साढ़ेसाती यानी – हमारे उन्नति का राजमार्ग

Oct 31, 2021 | प्रेरनादाई कथा, हिंदी

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शीर्षक पढ़कर आप बोलेंगे ये क्या बात कर रहे है… आज तक साढ़ेसाती यह शब्द सुनकर ही हमें डर लगता है और आप बोल रहे है… साढ़ेसाती यानी – हमारे उन्नति का राजमार्ग…अगर हमने किसी को पूछा की आपको साढ़ेसाती शुरू है क्या ? अगर वो आदमी तकलीफ में हो तो उसे साढ़ेसाती हो या ना हो… उसे मालुम हो या ना हो वो कहता है…हाँ मुझे बहोत तकलीफ है… साढ़ेसाती है… या कहेगा साढ़ेसाती है ऐसा लग रहा है… अगर आप उसे पूछेंगे की साढ़ेसाती का मतलब क्या ? तो बहोत से लोग इसका अर्थ नहीं बता सकते… सचमे साढ़ेसाती यानी क्या ? सचमें  साढ़ेसाती यानी समस्या है या हमारा परिपूर्ण विकास  का राजमार्ग है… इसके ऊपर आज हम थोड़ा चिंतन करेंगे…श्री शनि देव हर एक राशि से गोचर भ्रमण ( परिक्रमा ) करते है… यह समय ढाई साल का होता है… यानी जब वो हमारी राशि को आता है उससे पहले वो हमारी राशि के पहले  की राशि में  ढाई साल.. हमारी राशि में ढाई साल और हमारी आगे वाली राशि में ढाई साल ये सभी को जोड़ेगे तो यह कालावधि आता है उसे साढ़ेसाती कहाँ  जाता है… अब आपको साढ़ेसाती यानी क्या समझ में आया होगा…अब आपको एक बात बतानी है… श्री शनिदेव न्याय प्रिय ईश्वर  है..आप कहेंगे श्री शनि देव न्याय प्रिय है यानी क्या ? अब हम इसके ऊपर चिंतन मनन करते है… इससे हमें अनेक सवालों के जवाब प्राप्त होने वाले है… और हमें भी समझ में आएगा की साढ़ेसाती यानी क्या? हम जो भी कुछ काम कर रहे है वो अगर हम प्रामाणिकता से कर रहे है… वो काम करते वक्त हम किसी का भी नुकसान नहीं कर रहे है… फिर कितना भी बुरा समय हो… हम अपना कर्म प्रामणिकता से ईमानदारी से करे यह अपेक्षा श्री शनि देव की होती है… अगर हम कर्म करते वक्त अगर गलत रास्ते का इस्तेमाल करेंगे तो उसका फल हमें निश्चित प्राप्त होता ही है… फिर उस समय को साढ़ेसाती का समय भी हम मान सकते है… अगर हम हमारा कर्म ईमानदारी से नहीं करेंगे तो हमें साढ़ेसाती की तीव्रता का एहसास होने ही वाला है… अब आपको समझ में आया होगा की श्री शनिदेव न्याय प्रिय है… न्याय प्रिय यानी सिर्फ अच्छा  बर्ताव करना ही है क्या  ? सचमें जिनके जीवन में साढ़ेसाती आती है वह समय उनके लिए परिवर्तन का समय होता है.. फिर ये परिवर्तन अच्छा भी हो सकता है या बुरा भी हो सकता है… अच्छा  या बुरा यह सब हम पर निर्भर करता है… हमनें अपने मन को बताया की अब साढ़ेसाती का समय शुरू है… मेरी राशि को साढ़ेसाती है… इस वजह से मुझे बहोत तकलीफ हो रही है… ये साढ़ेसात साल कैसे जाएंगे पता नहीं… उसी वक्त न्याय प्रिय श्री शनिदेव बोलते तथास्तु…तुम्हारी इच्छा पूर्ण हो… यानी हमारा नकारात्मक मन श्री शनिदेव की उपासना करना छोड़कर उन्हें ही के ऊपर टीका करता है… अब आप ही सोचो