श्री स्वामी समर्थ
हे समर्था.. मला माफ कर.. दिवसभरात जर माझ्याकडून काही चुकी झाली असे तर मला माफ कर.. परत ती चुकी होणार नाही अशी प्रेरणा मला दे.. दिवसभरात माझ्याकडून कुणाचे मन दुखावले गेले असेल तर मला माफ कर.. समोरच्या व्यक्तीला हि माफ कर.. मनात कोणतेच किंतु परंतु राहू देऊ नकोस… माझे अभ्यासात लक्ष लागू दे.. मी जो काही अभ्यास करेल त्यात माझे लक्षात राहू दे .. रोज काही तरी नवीन शिकण्याची प्रेरणा मला दे.. सर्वांना सुखात.. आनंदात.. ऐश्वर्यात ठेव.. तुझे गोड नाम सदैव मुखात राहू दे .. हे शरीर देवता मला माफ कर आज पर्यंत तुला धन्यवाद दिले नाहीत त्याबद्दल मला माफ कर.. आज पर्यंत जशी मला साथ दिलीस तशीच इथून पुढेही देत रहा हि विनंती.. तुला निरोगी राहण्यासाठी आवश्यक ते भोजन घेण्याची प्रेरणा मला दे.. धन्यवाद समर्था .. कोटी कोटी धन्यवाद.. बोला श्री स्वामी समर्थ महाराज कि जय
रोजची क्षमा प्रार्थना
एक विचार आपले जीवन बदलतो
व्यक्ती मधील गुण
चोवीस तास स्वामीं भक्तीत कसे रहावे..!
स्वामी भक्तहो.. आपण अनेकदा म्हणतो ऐकतो.. अनेकदा स्वामी वाणीतून आपण ऐकतो "स्वामी भक्तीत रहावे" स्वामी भक्तीत राहणे याचा अर्थ असा आहे का आपण २४ तास स्वामी नाम घ्यायचे आहे.. हे शक्य सुद्धा नाही.. तर मग आपण स्वामी भक्तीत राहणार कसे.. स्वामी भक्तीत राहणे शक्य आहे का ? हो...
स्व अनुभव नसणारी गोष्ट इतरांना सांगू नये – संदर्भ – श्री गजानन विजय अध्याय ८
स्व अनुभव नसणारी गोष्ट इतरांना सांगू नये - संदर्भ - श्री गजानन विजय अध्याय ८ श्री गजानन महाराज श्री खंडू पाटील यांचे बंधू कृष्णाजी पाटील यांच्या घरी राहत होते.. श्री भास्कर पाटील आणि तुकाराम कोकाटे श्रीं ची सेवा करत होते.. अचानक एकेदिवशी त्या मळ्यात काही गोसावी आले...
अगर हमें कोई कुछ बता रहा हो.. हमें वो पसंद नहीं आ रहा हो.. क्यूंकि हम उसका अर्थ अपने विचारों से लगाते है. स्वामी वाणी
स्वामी भक्तो ..बहोत बार हम कुछ पढ़ते है या सुनते है लेकिन बहोत बार बार हम उसका अर्थ हमारी समझ की तहत लगाते है.. उससे बहोत बार हमें निराशा आती है या हमारे मन में शंका निर्माण होती है.. यह नियम केवल अध्यात्म में ही नहीं तो हमारे जीवन में लागु होता है.. इसे हम स्वामी वाणी...
हमें संकट में ईश्वर को दोष न देते हुवे ईश्वर का प्रसाद समझकर उस पर कार्य करना है.. स्वामी वाणी
हमारे जीवन में कोई समस्या आती है तो हमें लगता है की ईश्वर की हमपर अवकृपा है क्या इसलिए मेरे जीवन में समस्या आ रही है.. लेकिन ईश्वर किसी के ऊपर अवकृपा कभी नहीं करता..लेकिन हमारा मन ऐसा है की कभी कुछ अच्छा होता है तो हम क्या कहते है जरा सोचो..हम कहते है मैंने किया इसलिए...
स्थानों का महत्व
हमें पवित्र स्थानों को जाना चाहिए वहाँ हमे सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ती होती है..इसके बारे में शिव महा पुराण में कथा आती है..एक दिन नारद मुनि साधना करने के लिए हिमालय के एक गुफा में बैठे थे..अब इनकी साधना में बाधा निर्माण करने हेतु काम देव को विनती की..काम देव ने उनकी...
हमारा जीवन कब तक है हमे मालूम नहीं हमें सिर्फ हर एक कर्म ईश्वर सेवा समझ कर रहना है.
हमारा संपूर्ण जीवन नियोजित है.. कब हमारा जन्म होगा कब मृत्यु यह हमारे हाथ में नहीं.... फिर भी हमें ऐसा लगता है की मैं कर्ता हु.. लेकिन उस वक्त हम यह नहीं सोचते की कब ये साँस बंद हो पता नहीं फिर भी हम यह सब भूल जाते है.. हमें यह भूलना नहीं है.. चलो हम स्वामी वाणी की...
ईश्वर के दरबार में तो कोई जाती नहीं , धर्म नहीं या पंथ भी नहीं है
स्वामी भक्तो ईश्वर के दरबार में तो कोई जाती नहीं , धर्म नहीं या पंथ भी नहीं है.. लेकिन जब हम हमसे खुद से पूछे तो हम हमको सिर्फ एकहि धर्म के मानते है.. हमें हमारे धर्म का अभिमान जरूर होना चाहिए.. लेकिन और किसी धर्म पर घृणा नहीं होनी चाहिए.. क्यूंकि हम सब को निर्माण...