स्वामी भक्त सूरदास यांच्या पासून बोध

Aug 12, 2023 | प्रेरनादाई कथा, मराठी

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स्वामीं भक्त हो..आपण लीला।वाचली असेल..नसेल तर वाचा…!
बोध– वरील लीला जर आपण वाचली..चिंतन मनंन केले तर..बोधच बोध आहेत..चला आजचा बोध पाहू…स्वामीं नी कृपा केली त्याचे नाव काय होते…”सूरदास” ज्यांचा सूर स्वामीं च्या सुराशी जुळला आहे..तो का जुळला त्यांनी..श्री कृष्ण भक्ती करताना नाम सेवा केली..नामात तल्लीन झाले…मग काय..त्यांची हाक इतकी भाव पूर्ण होती की स्वामीं ना वो द्यावी लागली..आपणस ही स्वामीं नामाची कास धरायची आहे..अशी की जशी सूरदास यांनी धरली.. अडचण येतील..मुखातून स्वामीं नाम..आणि आपले कार्य सुरू ठेवायचे आहे..पहा आपला आणि स्वामीं चा सूर नक्की जुळेल…धन्यवाद स्वामीं..!

प्रार्थना– स्वामीं ज्या प्रमाणे सूरदास यांचा सूर तुझ्या भक्तीत एकरूप झाला तसे आमचे.. सूर स्वामीं नामाशी एकरूप कर..आमचा सुरू म्हणेल हे करेल..त्याला परत तुझ्या नामच्या सुरात एकरूप कर..हे तूच करू शकतोस..धन्यवाद समर्था..ही प्रार्थना करून घेतल्याबद्दल धन्यवाद..!
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हमारा जीवन कब तक है हमे मालूम नहीं हमें सिर्फ हर एक कर्म ईश्वर सेवा समझ कर रहना है.

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ईश्वर के दरबार में तो कोई जाती नहीं , धर्म नहीं या पंथ भी नहीं है

स्वामी भक्तो ईश्वर के दरबार में तो कोई जाती नहीं , धर्म नहीं या पंथ भी नहीं है.. लेकिन जब हम हमसे खुद से पूछे तो हम हमको सिर्फ एकहि धर्म के मानते है.. हमें हमारे धर्म का अभिमान जरूर होना चाहिए.. लेकिन और किसी धर्म पर घृणा नहीं होनी चाहिए.. क्यूंकि हम सब को निर्माण...