श्री सत्यनारायण पूजा- सच्ची समझ के साथ

Oct 24, 2021 | प्रेरनादाई कथा, हिंदी

Share

श्री सत्यनारायण पूजा – सच्ची समझ के साथ

श्री सत्यनारायण पूजा हम लोग करते है लेकिन सचमे सत्यनारायण पूजा यानी क्या… इसमें सचमे क्या करते है… सच्ची सत्यनारायण पूजा कैसे करे… उसका फल हमें कैसे प्राप्त हो सकता है? ऐसे अनेक सवाल हमारे मन में रहते है…लेकिन और लोग करते है इसलिए हम भी पूजा करते है… लेकिन हमें उसका मन चाहा फल नहीं प्राप्त होता… तो चलिए आज जानते है सत्यनारायण पूजा के बारे में.. पहली बात तो यह है की सत्यनारायण की पूजा हम कभी भी कर सकते है… सत्यनारायण की पूजा मुख्यतः दिप पूजन … सूर्य पूजन … गणपति पूजन … शंख … घंटा पूजन …कलश पूजन … नवग्रह पूजन और श्री बालकृष्ण ( गोपाल कृष्ण ) की पूजा की जाती है और उसके बाद कथा श्रवण की जाती है… यह सबके ऊपर अगर आप खुद चिंतन मनन करेंगे तो हमको सत्यनारायण पूजा का सही मकसद समझ में आएगा… लेकिन हम उसके ऊपर चिंतन नहीं करते … इसमें पूजा तो सब करते है लेकिन उसके ऊपर चिंतन करेंगे तो… आपको पूरी सत्यनारायण पूजा का सार समझ में आएगा… प्रथम कथा में आता है… मन में जो भी इच्छा है उसकी पूर्ति के लिए कोनसा व्रत करना चाहिए तो इसमें सत्यनारायण व्रत के बारे में बताया है… कभी भी यह व्रत कर सकते है… इसमें प्रसाद के लिए सूजी, शक्कर, घी इसका प्रसाद बनाने को बताया है… यानि हमें सूजी जैसे अपने मन को साफ़ करना है…शक्कर जैसा हमारा स्वाभाव को मीठा बनान है और घी जैसे उस प्रसाद को स्वादिष्ट बनाता है उस तरह हमें अपना जीवन स्वादिष्ट बनाना है… दूसरे कथा में आता है एक ब्राम्हण सत्यनारायण पूजा का व्रत कर रहा था उस वक्त उधर से एक व्यक्ति उस रस्ते से जा रहा था उसे प्यास और भूख भी लगी थी…उस वक्त उस ब्राह्मण ने उसे पानी और भोजन दिया…और उस इस व्रत के बारे में बताया…यहाँ हमें बोध मिलता है की हमें प्यासे को पानी और भूखे को रोटी देनी चाहिए…यह समझ हमें दूसरी कथा से मिलती है… तीसरी कथा में एक राजा था उसे संतति नहीं थी…उसे सत्यनारायण की पूजा के बारे में पता चला तो उसने भगवान् से प्रार्थना की उसे अगर संतति हुवी तो वह यह व्रत करेगा…उसे संतति हुवी लेकिन उसने व्रत नहीं किया…उउसे लड़की हुवी थी …उसके शादी के वक्त यह व्रत करेंगे ऐसा बोलै … उस वक्त भी व्रत नहीं किया इसलिए उसे कठिनाई आये …यहाँ महत्वपूर्ण बात हमें जो समझनी है की हमें