श्री गजानन चरित्र दर्शन 9 – संदर्भ – श्री गजानन विजय अध्याय ३

Nov 22, 2021 | संत गजानन महाराज, हिंदी

Share

श्री गजानन महाराज बोल रहे है- जब व्रत लिया उस वक्त सोचा नही और अब जब व्रत कि पूर्ती करते वक्त क्यूँ हिचकिचाते हो !
लीला- श्री गजानन महाराज बंकटलाल के घर शेगांव मी रह रहे थे … काशी के गोसावी थे.. उन्होंने श्री गजानन महाराज जी कि लीलाए सुनकर…एक व्रत लेने का निर्णय लिया…उन्होंने ऐसा व्रत किया की अगर मेरा अमुक अमुक काम हो गया तो में श्री गजानन महाराज जी को भांग अर्पण करूँगा…उन्होंने यह व्रत इसलिए लिया था की उनको खुद को भांग बहोत पसंद था… अब कुछ दिनों के बाद उनका कमा हो गया… अब व्रत पूर्ति करने के लिए वो। .. शेगांव में आ गए… आने के बाद उन्होंने देखा की श्री गजानन महाराज जी के दर्शन के लिए बहोत भीड़ थी… उनके मन में विचार आया की इतनी भीड़ में मेरा दर्शन कैसे होगा…और इतनी भीड़ में अगर में यह महाराज जी को अर्पण करूँगा तो उपस्थित लोग मुझे मारेंगे…उनके मन में यह विचार शुरू थे… उसी वकत श्री महाराज को उनके मन की बात समझ आ गई.. श्री महाराज ने उधर उपस्थित कुछ भक्तों को गोसावी की बुलाने को कहाँ..गोसावी नम्रतापूर्वक श्री महारज के सामने हाँथ जोड़कर खाद हो गया… तब श्री महाराज बोले लावो तुमने लायी हुवी भेट… जो तुम्हारे थैली में तीन महीने से राखी हुवी है… श्री महाराज की यह वाणी सुनकर वो अचंबित हो गया… उसी तरह श्री महाराज उसे बोले जब व्रत लिया उस वक्त सोचा नही और अब जब व्रत कि पूर्ती करते वक्त क्यूँ हिचकिचाते हो.. इस तरह श्री महाराज ने सही समझ के साथ गोसावी के व्रत की पूर्ति कर के ली.

बोलो || अनंत कोटी ब्रम्हाण्ड नायक महाराजाधिराज योगीराज परब्रम्ह सच्चितानंद

भक्त प्रतिपालक शेगाँव निवासी समर्थ सदगुरु श्री संत गजानन महाराज की जय ||

बोध – उपरोक्त लीला तो हमारे लिए तो ज्ञान का भांडार है.. गोसावी जी को समस्या थी इसलिए उन्होंने वह समस्या छूटे इसलिए उन्होंने व्रत लिया… व्रत ऐसा लिया की जो उनको पसंद था… और जब व्रत की पूर्ति का वक्त आया तो वो डगमगाने लगे… ऐसी ही स्थिति हमारी होती है… हमको समस्या आती है तो हम ऐसा व्रत लेते है जो हमें अच्छा लगता है..वैसे तो श्री महाराज एक प्रकार से यहाँ समझ दे रहे है की व्रत लेना ही है तो ऐसा लो जिससे हम् में बदलाव हो… वैसे तो भगवान को हमसे कुछ भी नहीं चाहिए…व्रत करना ही है तो गलत आदते छोड़ने का व्रत करो यह श्री महाराज हमें बोध दे रहे है… अनेक लोगों को आदत होती है की कुछ भी समस्या आती है तो तुरंत व्रत लेते है… व्रत ऐसा लेते है… हे ईश्वर मेरा इतना काम कर दो ..मुझे अमुक अमुक वस्तु अगर मिल जाएगी तो में तुम्हे यह यह चीज अर्पण करूँगा…पाहि बात तो यह है की भगवांन और हमारे बीच का जो रिश्ता है.. वो क्या व्यवहारिक रिश्ता है क्या? नहीं ना तो फिर क्यूँ भगवान् को व्रत करते हो… करनी है तो प्रार्थना करो… भक्ति माँगो ..भगवान् को हमसे कुछ है चाहिए …जिसने यह ब्रम्हांड निर्माण किया उसको हमसे यह भौतिक वस्तु लेकर हम पर वो कृपा करेंगे क्या…कितना गहरा बोध महाराज दे रहे है… !

चलो हम श्री महाराज से प्रार्थना करते है… श्री गजानन महाराज हमें आपसे क्या मांगना है… यह समझ नहीं है… आजकी लीला के माध्यम से हमें आपने यह समझ दी उसके लिए धन्यवाद…हमें व्रत करने की नहीं भक्ति बढ़ने की समझ दो… हमें माँगने की नहीं… हमारे विकारों को छोड़ने की समझ दो… यह प्रार्थना करवा लेने के लिए धन्यवाद


Share
और पढिये !!

