डिजिटल दुनिया –

Oct 18, 2021 | प्रेरनादाई कथा, हिंदी

Share

डिजिटल दुनिया –

आज का युग डिजिटल युग है .. हम सभी डिजिटल हो गए है … एक समय था की हम एक दूसरे से  सवांद करने के लिए कई महीने- साल रुकना पड़ता था… क्यूंकि लोगों को एक गांव से दूसरे गांव संदेशा  देने के लिए  किसीको भेजना पड़ता था ..बाद में संदेशा  भेजने के लिए पत्रों का ..टेलीग्राम का प्रयोग शुरू हुवा उसमे भी कुछ दिनों का समय लगता था .. लेकिन हर कोई अपने परिजनों को चिठ्ठी लिखता था… वो कैसा है .. उसके घर के सभी की खुशियाली पूछता था …हर रोज हम पोस्टमैन मामाजी की राह देखते थे … अगर वो रास्ते से जाते हुवे दीखते तो हम उन्हें पूछते थे की हमारी कोई चिट्ठी  आयी है क्या  ? स्कुल में थे तब पोस्टमन जी के ऊपर निबंध भी लिखते थे .. पोस्ट के साथ .. कूरियर की सुविधा भी शुरू हुवी .. फिर भी हम चिट्ठी की राह तो देखते ही थे ..जैसे जैसे प्रगति होती गई वैसे वैसे संवाद के नए साधन आने लगे… फोन के ऊपर से बातचीत लोग कर पाने लगे.. गांव में किसी एक के पास टेलीफोन होता था .. उसी का नंबर हम हमारे रिश्तेदारों के देते थे… अब एक दूसरे से संवाद करना थोड़ा आसान हुवा था… फिर भी कुछ गावों में यह सुविधा नहीं थी .. बाद में और प्रगति होने के बाद अब गांव में कुछ कुछ घरो में फोन आने लगे… लेकिन उसका जो भी रेंट था .. हर कॉल जो खर्चा था वो बहुत ही ज्यादा था …ज्यादा बिल न आए इसलिए बहोत से घरो में घरो में उस टेलीफोन को ताला भी लगाते  थे….उसके बाद और प्रगति होने के बाद पेजर भी आया जिससे हमें  एक दूसरे के साथ मेसेज करके संवाद कर सकते थे … उसके बाद और प्रगति हुवी .. जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी थी वे लोग मोबाईल लेने लगे …. लकिन वो भी इतना महंगा था की हमको फोन आया तो भी हमें चार्जेस  लगते थे…. इसलिए उसका भी उपयोग कम होता था ..जैसे जैसे  प्रगति होती गई और एक  समय आया जिस समय इनकमिंग कॉल्स फ्री हो गए .. मोबाइल के दाम कम हो गए .. और एक प्रभावी संदेश का माध्यम सबके लिए  खुला होने लगा ..  तब लोग थोड़ा बहोत संवाद करने लगे  .. उस वक्त इंटरनेट का शुरू शुरू में इतना कोई प्रयोग नहीं था… सभी एक दूसरे से फोन करके बात करने का प्रयास करते थे ..क्यूंकि इंटरनेट बहोत ही महंगा था .. हम प्रगति की और बढ़ ही रहे थे.. अब डिजिटल युग में हम पैर रखने वाले है .. अब एक दिन ऐसा हुवा की जो १ जीबी  डेटा हमें महीने के लिए  मिलता था अब वह हमें हर रोज के लिए १ जीबी डेटा मिलने लगा …उसके साथ और भी एक ऑफर शुरू हो गई की अनलिमिटेड टॉकटाइम की यानी हम अगर २०० का रिचार्ज करेंगे तो हमें एक महीने के लिए … हर रोज हमें कितने भी वक्त बात कर सकते है और हमें १ जीबी डेटा  भी हमें उपलब्ध हो गया… सृष्टि ने सोचा  अब लोग एक दूसरे के साथ संवाद करेंगे… जो लोग एक दुसरे के साथ बात कर नहीं सकते वे अब एक दूसरे के साथ… फोन के द्वारा संवाद करेंगे… वैसा होने ही वाला था की तुरंत सोशल मीडिया के कुछ  ऍपस  जिस से हम एक दूसरे के साथ मेसेज भेज सकते है … फोटो भेज सकते है … हमारा  स्टेटस लगा सकते है … और  उससे कॉल भी कर सकते है .. ऐसे ऍपस आये … अब कुदरत  ने सोचा की अब लोग एक दूसरे के साथ बहोत बात कर सकते है … जरूर लोग अब एक दूसरे के करीब आएंगे .. संवाद बढ़ेगा.. जो लोगों को सालो साल बात नहीं कर सकते थे वे अब एक दूसरे के साथ बात करेंगे.. एक दूसरे की खुशियाली पूछेंगे .. सभी तरफ खुशियाँ ही खुशियाँ आएँगी.. लेकिन हम कुदरत जो चाहती थी वे नहीं हुवा.. हमें ऍपस इस तरह से वश किया की हमारी दुनिया ऍपस की दुनिया बन गई…  हम ऍपस में अटक गए… हमें अनलिमिटेड टॉकटाइम मिल रहा है पर हम किसको को कॉल नहीं करते … ऍप्स  द्वारा भी कॉल नहीं करते …किसीका जन्म दिन आया .. उसको मेसेज करते है … उसके फोटो का स्टेटस लगा देते है…फोट भी ऐसा लगाते है जिसका जन्मदिन है उसको मुगुट पहनाते  है… लोगों  ने सोचने का है इसका जन्मदिन लगता है .. कोई पास हो गया उसका फोटो लगाएंगे.. कोई मर गया उसका फोटो लगाएंगे और लिखेंगे RIP  या भावपूर्ण श्रद्धांजलि .. RIP  का भी शब्द पूरा नहीं लिख रहे उसका पूरा शब्द भी बहोत लोगों को मालूम नहीं… या और कुछ लिखेंगे.. इतना किया हो गया काम .. पति पत्नी भी एक दूसरे से मेसेज के द्वारा बात कर रहे है .. घर के सभी सदस्य मोबाइल के दुनिया में अटक गए … अरे जरा सोचो …सच में हम हमारे भाव प्रगट कर रहे है ? या सिर्फ दिखावा कर रहे है ? सच में हम जिसका स्टेटस लगा रहे है.. उससे हमारी मैत्री है ..  वो हमारा रिश्तेदार है ..  या वो आदमी है ..या एक मशीन है.. या हमारा उसके साथ जो भी रिश्ता है वह सिर्फ दिखावट है क्या ? सच में हम उसके सुख में शामिल है तो उसे फोन करके बधाई नहीं दे सकते ? कोई आदमी मर गया तो उसके घर वालों  को फ़ोन भी नहीं कर सकते ? आखिर हम क्या कर रहे ? सचमे हम डिजिटल हो रहे या ..जूठे इंसान बन रहे है.. अगर हम फोन करेंगे तो .. हम जिसे फ़ोन कर रहे है उसे खुशी  तो होगी..  उसके  साथ हमको जो आंतिरक समाधान प्राप्त होगा  … वह बहोत बड़ा होगा .. डिजिटल बनो लेकिन पहले लोगों  से बात करो जिससे हमको सच्चा सुख… आंनद… प्रेम… प्राप्त होगा ..!! और आज से एक निश्चय करो की .. हम फोन करके संवाद करेंगे.. हम ऐसा नहीं सोचेंगे की उसने मुझे फोन करके शुभेच्छा  नहीं दी..  उसने फोन नहीं किया इसलिए में भी नहीं करूँगा.. सृष्टि  का नियम है.. जो आप उसको देंगे वह आपको और किसी माध्यम से ..  दुगना करके देती है.. चलो आज से शुरवात करते है…

