हमारे घर में भगवांन का घर कैसा हो

Nov 13, 2021 | प्रेरनादाई कथा, हिंदी

Share

भगवान का घर कैसा हो इसके बारे में विभिन्न लोगों के विभिन्न विचार है… इसके ऊपर हर एक ने खुद चिंतन मनन करना चाहिए… भगवान् घर ऐसा हो… जहाँ हमारा चित्त स्थिर हो… मन शुद्ध हो… आंतरिक आनंद प्राप्त हो…ऐसा भगवांन का घर हो… आप बोलेंगे फिर भी भगवान् का घर कैसा हो… हमें आर्थिक स्तर पर किफायतशीर होना चाहिए …आपको आर्थिक स्तर पर जो अच्छा लगे वैसा आप भगवान् का घर ले सकते है… बेशक बाजार में कई विकल्प उपलब्ध हैं.. उसमे से आपको जो पसंद हो… आर्थिक स्तर पर भी आपके के लिए किफायतशीर हो ऐसा भगवान् का घर आप ले सकते है… भगवान् की मूर्ति या फोटो जिसपर रखते है… वहाँ कपडे का आसन होना चाहिए… अब सबसे महत्वपूर्ण बात… घर में कोन कोनसे भगवन की मूर्ति या फोटो होना चाहिए …शास्त्र के अनुसार भगवान् का पंचायतन होना चाहिए…यानि पाँच देवों की मुर्तिया हनी चाहिए… होनी चाहिए… गणेशजी, विष्णुजी, शंकरजी, सूर्यजी , देवी माता यह पांच मुर्तिया और शंख और घंटा होनी चाहिए… अब क्या होता है.. हम भगवान् के घर में मूर्तियोंकी इतनी भीड़ करते है की… हमें हमारे घर का भगवान् का घर छोटा लगने लगता है… इसके पीछे का मुख्य वजह यह है की… हम किसी आध्यत्मिक स्थल पर जाते है… या कोई हमें बताता है.. इसलिए हम अनेक भगवन की मूर्ति या फोटो लेकर आते है और हमें समझ में भी नहीं आता की कब भगवान का घर छोटा हो गया यानि भगवान की मूर्तियोंकी संख्या बढ़ गयी… इसलिए आपसे विनती है क यह गलत आदत बंद कर दो… जो भी भगवान की मुर्तिया या फोटो हमारे घर में है उसी की पूजा दिल से करो… बहोत बार क्या होता है अनेक मुर्तिया या फोटो खराब हो जाते है… उस वकत किसी के कहने पर या… हमर पूर्व मान्यतावो के आधार पर हम वो मुर्तिया या फोटो…किसी भी मंदिर में जाकर रख आते है… अब सके ऊपर आप खुद चिंतन करो और बतावो यह सह या गलत है… यह हमारी उस भगवान् के ऊपर की श्रद्धा है क्या? यह पागल जैसी आदत बंद करो… हफ्ते में एक बार या… ममहीने में सभी भगवान् क मूर्तियोंको…नीम… हल्दी…दही या बाजार में अनेक पावडर या लिक्विड उपलब्ध है उससे मुर्तिया साफ़ करके लो.. क्यूंकि क्या होता है पर्यावरण के बदल के कारण या रसायनं युक्त चंदन के कारण मुर्तिया ख़राब हो जाती है… इस तरह से साफ़ करने से करने में प्रसन्नता प्राप्त होंगी… हमें प्रतिदिन कुछ न कुछ भगवान को प्रसाद अर्पित करना चाहिए… हम हर रोज भगवान् को फूल चढ़ाते है.. दूसरे दिन वो फूलों का निर्माल्य हम नदी पात्र में.. जलाशय में दाल देते है.. एक तरफ हम कहत है… गंगा हमारी माता है और दूसरी और उसी माँ के पात्र में हम लोग निर्माल्य फेंकते है… सच में यह श्रद्धा है या फिर श्रद्धा के नाम पर गलत आदत.. आज से ही संकल्प लेते है की नदी के पात्र में हम कसी भी प्रकार का निर्माल्य नहीं डालेंगे…यही हमारी ९९ % भगवान् की सेवा पूर्ण होती है… ईश्वर खुश होकर हमें आशीर्वाद देता है… बस भगवान को नहला देने से , भगवान की पूजा खत्म होती है क्या ? नहीं तो ईश्वर के पास जाने का सबसे आसान मार्ग है.. . नामरूपी सेवा…हर रोज पूजा होने के बाद कम स कम पाँच मिनिट भगवान् का नामस्मरण रूप सेवा कारण चाहिए…देखो ५ मिनिट की नाम रूपी सेवा हमारे जीवन परिवर्तन आएगा…चलो तो फिर आज यह ठहरते है… फिर मिलते है… आपको जानकारी पसंद आयी हो तो जरूर हमारा वेबसाइट और चैनल सब्सक्राइब कीजिए। धन्यवाद !!


