ईश्वर हमको जब कोई समस्या देता है वह चाहता है की हमारी प्रगति हो.. लेकिन हमारा मन समस्या आने के डर से या विचारों के कारण हम यह सब भूल जाते है.. चलो आज हम स्वामी वाणी के माध्यम से इसको समझते है.. श्री स्वामी समर्थ महाराज के भक्त बसप्पा नाम के भक्त थे.. उनकी स्वामी चरणों में अट्टु श्रद्धा थी..स्वामी महाराज को लगता था अब बसप्पा ने संसार पर ध्यान देना चाहिए..एक दिन स्वामी महाराज में रात को जंगल में जाते है.. उस वक्त बसप्पा भी उनके पीछे जाते है.. स्वामी महाराज अब ठहरते है.. उसी वक्त उधर असंख्य सर्प प्रगट होते है… यह देख कर बसप्पा डर जाते है.. लेकिन उनकी स्वामी चरणों में अटूट श्रद्धा थी.. स्वामी उनको कहते है तुमको जितने चाहो उतने साँप लेलो…वह डरते डरते एक सर्प अपने झोली डालता है.. और वह घर चला जाता है.. घर जाने के बाद वह देखता है की उस सर्प की जगह पर सोना हो गया.. वो स्वामी महाराज को धन्यवाद देने लगा.. देखो यह सिर्फ स्वामी महाराज की लीला नहीं है.. यह हमारे लिए एक सीख है.. जीवन में बहोत कठिन प्रसंग आते है.. डरो मत.. अपना स्वामी चरणों का विश्वास अटूट रखो.. कर्म करते रहो.. स्वामी तो हमें सोना देना चाहते है.. हमें सिर्फ धीरज के साथ अपना कर्म स्वामी सेवा है यह विश्वास रख कर करना है.. बोलो श्री स्वामी समर्थ महाराज की जय.. यह लीला स्वामी वाणी से ली है.. !
संदर्भ- स्वामी वाणी
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