आती है तो हमें लगता है की ईश्वर की हमपर अवकृपा है क्या इसलिए मेरे जीवन में समस्या आ रही है.. लेकिन ईश्वर किसी के ऊपर अवकृपा कभी नहीं करता..लेकिन हमारा मन ऐसा है की कभी कुछ अच्छा होता है तो हम क्या कहते है जरा सोचो..हम कहते है मैंने किया इसलिए यह यश हमें प्राप्त हुवा है.. फिर अपयश आने के बाद ऐसे हम क्यूँ कहते है की ईश्वर की अवकृपा है.. चलो हम स्वामी वाणी की कथा द्वारा इसे समझते है.. एक दिन स्वामी महाराज गुस्से में थे उस वक्त वहाँ माटे करके गृहस्थ आते है और कहते है की इनको इतना गुस्सा आता है.. ये ऐसे कैसे साधु.. उस वक्त स्वामी महाराज कुछ कहते नहीं.. कुछ दिनों के बाद उनका कीर्तन उस गांव में होता है.. उस स्वामी महाराज भी उधर थे.. तब स्वामी महाराज उन्हें कहते है की अगर हमें गुस्सा आता तोइन सबकी हम सब्जी नहीं बनाते..उस वक्त उनको अपनी गलती का एहसास हुवा.. देखो लीला दिखने बहोत साधारण लगती है लेकिन जब हम इसके ऊपर चिंतन करते है.. तब हमें पता चलता है की.. ईश्वर कभी हम पर गुस्सा नहीं होता.. वह तो चाहता है की हमारी प्रगति हो.. संकट दे कर वो हमार आत्म बल बढ़ाता है.. अब यहाँ हमारे मन में प्रश्न निर्माण होगा संकट अवकृपा नहीं क्या ? देखो जिस तरह सुख आये तो हम कहते है क्या ईश्वर ने दिया.. उसी तरह हमारे जीवन आने वाला संकट भी हमारे कर्मो का फल ही होता है.. उलटा ईश्वर चाहता है की समस्या से हमारी उन्नती का मार्ग पता चले.. इसलिए हमें संकट में ईश्वर को दोष न देते हुवे ईश्वर का प्रसाद समझकर उस पर कार्य करना है.. बोलो श्री स्वामी समर्थ महाराज की जय.

संदर्भ – स्वामी वाणी


Share
और पढिये !!

सच्ची पितृ पूजा

हर साल हम पितृ पूजा करते है.. हमारी संस्कृति में साल में १६ दिन हमारे पूर्वजों  की पूजा के लिए दिए है.. यह हमारे पूर्वजों  के प्रति सदभावना व्यक्त करने का दिन... सचमें हमारे पूर्वजोंने कितना विचार पूर्वक यह सब बनाए है..सचमें यह सब देखने के बाद गर्व होता है.. लेकिन कुछ...

श्री महालक्ष्मी पूजा

भाई और बहनो  आप सभी को नमस्कार ! हम सभी लोग अभी श्री गणपति बाप्पा और  साथ में कुछ लोग श्री महालक्ष्मी की भी पूजा कर रहे... सभी तरफ खुशियों का वातावरण है... या सभी पूजा पाठ जब देखता हु... उसके पीछे अपने पूर्वजों  की जो धारणा थी बहोत ऊँची थी... गणपति के साथ... श्री...

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन इनका जन्म ५ सितम्बर १८८८  को तिरुत्तनी गांव जो  चित्तोर जिल्हे में  तमिळनाडू राज्य में हुवा था | उन्होंने अपनी शिक्षा दर्शनशास्त्र में M.A. किया | उन्होंने शिक्षा पूरी होने के बाद साहयक प्रोफेसर का काम मद्रास प्रेसि डेंसी कॉलेज में और बाद में...

गजानन महाराज चरित्र दर्शन ३

गजाजन महाराज बोल रहे है - यह सम्पूर्ण सृष्टि ब्रम्ह व्याप्त है... यहाँ मैला या शुद्ध ऐसा कोई भेद नहीं   श्री गजानन महाराज जी ने भोजन किया यह हम ने दूसरी लीला में देखा... अब श्री महाराज जी का भोजन ख़त्म होने के बाद...उनको पीने के लिए  पानी चाहिए...यह विचार बंकटलाल...

श्री गजानन महाराज दर्शन लीला-2

श्री बंकटलाल अग्रवाल जी बोले हमारा शेगांव धन्य है... ब्रम्हांड नायक योगिराज शेगांव  में आये। ..!! हमने प्रथम लीला में देखा ब्रम्हांड नायक श्री गजाजन महाराज कूड़े में फेंके हुवे फेके हुंए थाली से चावल के शीत उठाकर खा रहे थे ! अभी यह जो दृश्य है वह आने जाने वाले लोग...

श्री स्वामी समर्थ तारक मंत्र..मनन 2

जिथे स्वामी पाय तिथे न्युन काय - ज्या घरात स्वामी सेवा केली जाते तिथे कश्याची कमतरता नसते. या ठिकाणी घरात म्हणजेच आपले ह्रदय मंदिर. ज्या वेळेस आपण स्वामींची सेवा करतो त्या वेळेस हळू हळू आपले मनाला स्थिरता प्राप्त होते. मनाची शुद्धता झाली कि हृदयातून स्वामी नाम येऊ...

श्री दास गणू महाराज

इनका नाम श्री गणेश दत्तात्रेय सहस्रबुद्धे उनको हम सब श्री दास गणू महाराज जी के नाम से जाने जाते है | उनका जनम शके १७८९, पौष शुद्ध एकादशी (दि.०६ /०१/१८६८) को हुवा था | उनका घर का आर्थिक स्तर बहोत अच्छा था | उनकी शिक्षा ४ तक हुवी थी | वे सदैव आनंदी एवं हसत मुख रहते थे |...

श्री स्वामी समर्थ तारक मंत्र..मनन १

खरं तर तारक मंत्र म्हणजे प्रत्येक स्वामीं भक्ता साठी स्वामीं च कवच आहे..प्रत्येक शब्द हा स्वामीं अनुभूती आहे..खरंतर ज्यांनी हा तारक मंत्र शब्द रुपात गुंफला..त्यांची भक्ती ची अवस्था ही खूपच वरच्या पात्रते ची असणार..आणि त्यामुळेच स्वामींनी आपल्या सर्वांसाठी तारक मंत्र...

श्री गजानन महाराज प्रथम दर्शन लीला

परब्रम्ह श्री गजानन महाराज कुछ न बोलके भी हमे बता रहे है " अन्न ही परब्रम्ह है" श्री गजानन महाराज लीला - शेगांव में एक देवीदास पातुरकर नाम के गृहस्थ रहते थे ! वह मठाधिपति थे ! एक दिन उनके लड़के की ऋतु शांति का विधी घर मे थी उस वजह से उन्होंने अनेक लोगोंको को भोजन करने...