Share
और पढिये !!

सच्ची पितृ पूजा

हर साल हम पितृ पूजा करते है.. हमारी संस्कृति में साल में १६ दिन हमारे पूर्वजों  की पूजा के लिए दिए है.. यह हमारे पूर्वजों  के प्रति सदभावना व्यक्त करने का दिन... सचमें हमारे पूर्वजोंने कितना विचार पूर्वक यह सब बनाए है..सचमें यह सब देखने के बाद गर्व होता है.. लेकिन कुछ...

श्री महालक्ष्मी पूजा

भाई और बहनो  आप सभी को नमस्कार ! हम सभी लोग अभी श्री गणपति बाप्पा और  साथ में कुछ लोग श्री महालक्ष्मी की भी पूजा कर रहे... सभी तरफ खुशियों का वातावरण है... या सभी पूजा पाठ जब देखता हु... उसके पीछे अपने पूर्वजों  की जो धारणा थी बहोत ऊँची थी... गणपति के साथ... श्री...

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन इनका जन्म ५ सितम्बर १८८८  को तिरुत्तनी गांव जो  चित्तोर जिल्हे में  तमिळनाडू राज्य में हुवा था | उन्होंने अपनी शिक्षा दर्शनशास्त्र में M.A. किया | उन्होंने शिक्षा पूरी होने के बाद साहयक प्रोफेसर का काम मद्रास प्रेसि डेंसी कॉलेज में और बाद में...

गजानन महाराज चरित्र दर्शन ३

गजाजन महाराज बोल रहे है - यह सम्पूर्ण सृष्टि ब्रम्ह व्याप्त है... यहाँ मैला या शुद्ध ऐसा कोई भेद नहीं   श्री गजानन महाराज जी ने भोजन किया यह हम ने दूसरी लीला में देखा... अब श्री महाराज जी का भोजन ख़त्म होने के बाद...उनको पीने के लिए  पानी चाहिए...यह विचार बंकटलाल...

श्री गजानन महाराज दर्शन लीला-2

श्री बंकटलाल अग्रवाल जी बोले हमारा शेगांव धन्य है... ब्रम्हांड नायक योगिराज शेगांव  में आये। ..!! हमने प्रथम लीला में देखा ब्रम्हांड नायक श्री गजाजन महाराज कूड़े में फेंके हुवे फेके हुंए थाली से चावल के शीत उठाकर खा रहे थे ! अभी यह जो दृश्य है वह आने जाने वाले लोग...

श्री स्वामी समर्थ तारक मंत्र..मनन 2

जिथे स्वामी पाय तिथे न्युन काय - ज्या घरात स्वामी सेवा केली जाते तिथे कश्याची कमतरता नसते. या ठिकाणी घरात म्हणजेच आपले ह्रदय मंदिर. ज्या वेळेस आपण स्वामींची सेवा करतो त्या वेळेस हळू हळू आपले मनाला स्थिरता प्राप्त होते. मनाची शुद्धता झाली कि हृदयातून स्वामी नाम येऊ...

श्री दास गणू महाराज

इनका नाम श्री गणेश दत्तात्रेय सहस्रबुद्धे उनको हम सब श्री दास गणू महाराज जी के नाम से जाने जाते है | उनका जनम शके १७८९, पौष शुद्ध एकादशी (दि.०६ /०१/१८६८) को हुवा था | उनका घर का आर्थिक स्तर बहोत अच्छा था | उनकी शिक्षा ४ तक हुवी थी | वे सदैव आनंदी एवं हसत मुख रहते थे |...

श्री स्वामी समर्थ तारक मंत्र..मनन १

खरं तर तारक मंत्र म्हणजे प्रत्येक स्वामीं भक्ता साठी स्वामीं च कवच आहे..प्रत्येक शब्द हा स्वामीं अनुभूती आहे..खरंतर ज्यांनी हा तारक मंत्र शब्द रुपात गुंफला..त्यांची भक्ती ची अवस्था ही खूपच वरच्या पात्रते ची असणार..आणि त्यामुळेच स्वामींनी आपल्या सर्वांसाठी तारक मंत्र...

श्री गजानन महाराज प्रथम दर्शन लीला

परब्रम्ह श्री गजानन महाराज कुछ न बोलके भी हमे बता रहे है " अन्न ही परब्रम्ह है" श्री गजानन महाराज लीला - शेगांव में एक देवीदास पातुरकर नाम के गृहस्थ रहते थे ! वह मठाधिपति थे ! एक दिन उनके लड़के की ऋतु शांति का विधी घर मे थी उस वजह से उन्होंने अनेक लोगोंको को भोजन करने...