स्टीव्ह जॉब्स – ऍपल Steve Jobs

Oct 18, 2021 | प्रेरनादाई कथा, हिंदी

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आज हम देखने वाले है स्टीव्ह जॉब्स इनका चरित्र…. वैसे तो उनके बारे सभी जानते है फिर भी यहाँ हम उनका परिचय के माध्यम से प्रेरणा लेने का प्रयास करने वाले है… ऍपल बोले तो  स्टीव्ह जॉब्स यह सभी को मालूम है… लेकिन क्या आज हम जो इतनी बड़ी कंपनी देख रहे है वो क्या एक दिन में हुवी क्या….इसके लिए उसके जो संस्थापक है… वो क्या पहले से आमिर थे… चलो तो जानते है उनके बारे में… स्टीव्हन पॉल जॉब्स इनका  जनम फेब्रुवारी २४, इ.स. १९५५ सान फ्रान्सिस्को, कॅलिफोर्निया में हुवा था…उनकी माताजी का नाम जोअत्री सिम्पसन था… उनके माताजी ने उन्हें पॉल और क्लारा नामक पति पत्नी को गोद दे दिया…उन्होंने उसका पालन पोषण किया उसे अच्छी शिक्षा देने का प्रयास किया लेकिन कुछ कारण वश उसके कॉलेज की शिक्षा का खर्चा करने में वो असमर्थ रहे… इस वजह से स्टीव्ह को कॉलेज छोड़ना पड़ा आर्थिक स्थिति के कारण उनको खाना भी नहीं मिलता था… छोटे मोटे काम करके अपना गुजरा करते थे… उस वक्त उधर हफ्ते में एक बार भगवान श्री कृष्ण  के मंदिर में प्रसाद के रूप में भोजन मिलता था…इसके लिए वो ७ -८ किलोमीटर दूर चलकर  जाते थे…उसके बाद उन्होंने एक कंपनी में नौकरी शुरू की… वहाँ उनकी मुलाखत स्टीव वोझनीक से हुवी वो उनका बचपन का दोस्त था…उसके बाद ये दोनों दोस्तों ने मिलकर  कंप्यूटर बनाने की कंपनी शुरू करने का सोचा…और उन्होंने अपने घर पर ही यह काम शुरू किया…इसके बारे में ये भी कहाँ  जाता है की उन्होंने गैरेज में कंपनी शुरू की… इसी कंपनी का नाम ऍपल है… आगे जाकर बहोत स्ट्रगल किया और कंपनी बहोत बड़ी हो गई.. इतनी बड़ी हुवी की वो विश्व प्रसिद्ध हो गई… लेकिन ऐसा कुछ हो गया की स्टीव को उनकी ही कपंनी को छोड़ना पड़ा… सब कुछ ख़त्म हो गया ऐसा लग रहा था…उसके बाद उन्होंने दूसरी कंपनी शुरू की लेकिन उसमे भी उन्हें बहोत नुकसान हुवा… लेकिन वे हारे नहीं…उन्होंने नेक्स्ट कम्प्युटर नाम की कंपनी शुरू की ..इसमें उन्हें बहोत अच्छा यश प्राप्त हुवा…वह कंपनी ऍपल  जैसी बन गई.. कुछ सालो के बाद.. स्टीव और  ऍपल के बीच में चर्चा हुवी और उसके बाद नेक्स्ट कंपनी ऍपल में शामिल हो गई और उसके सीईओ स्टीव बन गए… उसके बाद ऍपल और प्रगति पथ पर जाने लगी…कंपनी ने आईपॉड ..आयट्यून बाजार में लेकर आये… इस तरह आज भी ऍपल  एक बड़ा ब्रांड है ये आप सब जानते है. ..ऐसे स्टीव को कैंसर हुवा था लेकिन वो घबराये नहीं …क्यूंकि वो हमेशा कहते थे की में रोज का दिन आखरी दिन है यह सोचकर काम करता हु… जीता हूँ.. ऐसे महान  उद्योजक का  5 ऑक्टोंबर 2011 निधन हो गया… !!!

उपरोक्त चरित्र में बहोत गहरी बाते है जिसे हम हमारे जीवन में आत्मसात कर सकते है… देखो पहली बात तो उनकी माँ ने उन्हें दूसरे माता पिता  को दिया क्यूंकि उनका जीवन अच्छा जाए… यहाँ हमें माँ क्या होती है इसकी समझ  मिलती है… उसके बाद उनके माता पिता  ने उन्हें सबकुछ देने का प्रयास किया पर… कॉलेज के शिक्षा वे दे नहीं पाए… स्टीव ने भी उसे स्वीकार किया और आगे चलते रहे…एक वक्त का खाना भी मिलने जैसी  उनकी परिस्थति नहीं थी… उनका संघर्ष शुरू ही था… उन्होंने शुरू की कंपनी से उन्हें नीकाला गया फिर वे हारे नहीं…और फिर से उसी कम्पनी के सीईओ बने… और आज कपनी एक उच्च स्थान पर है!!

आज की इस चरित्र से हमें पता चलता है की संघर्ष जितना बड़ा होता है… उतना बड़ा यश होता है!!

कठनाई आएगी लेकिन तुम अपना आत्मविश्वास मत खोना

 


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