श्री बंकटलाल और पीतांबर शिंपी कीर्तन सुनने गए थे… लेकिन उधर ह उनको श्री गजानन महाराज दिखे… फिर क्या वो कीर्तन छोड़कर श्री महाराज के पास आ गए… उन्होंने श्री महाराज जी से पूछा…की आपको खाना लावू क्या? तब श्री महाराज उन्हें बोले आपको जररूत होंगी तो मालिनी के घर से झुनका भाकर लेकर आवो… पीतांबर झुनका भाकर लेकर आया… वह श्री महाराज ने खा ली और पीतांबर को बोले यह मटका लेकर जावो उस नदी ( ओढ़ा ) से पानी लेकर आवो तब पीतांबर बोला महाराज वहाँ पानी बहोत कम है और उस पानी को को गंदी बदबू आती है… आपकी इजाजत हो तो मै दूसरी जगह से अच्छा पानी लाता हु… श्री महाराज बोले उधर से ही पानी लावो और पानी हाथ स मत भरना… मटके से ही पानी भरना… श्री महाराज की आज्ञा अनुसार पीतांबर उधर गए.. उधर जाकर उसने देखा तो हाथ से ही पानी भरने की जरूरत थी लेकिन महाराज की आज्ञा थी उस अनुसार उसने मटका पानी भरने के लिए डुबोया तो चमत्कार हो गया… मटका तो भर ही गया लेकन उधर भरपूर पानी उस नदी में आ गया और वह पानी इतना स्वच्छ था की उसमें हमारा चेहरा भी दिख सकता था… यह सब देखकर वो आश्चर्यचकित हो गया और उसने श्री गजानन महाराज का जय जयकार किया। बोलो श्री गजानन महाराज की जय!
बोध – उपरोक्त लीला से हमें श्री महाराज हमें अनेक बोध देते है… वैसे तो हर का बोध अलग ही होगा क्यूंकि श्री महाराज हर एक को अलग अलग बोध देते है… यहाँ श्री महाराज से बंकटलाल और पीतंबर ने पूछा की आपके लिए खाना लावू क्या…तब श्री महाराज बोले रहे है तुमको जरूरत लावो…यहाँ महाराज कह रहे है आप जो भी भगवान् की सेवा करते है वो किस लिए करते है… तो हम हमारे लिए करते है लेकिन हम कहते है की मैंने भगवान अमुक सेवा भगवांन के लिए की और यही गलती न हो इसलिए श्री महाराज कह रहे है तुमको जरूरत होंगी तो लावो याने सेवा करो… श्री महाराज ने उन्हें कहाँ जुनका ( हरी मिर्च की चटनी ) भाकर लेकर आवो.. देखो यहाँ श्री महाराज हमें बता है… भाकरी के पीठ के जैसे मृदु (पिष्टमय) बनो… और चटनी जैसे कणखर बनो… तो हमारा जीवन आनंददाई बन जाएगा…यहाँ पीताम्बर के कृति से प्राप्त है की गुरु आज्ञा का पालन कैसे करना चाहिए…मन कुछ भी शंका न लाते हुवे…और उस श्रद्धा के फल स्वरुप उन्हें स्वच्छ पानी प्राप्त हुवा..इसके ऊपर आप और चिंतन मनन करे!
चलो श्री महाराज से हम प्रार्थना करते है…
प्रार्थना है ब्रम्हांड नायक। आपकी लीला तो हमारे लिए प्रेरणा है.. पर वह समझने के लिए आपकी कृपा चाहिए…जिस तरह उस नदी पानी बढ़ गया उस तरह हमारे जीवन आपकी भक्ति की बाढ़ आये… जैसा पानी स्वच्छ हो गया उस तरह हमारा मन भी शुद्ध और निर्मल बनावो…धन्यवाद महाराज…यह प्रार्थना करवा के लेने के लिए धन्यवाद!
बोलो श्री गजानन महाराज की जय