हमें पवित्र स्थानों को जाना चाहिए वहाँ हमे सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ती होती है..इसके बारे में शिव महा पुराण में कथा आती है..एक दिन नारद मुनि साधना करने के लिए हिमालय के एक गुफा में बैठे थे..अब इनकी साधना में बाधा निर्माण करने हेतु काम देव को विनती की..काम देव ने उनकी साधना रोकने के लिए बहोत प्रयास किये लेकिन।सभी प्रयास विफल हो गए..इसका कारण यह था कि वहाँ भगवान शिवजी नी साधना की थी..उनकी साधना भी भंग करने का प्रयास हुवा था तब उन्होंने काम देव को भस्म कर दिया था..लेकिन वह तो भोले नाथ है..उन्होंने उन्हें माफ् कर दिया और कहाँ की इस जगह जो भी कोई साधना करेंगे उनको आप तकलीफ नहीं दे सकते…इसी कारण श्री नारद मुनि जी की साधना में बाधा नहीं आयी..ऐसा स्थान का महात्म्य है..इस लिये हमें…ऐसे स्थानों में जाकर जप ध्यान करना चाहिये..बोलो उमा महेश्वर देवता की जय
बोध- उपरोक्त लीला से हमें बहोत गहरी समझ प्राप्त होती है..कोई।भी स्थान जो उसका हमें महत्व समझ में आता है..इसलिए हमें ऐसे स्थानों पर जाना चाहिये जहाँ हमें सकारात्क ऊर्जा प्राप्त हो उसी तरह हमें भी हमारे घर में.. हम जहाँ भी हो वहाँ सकारात्मक विचार करना है…जिससे वह स्थान सकारात्मक बने…उसे हमें और वहाँ जो भी लोग हो उन्हें सकारात्मक ऊर्जा मिले…! इसके ऊपर आप भी और चिंतन मनन करे