जब कोई समस्या होती है तो हम किसी से मदत मांगते है वह मदत भी करता है लेकिन जब हमारा काम हो जाता है तो हम उस व्यक्ति का एहसान भूल जाते है और बाद में जब तकलीफ आती है तो वह व्यक्ति हमें फिर से मदत कैसे करेगा… इसलिए यहाँ हमें हम जो भी एक दूसरे को आश्वासन देते है उसकी पूर्ति करने का यह कथा हमें सिखाती है …इस कथा में आता है की उस राजा को बहोत तकलीफ हुवी क्यूंकि उसने जो भी कुछ कहाँ तो उस तरह से वह बर्ताव नहीं किया यहाँ पूजा नहीं की यह संदर्भ है… लकिन यहाँ पर हमें चिंतन मनन करना है…चिंतन मनन करने पर हमें समझ में आता है की हमें मदत मिले इस लिए हम किसी को विनती करते है…उस वक्त अगर उसने हमें पैसे की मदत की हो और हमने उसे बोलै है की हम इतने दिन आपके वापस करेंगे तो वह हमें उसे दिया हुवा वचन की पूर्ति करनी है यानी सत्यवचन की पूर्ति … चौथी और पांचवी कथा में आता है की प्रसाद  न लेने से राजा की कन्या को एवं दूसरे एक राजा को तकलीफ हुवी … यहाँ हमें प्रसाद यानी अन्न का महत्व समझाया गया है… देखो खाली पेट हमारी बुद्धि काम नहीं करती … इसलिए हमें हमेशा जो भी अन्न … भोजन मिलता है उसका आदर करना है… उसका अपमान नहीं करना है… इस तरह होती है सच्ची सत्यनारायण पूजा… सत्यनारायण पूजा तो एक बहाना है … हमें सच्ची राह पर चलने को सिखाने का … अगर हम सत्य की राह पर चलेंगे तो हमारा हर एक दन श्री सत्यनारायण पूजा का होगा..फिर हम पूजा करे या ना करे श्री सत्यनारायण प्रभु तो जरूर हम पर भी कृपा करेंगे और हमारे साथ जो रहते है उनके ऊपर भी कृपा होंगी … लेकिन सिर्फ सत्यनारायण की पूजा करेंगे और तुरंत बाद औरों को तकलीफ देंगे तो हम कितनी भी पूजा करेंगे फिर भी सत्यनारायण प्रभु हम पर प्रसन्न नहीं हो सकते।।चलो हम सत्यनारायण प्रभु से प्रार्थना करते है। .. हे श्री सत्यनारायण प्रभु …हमें तो आपकी पूजा कैसी करनी है इसका ज्ञान तो नहीं है…लेकिन जो हम आपकी पूजा करते है …उससे हमें यह ज्ञान दो की हमारा हर एक कर्म सच्चा हो…कुछ भी हो हम सच्चाई की राह न छोड़े यह बुद्धि हमें दो…हमारे जीवन में सच्चे भाव प्रगट हो… हमारा जीवन सच्चाई से भर जाए …व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए हम सत्य का रस्ता न छोड़े…हमारा हर एक एक कर्म सत्य से भरपूर हो.. जिससे हर एक कर्म श्री सत्यनारायण की पूजा बन जाए… यह प्रार्थना करवा लेने के लिए धन्यवाद …कोटि कोटि धन्यवाद


