नामस्मरण भक्ति – नवविधा भक्ति

Oct 24, 2021 | प्रेरनादाई कथा, हिंदी

Share

नामस्मरण भक्ति – नवविधा भक्ति
इस भक्ति के बारे में समर्थ श्री रामदास स्वामी श्री दासबोध में कहते है – ” स्मरण देवाचे करावें | अखंड नाम जपत जावें | नामस्मरणें पावावें | समाधान | नित्य नेम प्रातः काळी | माध्यानकाळी सायंकाळी | नामस्मरण सर्वकाळी करत जावें |
नवविधा भक्ति का तीसरा प्रकार है… नामस्मरण भक्ति …यह भक्ति बहोत ही सरल भक्ति है.. इस भक्ति के लिए कुछ भी बंधन नहीं है… जिस भी भगवान् के ऊपर आपक श्रद्धा हो उस भगवान् की नामस्मरण रूपी भक्ति हम कर सकते है.. जैसे हमारी श्रद्धा ” भगवान् श्री कृष्ण पर है तो हम “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” इस मंत्र की नामस्मरण रूपी सेवा कर सकते है… अगर हमारी और किस भगवान् के ऊपर श्रद्धा उस भगवान् के नाम का कोनसा भी मंत्र का जप हम करा सकते है… बहोत से बार हमारे मन में सवाल निर्माण होता है की नाम रूपी सेवा कब करे ? उसके बारे में समर्थ कहते है… अखंड नाम जप की सेवा करनी चाहिए … नामरूपी सेवा में डूब जाना चाहिए…सुबह उठने के बाद…दोपहर को… रात को… ऐसे हर समय नामरूपी सेवा करनी चाहिए…इसके लिए कुछ बह बंधन नहीं है… हम जहाँ कहाँ भी है वहाँ आप नाम रूपी सेवा कर सकते है… इसके लिए कुछ भी साधनो की आवश्यकता नहीं लगती सिर्फ हमें इसमें निरंतरता रखनी है… यह भक्ति करने की सबसे आसान और सरल मार्ग है… जैसे हमारा श्वास चलता है उसी तरह हमारे जीवन नामरूपी सेवा चलनी चाहिए … इसके तो बहोत से लाभ है… लकिन कलियुग में ईश्वर के भक्ति का सबसे सरल और आसान मार्ग है नामस्मरण रूपी भक्ति…इसलिए हम सभी ने अपने जीवन में अपने मन को ईश्वर की नामरूपी भक्ति में डूब जाना है… हर रोज कमसे कम १ माला नाम रूपी सेवा करनी चाहिए… और इस तरह से हमारे जीवन में भक्ति बढ़ानी है !!


Share
और पढिये !!

चोवीस तास स्वामीं भक्तीत कसे रहावे..!

स्वामी भक्तहो.. आपण अनेकदा म्हणतो ऐकतो.. अनेकदा स्वामी वाणीतून आपण ऐकतो "स्वामी भक्तीत रहावे" स्वामी भक्तीत राहणे याचा अर्थ असा आहे का आपण २४ तास स्वामी नाम घ्यायचे आहे.. हे शक्य सुद्धा नाही.. तर मग आपण स्वामी भक्तीत राहणार कसे.. स्वामी भक्तीत राहणे शक्य आहे का ? हो...

स्व अनुभव नसणारी गोष्ट इतरांना सांगू नये – संदर्भ – श्री गजानन विजय अध्याय ८

स्व अनुभव नसणारी गोष्ट इतरांना सांगू नये - संदर्भ - श्री गजानन विजय अध्याय ८ श्री गजानन महाराज श्री खंडू पाटील यांचे बंधू कृष्णाजी पाटील यांच्या घरी राहत होते.. श्री भास्कर पाटील आणि तुकाराम कोकाटे श्रीं ची सेवा करत होते.. अचानक एकेदिवशी त्या मळ्यात काही गोसावी आले...

अगर हमें कोई कुछ बता रहा हो.. हमें वो पसंद नहीं आ रहा हो.. क्यूंकि हम उसका अर्थ अपने विचारों से लगाते है. स्वामी वाणी

स्वामी भक्तो ..बहोत बार हम कुछ पढ़ते है या सुनते है लेकिन बहोत बार बार हम उसका अर्थ हमारी समझ की तहत लगाते है.. उससे बहोत बार हमें निराशा आती है या हमारे मन में शंका निर्माण होती है.. यह नियम केवल अध्यात्म में ही नहीं तो हमारे जीवन में लागु होता है.. इसे हम स्वामी वाणी...

हमें संकट में ईश्वर को दोष न देते हुवे ईश्वर का प्रसाद समझकर उस पर कार्य करना है.. स्वामी वाणी

हमारे जीवन में कोई समस्या आती है तो हमें लगता है की ईश्वर की हमपर अवकृपा है क्या इसलिए मेरे जीवन में समस्या आ रही है.. लेकिन ईश्वर किसी के ऊपर अवकृपा कभी नहीं करता..लेकिन हमारा मन ऐसा है की कभी कुछ अच्छा होता है तो हम क्या कहते है जरा सोचो..हम कहते है मैंने किया इसलिए...

स्थानों का महत्व

हमें पवित्र स्थानों को जाना चाहिए वहाँ हमे सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ती होती है..इसके बारे में शिव महा पुराण में कथा आती है..एक दिन नारद मुनि साधना करने के लिए हिमालय के एक गुफा में बैठे थे..अब इनकी साधना में बाधा निर्माण करने हेतु काम देव को विनती की..काम देव ने उनकी...

हमारा जीवन कब तक है हमे मालूम नहीं हमें सिर्फ हर एक कर्म ईश्वर सेवा समझ कर रहना है.

हमारा संपूर्ण जीवन नियोजित है.. कब हमारा जन्म होगा कब मृत्यु यह हमारे हाथ में नहीं.... फिर भी हमें ऐसा लगता है की मैं कर्ता हु.. लेकिन उस वक्त हम यह नहीं सोचते की कब ये साँस बंद हो पता नहीं फिर भी हम यह सब भूल जाते है.. हमें यह भूलना नहीं है.. चलो हम स्वामी वाणी की...

ईश्वर के दरबार में तो कोई जाती नहीं , धर्म नहीं या पंथ भी नहीं है

स्वामी भक्तो ईश्वर के दरबार में तो कोई जाती नहीं , धर्म नहीं या पंथ भी नहीं है.. लेकिन जब हम हमसे खुद से पूछे तो हम हमको सिर्फ एकहि धर्म के मानते है.. हमें हमारे धर्म का अभिमान जरूर होना चाहिए.. लेकिन और किसी धर्म पर घृणा नहीं होनी चाहिए.. क्यूंकि हम सब को निर्माण...

ईश्वर हमको जब कोई समस्या देता है वह चाहता है की हमारी प्रगति हो

ईश्वर हमको जब कोई समस्या देता है वह चाहता है की हमारी प्रगति हो.. लेकिन हमारा मन समस्या आने के डर से या विचारों के कारण हम यह सब भूल जाते है.. चलो आज हम स्वामी वाणी के माध्यम से इसको समझते है.. श्री स्वामी समर्थ महाराज के भक्त बसप्पा नाम के भक्त थे.. उनकी स्वामी चरणों...