अनन्य भक्ती दे समर्था ! अतूट अभेद्य श्रध्दा दे समर्था !!

Feb 5, 2023 | प्रार्थना व प्रेरणादायी विचार, मराठी

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स्वामी वाणी पुष्प ५४०(पर्व ४ थे भाग ४४)

आजचे चिंतन-मनन

अनन्य भक्ती दे समर्था !
अतूट अभेद्य श्रध्दा दे समर्था !!
निरंतर ध्यास दे समर्था !
आनंदी अविश्रांत सेवा दे समर्था !!

www.SwamiVaani.com

स्वामी भक्तहो .. वरील प्रार्थना आपणस स्वामींना काय मागावे हे शिकवत आहे.. स्वामी आपणस आवश्यक असणारी भौतिक वस्तु आपण मागतं असतो .. पण आपली भौतिक गरज कधीच संपत नाही.. एक गरज संपली कि आपण दुसरे काही तरी मागतच असतो.. इथे आपण स्वामींना जे खरंच मागायचे आहे ते मागत आहोत.. अनन्य भक्ती.. अशी भक्ती जी भक्तीची सर्वोच्च अवस्था आहे..इथे संपूर्ण समर्पण भाव आहे..काही होवो स्वामी जे करणार ते योग्यच आहे.. असा भाव.. अनन्य भक्ती ची अवस्था स्वामी कृपेशिवाय नाही प्राप्त होऊ शकत.. त्या साठी कायम आपणस स्वामी चरित्रावर चिंतन मनन करणे आवश्यक आहे..अतूट अभेद्य श्रध्दा.. हि श्रध्दा ची उच्च्तम अवस्था आहे.. म्हणजेच कोणताही प्रसंग असो.. मुखातून फक्त स्वामी नामच येते.. किती अडचण असो.. समस्या असो.. स्वामी नामच येते..म्हणजेच इथे आपली श्रद्धा इतकी असावी कि काही होवो स्वामी सेवा सुटता कामा नये…आपल्या मनाला फक्त स्वामी सेवेचाच ध्यास लागावा.. जेव्हा अनन्य भक्ती,अतूट अभेद्य श्रध्दा, निरंतर ध्यास निर्माण होईल तेव्हा आपले जीवन हे आनंदी बनेल.. आणि आपली सेवा हि सेवा न राहता सेवेचा महायज्ञ होईल.. म्हणूनच स्वामींना भक्ती श्रद्धा , विश्वास आणि स्वामी सेवेचा ध्यास मागा.. हे सर्व एका दिवसात मिळेल का? नाही या साठी आपणस अखंड स्वामी नाम सेवा करणे आवश्यक आहे.. आज आता पासून स्वामी सेवेस सुरवात करूया.. धन्यवाद समर्था… !


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