भगवान का अभिषेक
हम सभी लोग अनेक देवी- देवतावों का हम अभिषेक करते है | कोई भी कर्म हम जब करते है उसके बारे में पूरी जानकारी होंगी तो उसे करने में हमें ज्यादा आनंद , लाभ , फल भी प्राप्त होगा | इसलिए आज हम सब के दिल का जो विषय है उसके बारे में हम जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करने वाले है |
आज तक हमने बहोत बार अभिषेक किया होगा
लेकिन अभिषेक यानी क्या होता है अगर इसके बारे में हमें पूर्ण ज्ञान होगा तो फल भी परिपूर्ण आएगा…| चलो तो आज हम एक प्रयास करते है |
पंडित जी नीचे दिए गए उपचार ( पूजा ) अभिषेक में करते है आवश्यक मंत्रो के साथ यहाँ हम सिर्फ जो भी विधि होती है उसकी जानकारी यहाँ ले रहे है
१) आवाहन – सर्प्रथम जिस भी देवता की पूजा की जाती इस उस देवता का आवाहन किया जाता है… यानी उस देवता को पूजा में आने के लिए विनती की जाती है|
२) आसान – हमारे घर में कोई मेहमान आता है तो हम उसे बैठने के लिए आसान देते है उसी तरह पूजा में हम भगवान् जी को आसान देते है
३)पाद्य- उसके बाद पाद्य पूजा की जाती है |
४) आचमन – उसके बाद भगवान् जी को आचमन करने के लिए जल दिया जाता है
५) अर्घ्य – उसके बाद भगवान् जी को अर्घ्य दिया जाता है |
६ ) पंचामृत – उसके बाद पंचामृत का स्नान कराते है ( दूध , दही , घी , शहद ,चीनी )
७ ) स्नान – उसके बाद भगवान् जी को स्नान कराते है |
८ ) चन्दन – भगवान् जी को चन्दन लगाया जाता है |
९ )अक्षता – उसके बाद अक्षता चढ़ाते है
१० ) पुष्पम – उसके बाद भगवान जी को फूल चढ़ाया जाता है |
११) धुप और दीप की आरती की जाती है|
१२) भगवान् जी को नैवेद्य दिखाया जाता है.
१३) ऊपर जो भी जानकारी दी गई है यह सब भगवान जी को पूजा की थाली में रख कर की जाती है |
१४) इसके बाद पंडित जी विभिन्न स्तोत्रों के साथ भगवान् जी का अभिषेक करते है – इसमें पुरुष सूक्त , स्त्री सूक्त , महिम्न , रूद्र , पवमान इसमें से जो भी स्तोत्र आवश्यक है उसका पठन करके भगवान् जी का अभिषेक करते है|
१५) अभिषेक होने के बाद भगवान जी को उनके स्थान पर रखा जाता है |
१६) यज्ञोपवीत – भगवान् जी को यज्ञोपवीत (जनेवू ) दिया जाता है |
१७ ) वस्त्र – जब हमारे पास कोई मेहमान आता है तो हम उस नए कपडे लेते है उसी तरह हम भगवान् जी को वस्त्र अर्पण करते है|
१८ ) चन्दन – भगवान् जी को चन्दन लगाया जाता है |
१९ ) हल्दी – कुंकुम – भगवान् जी को हल्दी – कुंकुम लगाया जाता है |
२० ) पुष्पम – उसकी बाद विभिन्न फल भगवान् जी को चढ़ाये जाते है |
२१ ) अगर हम देवी का अभिषेक कर रहे हो तो देवी को विविध अलंकार अर्पण किए जाते है |
२२) उसके बाद धुप और दीप की आरती की जाती है|
२३) भगवान् जी को नैवैद्य दिखाया जाता है|
२४ ) उसके बाद भगवान् जी की आरती की जाती है |
इस तरह के षोडश उपचारों से अभिषेक का विधि होती है | यहाँ सिर्फ हम क्या करते है इसके बारे में
संक्षेप में अभिषेक यानी ऊपर दिए गए सभी उपचारोंसे भगवान जी को मंत्र के साथ स्नान | यहाँ जानकारी देना का प्रयास किया है | इसमें कुछ कम जादा हो सकता है| लेकिन हम यहाँ सिर्फ हम अभिषेक यानी क्या यह बताने का प्रयास किया जिससे आप जब भी यह करेंगे तो हम में भक्ति का भाव जागृत हो जाए |
यहाँ दी हुवी बाते में अगर कुछ आपको गलत लगे तो उसे जरूर छोड़ दे |
आप सभी को धन्यवाद|