परब्रम्ह श्री स्वामी समर्थ महाराज

Oct 18, 2021 | प्रेरनादाई कथा, हिंदी

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परब्रम्ह श्री स्वामी समर्थ महाराज

विश्व  के चालक- मालक-पालक भगवान् श्री स्वामी समर्थ महाराज का चरित्र तो अथांग सागर जैसा है वह किसी एक लेख में या पोस्ट में समा  नहीं सकता ये तो सभी स्वामी भक्त जानते ही है ! यहाँ हम आपको एक ऐसी वेबसाइट के बारे में जानकारी देने वाले है जहाँपर आपको श्री स्वामी समर्थ महाराज जी का चरित्र पढ़ने को मिलेगा उसेसे पहले आपको यहाँ थोड़ी जानकारी देने का हम यहाँ प्रयास करते है ! इ. स. ११४९ में छेले  खेड़े ग्राम में भगवान दत्तात्रय जी ने श्री स्वामी समर्थ अवतार लिया ! २२९ साल पुरे विश्व में यानी चीन मलाया सिंगापूर और संपूर्ण भारतभर स्वामी महाराज जी ने यात्रा की उन्हें अंधश्रद्धा बिलकुल पसंद नहीं थी ! इ.स १५२८ में महाराष्ट्र के कारंजा से अपना कार्य श्री  नृसिंहंसरस्वती अवतार  ले कर किया ! इ.स. १६७८ में उन्होनो अपने अवतार की सांगता करके फिर से १८५६ में श्री स्वामी समर्थ अवतार धारण किया ! स्वामी महाराज भगवान् श्री दत्तात्रय  जी के ही अवतार है ! वे हमेशा कहते थे की मै  नृसिंह  भान श्री शैलम में जो कर्दळी  वन है वहाँ  से में आया हु ! उन्होने हम सभी को अभय वरदान दिया वो यह है की – डरो मत मै  तुम्हारे साथ हू  ( भिऊ नकोस मी तुझ्या पाठीशी आहे ) यह जो अभय वचन उसकी अनुभूति हम सभी स्वामी भक्तो को हमेशा  आती है ! हम सब की स्वामी महाराज जी के ऊपर की  श्रद्धा विश्वास भक्ति बढे हमे  स्वामी महाराज जी चरित्र पढ़ना चाहिए उसके ऊपर मनन करना चाहिए ! आज अनेक ग्रंथ उपलब्ध है ! लेकिन आज के भागती दौड़ती जिंदगी हमें यह संभव नहीं होता लेकिन स्वामी महाराज जी की लीला तो बहोत गहरी है ! उन्होने हम सबके लिए चरित्र और उसका बोध आज वेबसाइट के माध्यम से हमें उपलब्ध  करा दिया है ! हमें सिर्फ हमारे समय अनुसार उस वेबसाइट के ऊपर जा कर वह पढ़ना है उसके ऊपर चिंतन मनन  करना है ! देखिए आपके अनेक सवालों का जबाब आपका हमारे स्वामी महाराज जी के लीला से प्राप्त होंगे  ! इस वेबसाइट के ऊपर स्वामी वाणी मराठी और हिंदी ये दोनों भाषा में उपलब्ध है ! इस लेख के माध्यम से में  जिन्होंने भी यह सेवा की उनको धन्यवाद देता हु ! स्वामी महाराज जी को भी धन्यवाद ! स्वामी महाराज जी से हम यहाँ यही प्रार्थना करेंगे की उन्हें और अधिकाधिक स्वामी वाणी का विश्लेषण करने का मौक़ा मिलता रहे और हमें स्वामी वाणी कर प्रसाद मिलता रहे – चलो स्वामी वाणी के गाँव जाते है ! हमारी है एक सांस स्वामी मया बने इसलिए हम भी स्वामी वाणी पढ़े और बाकी लोगो को भी इस बारे में  बताइये – स्वामी वाणी वेबसाइट WWW.SWAMIVAANI.COM

 


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चोवीस तास स्वामीं भक्तीत कसे रहावे..!

