श्री गजानन महाराज बोल रहे है- जब व्रत लिया उस वक्त सोचा नही और अब जब व्रत कि पूर्ती करते वक्त क्यूँ हिचकिचाते हो !
लीला- श्री गजानन महाराज बंकटलाल के घर शेगांव मी रह रहे थे … काशी के गोसावी थे.. उन्होंने श्री गजानन महाराज जी कि लीलाए सुनकर…एक व्रत लेने का निर्णय लिया…उन्होंने ऐसा व्रत किया की अगर मेरा अमुक अमुक काम हो गया तो में श्री गजानन महाराज जी को भांग अर्पण करूँगा…उन्होंने यह व्रत इसलिए लिया था की उनको खुद को भांग बहोत पसंद था… अब कुछ दिनों के बाद उनका कमा हो गया… अब व्रत पूर्ति करने के लिए वो। .. शेगांव में आ गए… आने के बाद उन्होंने देखा की श्री गजानन महाराज जी के दर्शन के लिए बहोत भीड़ थी… उनके मन में विचार आया की इतनी भीड़ में मेरा दर्शन कैसे होगा…और इतनी भीड़ में अगर में यह महाराज जी को अर्पण करूँगा तो उपस्थित लोग मुझे मारेंगे…उनके मन में यह विचार शुरू थे… उसी वकत श्री महाराज को उनके मन की बात समझ आ गई.. श्री महाराज ने उधर उपस्थित कुछ भक्तों को गोसावी की बुलाने को कहाँ..गोसावी नम्रतापूर्वक श्री महारज के सामने हाँथ जोड़कर खाद हो गया… तब श्री महाराज बोले लावो तुमने लायी हुवी भेट… जो तुम्हारे थैली में तीन महीने से राखी हुवी है… श्री महाराज की यह वाणी सुनकर वो अचंबित हो गया… उसी तरह श्री महाराज उसे बोले जब व्रत लिया उस वक्त सोचा नही और अब जब व्रत कि पूर्ती करते वक्त क्यूँ हिचकिचाते हो.. इस तरह श्री महाराज ने सही समझ के साथ गोसावी के व्रत की पूर्ति कर के ली.
बोलो || अनंत कोटी ब्रम्हाण्ड नायक महाराजाधिराज योगीराज परब्रम्ह सच्चितानंद
भक्त प्रतिपालक शेगाँव निवासी समर्थ सदगुरु श्री संत गजानन महाराज की जय ||
बोध – उपरोक्त लीला तो हमारे लिए तो ज्ञान का भांडार है.. गोसावी जी को समस्या थी इसलिए उन्होंने वह समस्या छूटे इसलिए उन्होंने व्रत लिया… व्रत ऐसा लिया की जो उनको पसंद था… और जब व्रत की पूर्ति का वक्त आया तो वो डगमगाने लगे… ऐसी ही स्थिति हमारी होती है… हमको समस्या आती है तो हम ऐसा व्रत लेते है जो हमें अच्छा लगता है..वैसे तो श्री महाराज एक प्रकार से यहाँ समझ दे रहे है की व्रत लेना ही है तो ऐसा लो जिससे हम् में बदलाव हो… वैसे तो भगवान को हमसे कुछ भी नहीं चाहिए…व्रत करना ही है तो गलत आदते छोड़ने का व्रत करो यह श्री महाराज हमें बोध दे रहे है… अनेक लोगों को आदत होती है की कुछ भी समस्या आती है तो तुरंत व्रत लेते है… व्रत ऐसा लेते है… हे ईश्वर मेरा इतना काम कर दो ..मुझे अमुक अमुक वस्तु अगर मिल जाएगी तो में तुम्हे यह यह चीज अर्पण करूँगा…पाहि बात तो यह है की भगवांन और हमारे बीच का जो रिश्ता है.. वो क्या व्यवहारिक रिश्ता है क्या? नहीं ना तो फिर क्यूँ भगवान् को व्रत करते हो… करनी है तो प्रार्थना करो… भक्ति माँगो ..भगवान् को हमसे कुछ है चाहिए …जिसने यह ब्रम्हांड निर्माण किया उसको हमसे यह भौतिक वस्तु लेकर हम पर वो कृपा करेंगे क्या…कितना गहरा बोध महाराज दे रहे है… !
चलो हम श्री महाराज से प्रार्थना करते है… श्री गजानन महाराज हमें आपसे क्या मांगना है… यह समझ नहीं है… आजकी लीला के माध्यम से हमें आपने यह समझ दी उसके लिए धन्यवाद…हमें व्रत करने की नहीं भक्ति बढ़ने की समझ दो… हमें माँगने की नहीं… हमारे विकारों को छोड़ने की समझ दो… यह प्रार्थना करवा लेने के लिए धन्यवाद