इसमें जो भी कुछ लिखा है दिल से लिखा है .. शब्दों की कमी हो सकती ….कहाँ  शब्दों में गलती भी हो सकती है … उसके लिए  माफ़ करना…. किसी की भी भावना को दुःख पहुंचाने के लिए नहीं बल्कि हम खुद सोचे की हम क्या कर रहे है.. आपने आप का बहुमूल्य समय देकर यह सब पढ़ा इसके लिए  धन्यवाद … कुछ गलत लगा हो तो उसके लिए क्षमा  मांगते है .. पसंद आया तो औरों को शेयर जरूर करो… आपके सुझाव भी हमें जरूर बतावो … धन्यवाद स्वामी .. कोटि कोटि धन्यवाद

 


Share
और पढिये !!

वेळ

भगवंताने सर्वांना एक गोष्ट सारखीच दिली आहे ती म्हणजे दिवसाचे २४ तास त्यामुळे आपण असे कधीच म्हणू शकत नाही कि माझ्या कडे वेळ नाही. वॉरन बफे म्हणतात - श्रीमंत लोक वेळेत गुंतवणूक करतात गरीब लोक पैशाची गुंतवणूक करतात मायकल आल्थसूलर - वेळ उडतो आपण त्याचे पायलट आहोत प्रत्येक...

