श्री रामचरित मानस 4

Nov 1, 2022 | Uncategorized

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विक्रम संवत १६३१ मध्ये श्री रामचरित्र मानस कथेला प्रारंभ झाल.. चैत्र मासातील नवमी या तिथीस वार मंगळवार या दिवशी अयोध्येत हे चरित्र प्रकशित झाले… हाच प्रभू श्री रामांचा जन्मदिवस… शरयू नदी आणि अयोध्या नगरी..श्री तुलसीदास महाराज श्री राम कथेस आरंभ करत आहेत… श्री महादेवांनी हे रचले आहे आणि पार्वती मातेस सांगितले आहे.. भगवान शंकरांनी यास श्रीरामचरित मानस हे नाव दिले आहे… श्री उमा महेश्वरच्या चरणी वंदन करून कथेस आरंभ करत आहे… भगवंताचा वास हा ह्रदयात असतो आणि तिथूनच भाव प्रगट होत असतात असेच भाव श्री तुलसीदासांच्या हृदयात प्रगट झाले आणि निर्मिती झाली श्री रामचरित मानस ग्रंथाची… यात सात कांड आहे.. प्रत्येक कांड हे आपणस आंधारातून प्रकाशाकडे घेऊन जात आहे.. हे सुंदर असे काव्य आहे.. यातील प्रत्येक शब्द हे मन प्रसन्न करणारे असे आहेत.. धर्म ,अर्थ ,काम , मोक्ष याचे ज्ञान आहे.. जीवन कसे जगावे याचे यतार्थ वर्णन आहे.. श्री रामचरित मानस मधील प्रत्येक कथा हि आपल्या जीवनात रंग भरते… या कथेमुळे स्वतःवर कसे काम करावे याची प्रेरणा प्राप्त होते… जे कुणी हे चरित्र श्रवण वा वाचन करतात तेच याची महती समजू शकतात… संगत कशी असावी हे शिकवते हि कथा… श्रद्धा नसेल सद्गुरूंचे मार्गदर्शन नसेल तर श्री रामचरित मानस समजत नाही म्हणजेच श्री रामाची कृपा प्राप्त होत.. नाही.. या साठी श्री रामाची कृपाच असावी लागते… जर आपली श्री रामाच्या चरणी श्रद्धा असेल तर नक्कीच आपणस याचा लाभ होईल… राम भक्तीची हि गंगा आपल्या पर्यंत येत आहे


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