सच्ची पितृ पूजा

हर साल हम पितृ पूजा करते है.. हमारी संस्कृति में साल में १६ दिन हमारे पूर्वजों  की पूजा के लिए दिए है.. यह हमारे पूर्वजों  के प्रति सदभावना व्यक्त करने का दिन... सचमें हमारे पूर्वजोंने कितना विचार पूर्वक यह सब बनाए है..सचमें यह सब देखने के बाद गर्व होता है.. लेकिन कुछ...

श्री महालक्ष्मी पूजा

भाई और बहनो  आप सभी को नमस्कार ! हम सभी लोग अभी श्री गणपति बाप्पा और  साथ में कुछ लोग श्री महालक्ष्मी की भी पूजा कर रहे... सभी तरफ खुशियों का वातावरण है... या सभी पूजा पाठ जब देखता हु... उसके पीछे अपने पूर्वजों  की जो धारणा थी बहोत ऊँची थी... गणपति के साथ... श्री...

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन इनका जन्म ५ सितम्बर १८८८  को तिरुत्तनी गांव जो  चित्तोर जिल्हे में  तमिळनाडू राज्य में हुवा था | उन्होंने अपनी शिक्षा दर्शनशास्त्र में M.A. किया | उन्होंने शिक्षा पूरी होने के बाद साहयक प्रोफेसर का काम मद्रास प्रेसि डेंसी कॉलेज में और बाद में...

गजानन महाराज चरित्र दर्शन ३

गजाजन महाराज बोल रहे है - यह सम्पूर्ण सृष्टि ब्रम्ह व्याप्त है... यहाँ मैला या शुद्ध ऐसा कोई भेद नहीं   श्री गजानन महाराज जी ने भोजन किया यह हम ने दूसरी लीला में देखा... अब श्री महाराज जी का भोजन ख़त्म होने के बाद...उनको पीने के लिए  पानी चाहिए...यह विचार बंकटलाल...

श्री गजानन महाराज दर्शन लीला-2

श्री बंकटलाल अग्रवाल जी बोले हमारा शेगांव धन्य है... ब्रम्हांड नायक योगिराज शेगांव  में आये। ..!! हमने प्रथम लीला में देखा ब्रम्हांड नायक श्री गजाजन महाराज कूड़े में फेंके हुवे फेके हुंए थाली से चावल के शीत उठाकर खा रहे थे ! अभी यह जो दृश्य है वह आने जाने वाले लोग...

श्री स्वामी समर्थ तारक मंत्र..मनन 2

जिथे स्वामी पाय तिथे न्युन काय - ज्या घरात स्वामी सेवा केली जाते तिथे कश्याची कमतरता नसते. या ठिकाणी घरात म्हणजेच आपले ह्रदय मंदिर. ज्या वेळेस आपण स्वामींची सेवा करतो त्या वेळेस हळू हळू आपले मनाला स्थिरता प्राप्त होते. मनाची शुद्धता झाली कि हृदयातून स्वामी नाम येऊ...

श्री दास गणू महाराज

इनका नाम श्री गणेश दत्तात्रेय सहस्रबुद्धे उनको हम सब श्री दास गणू महाराज जी के नाम से जाने जाते है | उनका जनम शके १७८९, पौष शुद्ध एकादशी (दि.०६ /०१/१८६८) को हुवा था | उनका घर का आर्थिक स्तर बहोत अच्छा था | उनकी शिक्षा ४ तक हुवी थी | वे सदैव आनंदी एवं हसत मुख रहते थे |...

श्री स्वामी समर्थ तारक मंत्र..मनन १

खरं तर तारक मंत्र म्हणजे प्रत्येक स्वामीं भक्ता साठी स्वामीं च कवच आहे..प्रत्येक शब्द हा स्वामीं अनुभूती आहे..खरंतर ज्यांनी हा तारक मंत्र शब्द रुपात गुंफला..त्यांची भक्ती ची अवस्था ही खूपच वरच्या पात्रते ची असणार..आणि त्यामुळेच स्वामींनी आपल्या सर्वांसाठी तारक मंत्र...

श्री गजानन महाराज प्रथम दर्शन लीला

परब्रम्ह श्री गजानन महाराज कुछ न बोलके भी हमे बता रहे है " अन्न ही परब्रम्ह है" श्री गजानन महाराज लीला - शेगांव में एक देवीदास पातुरकर नाम के गृहस्थ रहते थे ! वह मठाधिपति थे ! एक दिन उनके लड़के की ऋतु शांति का विधी घर मे थी उस वजह से उन्होंने अनेक लोगोंको को भोजन करने...