राखी पौर्णिमा

राखी पौणिमा म्हणजे नात्याला घट्ट करण्याचा उत्सव..आपण वयाने मोठे झालो की काही कारणास्तव या नात्यात दुरावा येतो..या मागे कारण असते वडिलोपार्जित संपत्ती..जी खरं तर नात्यात दुरावा निर्माण करते..खरंतर या साठी कष्ट करणारा मरून जातो..आणि मेल्यावर विचार करतो यासाठीच केले होते...

आपण स्व आदर करतो का

आपण स्वतः ला काय समजतो - खरंतर हा प्रश्न आज पर्यंत आपण आपल्या स्वतःला विचारला आहे का ? विचारला असेल तर आपले आपल्या स्वतः बद्दल मत काय आहे? आपण स्वतः स्वतःचा आदर करता का ? याचे उत्तर काहींचे हो असेल काहींचे नाही असे असेल.. खरंतर जो पर्यंत आपण स्वतः आपला आदर करत नाही तो...

श्री दासबोध दशक १२ समास १

श्री दासबोध दशक १२ समास १ दासबोधातील दशक १२ मधील समास १ मध्ये श्री समर्थ रामदास स्वामी विमल लक्षण सांगत आहेत प्रपंच आणि परमार्थ यांची सांगड घालावी हा उपदेश देत आहेत... प्रपंच करण्यात आळस करू नये.. अनेक लोक म्हणतात प्रपंच आणि परमार्थ एकत्र होऊ शकत नाही... रामदास स्वामी...

नृसिंह जयंती – नृसिंह जन्म कथा

आज नृसिंह जयंती निमित्त चला आपण नृसिंह जन्म कथा पाहूया हिरण्यकश्यपू राजा ह्यांनी भगवंताची भक्ती करून त्याला प्रसन्न करून घेतले होते व असा वर मागितला कि मला कोणत्याही माणसाकडून वा प्राण्याकडून मृत्य येऊ नये, दिवसा किंवा रात्री मृत्य येऊ नये , घरात नाही किंवा बाहेर...

श्री गजानन महाराज चरित्र दर्शन 19 – संदर्भ – श्री गजानन विजय अध्याय 5

संत श्रेष्ठ श्री गजानन महाराज काही दिवस शेगांव मध्ये राहिले... परब्रम्ह जिथे आवश्यकता असते तिथे संचार करत असते. कुणीही त्यांना एका ठिकाणी अडकवून ठेवू शकत नाही. वऱ्हाड प्रांतात अडगाव नावाचे गाव आहे तिथे गजानन महाराज जाण्यासाठी निघाले . तो महिना होता वैशाख. वैशाख महिना...

श्री गजानन महाराज चरित्र दर्शन 18 – संदर्भ – श्री गजानन विजय अध्याय 5

लीला क्रमांक १७ मध्ये आपण पहिले कि महाराज पिपंळगावात आले. समाधी अवस्थे मधून महाराज बाहेर यावेत व आपल्याशी बोलावेत यासाठी गावकर्यांनी कसा प्रयत्न केला आणि त्यांच्या श्रद्धेचे फलस्वरूप महाराज समाधी अवस्थेतून बाहेर आले तो दिवस होता सोमवारचा. पुढे दुसऱ्या दिवशी मंगळवारी...

श्री गजानन चरित्र दर्शन 17 – संदर्भ – श्री गजानन विजय अध्याय 5

श्री गजानन महाराज शेगांव मध्ये होते..महाराजांच्या लीला ची प्रचित अनेक भक्तांना येत होती..त्यामुळे दिवसेंदिवस.. भक्तांची गर्दी वाढतच होती..अचानक एक दिवस महाराजांच्या काय मनात आले माहित नाही... महाराज अचानक शेगांव सोडून... शेगांव जवळ असणाऱ्या पिंपळगाव गावात निघून...

श्री गजानन चरित्र दर्शन 16 – संदर्भ – श्री गजानन विजय अध्याय 4

ऐके दिवशी सर्व सेवेकरी मंडळी महाराजांच्या चरणी सेवा रुजू करत होते.. अचानक महाराजांनी सर्वांना बोलवले व म्हणाले... वसंत पंचमी च्या दिवशी घनपाठी ब्राम्हण बोलवा.. मंत्र जागर करूया.. तसेच सर्वांनी एक एक रुपया दक्षिणा देण्यासाठी काढावा... महाराजांची हि वाणी ऐकून सर्व...