स्वामी भक्तहो.. आपण अनेकदा म्हणतो ऐकतो.. अनेकदा स्वामी वाणीतून आपण ऐकतो "स्वामी भक्तीत रहावे" स्वामी भक्तीत राहणे याचा अर्थ असा आहे का आपण २४ तास स्वामी नाम घ्यायचे आहे.. हे शक्य सुद्धा नाही.. तर मग आपण स्वामी भक्तीत राहणार कसे.. स्वामी भक्तीत राहणे शक्य आहे का ? हो...

स्व अनुभव नसणारी गोष्ट इतरांना सांगू नये – संदर्भ – श्री गजानन विजय अध्याय ८

स्व अनुभव नसणारी गोष्ट इतरांना सांगू नये - संदर्भ - श्री गजानन विजय अध्याय ८ श्री गजानन महाराज श्री खंडू पाटील यांचे बंधू कृष्णाजी पाटील यांच्या घरी राहत होते.. श्री भास्कर पाटील आणि तुकाराम कोकाटे श्रीं ची सेवा करत होते.. अचानक एकेदिवशी त्या मळ्यात काही गोसावी आले...

अगर हमें कोई कुछ बता रहा हो.. हमें वो पसंद नहीं आ रहा हो.. क्यूंकि हम उसका अर्थ अपने विचारों से लगाते है. स्वामी वाणी

स्वामी भक्तो ..बहोत बार हम कुछ पढ़ते है या सुनते है लेकिन बहोत बार बार हम उसका अर्थ हमारी समझ की तहत लगाते है.. उससे बहोत बार हमें निराशा आती है या हमारे मन में शंका निर्माण होती है.. यह नियम केवल अध्यात्म में ही नहीं तो हमारे जीवन में लागु होता है.. इसे हम स्वामी वाणी...

हमें संकट में ईश्वर को दोष न देते हुवे ईश्वर का प्रसाद समझकर उस पर कार्य करना है.. स्वामी वाणी

हमारे जीवन में कोई समस्या आती है तो हमें लगता है की ईश्वर की हमपर अवकृपा है क्या इसलिए मेरे जीवन में समस्या आ रही है.. लेकिन ईश्वर किसी के ऊपर अवकृपा कभी नहीं करता..लेकिन हमारा मन ऐसा है की कभी कुछ अच्छा होता है तो हम क्या कहते है जरा सोचो..हम कहते है मैंने किया इसलिए...

स्थानों का महत्व

हमें पवित्र स्थानों को जाना चाहिए वहाँ हमे सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ती होती है..इसके बारे में शिव महा पुराण में कथा आती है..एक दिन नारद मुनि साधना करने के लिए हिमालय के एक गुफा में बैठे थे..अब इनकी साधना में बाधा निर्माण करने हेतु काम देव को विनती की..काम देव ने उनकी...

हमारा जीवन कब तक है हमे मालूम नहीं हमें सिर्फ हर एक कर्म ईश्वर सेवा समझ कर रहना है.

हमारा संपूर्ण जीवन नियोजित है.. कब हमारा जन्म होगा कब मृत्यु यह हमारे हाथ में नहीं.... फिर भी हमें ऐसा लगता है की मैं कर्ता हु.. लेकिन उस वक्त हम यह नहीं सोचते की कब ये साँस बंद हो पता नहीं फिर भी हम यह सब भूल जाते है.. हमें यह भूलना नहीं है.. चलो हम स्वामी वाणी की...

ईश्वर के दरबार में तो कोई जाती नहीं , धर्म नहीं या पंथ भी नहीं है

स्वामी भक्तो ईश्वर के दरबार में तो कोई जाती नहीं , धर्म नहीं या पंथ भी नहीं है.. लेकिन जब हम हमसे खुद से पूछे तो हम हमको सिर्फ एकहि धर्म के मानते है.. हमें हमारे धर्म का अभिमान जरूर होना चाहिए.. लेकिन और किसी धर्म पर घृणा नहीं होनी चाहिए.. क्यूंकि हम सब को निर्माण...

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ईश्वर हमको जब कोई समस्या देता है वह चाहता है की हमारी प्रगति हो.. लेकिन हमारा मन समस्या आने के डर से या विचारों के कारण हम यह सब भूल जाते है.. चलो आज हम स्वामी वाणी के माध्यम से इसको समझते है.. श्री स्वामी समर्थ महाराज के भक्त बसप्पा नाम के भक्त थे.. उनकी स्वामी चरणों...