अगर आपको कोई बुरा कहे तो आपको अच्छा  लगेगा क्या ? नहीं ना ? फिर इस जगह हम न्याय प्रिय श्री शनिदेव के ऊपर ही टीका करते है… हमारा मन भी इसको सच मान लेता है… और आपको एक कहावत तो मालूम ही होंगी ..” शत्रु भी जो हमारे बारे में सोच नहीं सकता वह हमारा मन सोचता है” यानी इस कहावत के अनुसार हमें फल प्राप्त होता है… और हम नकारात्मक बन जाते है… और हमारा मन जाप करता है… साढ़ेसाती … साढ़ेसाती और इसी में फस जाता है.. और हमको सभी रास्ते बंद दिखने लगते है…और हमें बहोत ही तकलीफ होती है… फिर आपके मन में सवाल आ रहा होगा की क्या करे जिससे हमें साढ़ेसाती की तकलीफ न हो… हमारी प्रगति हो… सचमें साढ़ेसाती यानी हमारे यश का राजमार्ग है… किसी भी माँ- बाप को लगता है क्या की हमारा बालक पीछे रहे… वो गलत रास्ते  पर जाए…?  नहीं ना….  ? उसी तरह श्री शनिदेव को कैसे लग सकता है की मेरे भक्त पीछे रह जाए… नहीं ना …तो आज से.. इसी क्षण  से हमें अपने विचारों  में परिवर्तन करना है… उसे नकारात्मक नहीं सकारात्मक बनाना  है… अपने मन को बतावो…यह जो साढ़ेसाती आयी है ना… अब मेरे समृद्धि का समय शुरू होने वाला है.. शुरू हो रहा है… शुरू हो गया है… आज तक कर्म करते वक्त अनेक गलती या की है… वो गलतीया फिर से मत करो यह श्री शनिदेव हमें बता रहे है… जिस तरह घर बनाने से पहले नींव का मजबूत होना जरूरी है  नहीं तो वो इमारत गिर सकती है… उसी तरह साढ़ेसाती मुझे बता रही है… बेटा तुम्हारी नींव  मजबूत करो यानी पहले तुम्हारे मन को मजबूत बनावो…मन यह तुम्हारी जीवन की नींव है… अगर वो मजबूत हो गया तो… फिर साढ़ेसाती यानी जो भी साढ़ेसात साल है.. वो मेरे जीवन को बदलने के लिए  आये है… हर एक कर्म प्रमाणिकता से करो… शुरू शुरू में बहोत तकलीफ होंगी…क्यूंकि यह काम शाब्दिक नहीं है तो कार्मिक है… हर एक समस्या का सामना करते वक्त उस समस्या को धन्यवाद दो…श्री शनि महाराज को धन्यवाद दो… देखो हमारी जिंदगी बदल जायेगी…जीवन में चमत्कार दिखने लगेंगे…फिर कितनी बह तकलीफ हो… हमारे अंतर्मन से एक ही पुकार हमें सुनाई देंगी… धन्यवाद साढ़ेसाती… धन्यवाद श्री शनिदेव…हमारे जीवन में आने के लिए धन्यवाद !

चलो हम श्री शनि देव से प्रार्थन करते है… है श्री शनिदेव मुझे माफ़ करो… आज तक मुझे लगता था की… साढ़ेसाती यानी…श्री शनिदेव की वक्रदृष्टि ( अवकृपा )… लेकिन मुझे आज समझ में आया… साढ़ेसाती यानी ईश्वर ने मेरी प्रगति के लिए बनाया हुवा एक रास्ता है… एक पुकार है.. एक समय है… श्री शनिदेव आपकी वजह से ही तो में जागृत हुवा हु… मुझसे आपको अपेक्षित कर्म करके लो.. यह साढ़ेसात साल मेरा जीवन बदलने वाले बन जाए… और मेरा मन हमेशा सकारात्मक प्रतिसाद दे… धन्यवाद शनिदेव…मुझसे यह प्रार्थना करवा लेने के लिए धन्यवाद…यह प्रार्थना करवा लेने के लिए धन्यवाद


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