Share
और पढिये !!

श्री स्वामी समर्थ तारक मंत्र..मनन 5

विभूती नमन नाम ध्यान आणी तीर्थ - या ठिकाणी सरळ सरळ अर्थ आहे कि विभूती नमन नाम ध्यान आणी तीर्थ ...म्हणजे स्वामी चरणाची विभूती... स्वामी चरणी व वंदन... स्वामी नामाची साधना... स्वामी नामाचे ध्यान... आणि स्वामी चरणाचे  तीर्थ... हे ज्या स्वामी सेवेकऱ्याच्या  जीवनात आहे......

श्री स्वामी समर्थ तारक मंत्र..मनन 4

खरा होई जागा श्रद्धे सहित - आपण अनेकदा म्हणतो कि मी स्वामींचा सेवेकरी आहे...असे म्हणत असताना आपल्या मनात श्रद्धा जागृत असते... पण अनेकदा काय होते संकट आले वा काही अडचण आली कि आपण विसरून जातो कि... आपण स्वामींचे सेवेकरी आहोत... कारण आपल्या मनात भीती निर्माण झालेली असते...

श्री स्वामी समर्थ तारक मंत्र..मनन 3

उगाचि भितोसी भय हे पळू दे - आपले मन अनेकदा अनेक गोष्टींचा विचार करत असते... उद्या काय होईल... माझे अमुक काम होईल कि नाही... आणि या विचारातुन अनेकदा मनात भीती निर्माण होते... उद्या काय होईल याची... कधी कधी आपणस काही तरी अडचण असते आणि मग आपल्या मनात भीती चे विचार...

श्री गजानन महाराज लीला दर्शन 2

https://youtu.be/6tmiZRVB_Sg   श्री बंकटलाल म्हणत आहेत आपले शेगांव धन्य आहे... ब्रम्हांड नायक योगीराज शेगांव मध्ये आले आहेत . आपण पहिल्या लीलेत पाहिले कि ब्रम्हांड नायक श्री गजाजन महाराज कचरा कुंडी मध्ये फेकलेल्या उष्ट्या पत्रावळी वरील भाताचे शीत उचलून खात...

देवघर कसे असावे

देवघर कसे असावे - खरंतर देवघर कसे असावे.. यावर अनेकांची अनेक मते आहेत... यावर खरंतर प्रत्येकाने चिंतन केले तर प्रत्येक जण स्वतःला प्रामाणिक उत्तर देऊ शकतो कि... देव घर कसे असावे... ज्या ठिकाणी आपले चित्त स्थिर होते.. मन शुद्ध होते...आंतरिक आनंद प्राप्त होईल असे देव घर...

अन्न  हे पूर्ण ब्रह्म आहे त्याचा आदर करा!! श्री गजानन वाणी भाग १ – संदर्भ -ग्रंथ श्री गजानन विजय

श्री गजानन महाराज काही ना बोलता कृती द्वारे सांगत आहेत.. अन्न  हे पूर्ण ब्रह्म आहे त्याचा आदर करा!! श्री क्षेत्र शेगाव मध्ये देवीदास पातुरकर नावाचे गृहस्थ राहात होते... ते मठाधिपती होते... एके दिवशी त्यांच्या घरी त्याच्या मुलाच्या ऋतू शांतीचा कार्यक्रम होता... त्या...

श्री गजानन चरित्र दर्शन ८

हमने लीला क्रमांक ८ मी देखा श्री गजाजन महाराज बंकटलाल के घर पर हि रहे... दुसरे दिन श्री महाराज कि विविध सुंगधी द्रव्य... से उनो मंगल स्नान किया गया... उनकी षोडष उपचार सहित पूजा कि गई... नैवैद्य भी दिखाया... सचमे इतना भक्ती मय  वातावरण था कि सभी लॉग सबकुछ भूलकर श्री...

लक्ष्मी पूजन – प्रार्थना

चला आपण सर्वानी लक्ष्मी पूजनाची तयारी केली असेलच... आपण आज पर्यंत अनेकदा लक्ष्मीपूजन केली असतील... हा उत्सवच आहे मुळात प्रकाशाचा... आपण सर्व जण पूजा करतो... आज आपण लक्ष्मी ची प्रार्थना करणार आहोत... आपणा सर्वाना विनंती आहे आपण घरच्यांनी सर्वानी एकत्र मिळून हि...

साडेसाती म्हणजे – आपला उत्कर्ष

लेखाचे शीर्षक वाचून आपण म्हणाल हे काय सांगता... आज पर्यंत आम्ही साडेसाती म्हंटले कि आम्ही फारच घाबरतो... कुणाला विचारले कि तुम्हाला साडेसाती सुरु आहे का ? आणि जर खरंच त्या व्यक्तीला साडेसाती सुरु असेल तर तो... त्याला त्रास असो वा नसो तो म्हणतो हो ना खूपच त्रास आहे......

साढ़ेसाती यानी – हमारे उन्नति का राजमार्ग

शीर्षक पढ़कर आप बोलेंगे ये क्या बात कर रहे है... आज तक साढ़ेसाती यह शब्द सुनकर ही हमें डर लगता है और आप बोल रहे है... साढ़ेसाती यानी - हमारे उन्नति का राजमार्ग...अगर हमने किसी को पूछा की आपको साढ़ेसाती शुरू है क्या ? अगर वो आदमी तकलीफ में हो तो उसे साढ़ेसाती हो या ना हो......