हमारे जीवन में कोई समस्या आती है तो हमें लगता है की ईश्वर की हमपर अवकृपा है क्या इसलिए मेरे जीवन में समस्या आ रही है.. लेकिन ईश्वर किसी के ऊपर अवकृपा कभी नहीं करता..लेकिन हमारा मन ऐसा है की कभी कुछ अच्छा होता है तो हम क्या कहते है जरा सोचो..हम कहते है मैंने किया इसलिए यह यश हमें प्राप्त हुवा है.. फिर अपयश आने के बाद ऐसे हम क्यूँ कहते है की ईश्वर की अवकृपा है.. चलो हम स्वामी वाणी की कथा द्वारा इसे समझते है.. एक दिन स्वामी महाराज गुस्से में थे उस वक्त वहाँ माटे करके गृहस्थ आते है और कहते है की इनको इतना गुस्सा आता है.. ये ऐसे कैसे साधु.. उस वक्त स्वामी महाराज कुछ कहते नहीं.. कुछ दिनों के बाद उनका कीर्तन उस गांव में होता है.. उस स्वामी महाराज भी उधर थे.. तब स्वामी महाराज उन्हें कहते है की अगर हमें गुस्सा आता तोइन सबकी हम सब्जी नहीं बनाते..उस वक्त उनको अपनी गलती का एहसास हुवा.. देखो लीला दिखने बहोत साधारण लगती है लेकिन जब हम इसके ऊपर चिंतन करते है.. तब हमें पता चलता है की.. ईश्वर कभी हम पर गुस्सा नहीं होता.. वह तो चाहता है की हमारी प्रगति हो.. संकट दे कर वो हमार आत्म बल बढ़ाता है.. अब यहाँ हमारे मन में प्रश्न निर्माण होगा संकट अवकृपा नहीं क्या ? देखो जिस तरह सुख आये तो हम कहते है क्या ईश्वर ने दिया.. उसी तरह हमारे जीवन आने वाला संकट भी हमारे कर्मो का फल ही होता है.. उलटा ईश्वर चाहता है की समस्या से हमारी उन्नती का मार्ग पता चले.. इसलिए हमें संकट में ईश्वर को दोष न देते हुवे ईश्वर का प्रसाद समझकर उस पर कार्य करना है.. बोलो श्री स्वामी समर्थ महाराज की जय.
संदर्भ – स्वामी वाणी