हमारी संस्कृति में भक्ति के नौ प्रकार बताये गए है… इस प्रकार में सर्वप्रथम आती है श्रवण भक्ति… हर एक भक्ति पद्धति अलग अलग होती है… लेकिन श्रवण भक्ति सभी लोग जाने अनजाने में करते ही है…इसके बारे में श्री समर्थ रामदास स्वामी कहते है ” प्रथम भजन ऐंसे जाण | हरिकथापुराणश्रवण | नाना अध्यात्मनिरूपण | ऐकत जावे | इसका मतलब भगवान् की कथा श्रवण करो, पुराण श्रवण करो… प्रवचन या सत्संग सुनो | अभी यहाँ एक सवाल हमारे मन में आता है की श्रवण भक्ति कैसे हो सकती है… अभी देखो जब हमारा जन्म होता है… तब हम मुँह से बात नहीं कर सकते थे तब… घर वाले हमारे साथ बात करते थे… हमको कुछ भी नहीं समझता था लेकिन… कुछ दिन के बाद हम बोलने का प्रयास करते है… ये कैसे संभव होता है… यह संभव होता है.. हम बड़ो की बाते सुन सुन कर बोलना सिखते है… इसका मतलब हम अनजाने में श्रवण भक्ति करते है और इसी श्रवण भक्ति के वजह से हम बोलना सीखते है ..यानी अगर हम श्रवण नहीं करते तो हम बात नहीं कर सकते थे… इसका मतलब हम सब के जिंदगी में श्रवण भक्ति का महत्व अनन्य साधारण ऐसा है… अब सवाल ये उठता है की… सिर्फ आध्यात्मिक बाते सुनना ही श्रवण भक्ति होंगी क्या | जिससे आपकी जिंदगी में अच्छा बदलाव आएगा ..वो हर एक श्रवण… श्रवण भक्ति बनेगा… अनेक पुरातन ग्रंथ आज ऑडियो बुक्स में उपलब्ध है… अनेक प्रवचन ..कीर्तन .. सकारात्मक… प्रेरणात्मक भाषण… यह सब आज ऑनलाइन उपलब्ध है… जरूरत है सिर्फ हमारे सुनने की… वो बह सिर्फ सकारात्मक… जिससे हमारा हर एक श्रवण… हमारी श्रवण भक्ति बन जाए… आपको यह जानकारी पसंद आयी तो जरूर हमारा चॅनेल सब्सक्राइब किजीये और लोगो के साथ शेयर भी कीजिये .. धन्यवाद
श्रवण भक्ति – नवविधा भक्ति
व्यक्ती मधील गुण
चोवीस तास स्वामीं भक्तीत कसे रहावे..!
स्वामी भक्तहो.. आपण अनेकदा म्हणतो ऐकतो.. अनेकदा स्वामी वाणीतून आपण ऐकतो "स्वामी भक्तीत रहावे" स्वामी भक्तीत राहणे याचा अर्थ असा आहे का आपण २४ तास स्वामी नाम घ्यायचे आहे.. हे शक्य सुद्धा नाही.. तर मग आपण स्वामी भक्तीत राहणार कसे.. स्वामी भक्तीत राहणे शक्य आहे का ? हो...
स्व अनुभव नसणारी गोष्ट इतरांना सांगू नये – संदर्भ – श्री गजानन विजय अध्याय ८
स्व अनुभव नसणारी गोष्ट इतरांना सांगू नये - संदर्भ - श्री गजानन विजय अध्याय ८ श्री गजानन महाराज श्री खंडू पाटील यांचे बंधू कृष्णाजी पाटील यांच्या घरी राहत होते.. श्री भास्कर पाटील आणि तुकाराम कोकाटे श्रीं ची सेवा करत होते.. अचानक एकेदिवशी त्या मळ्यात काही गोसावी आले...
अगर हमें कोई कुछ बता रहा हो.. हमें वो पसंद नहीं आ रहा हो.. क्यूंकि हम उसका अर्थ अपने विचारों से लगाते है. स्वामी वाणी
स्वामी भक्तो ..बहोत बार हम कुछ पढ़ते है या सुनते है लेकिन बहोत बार बार हम उसका अर्थ हमारी समझ की तहत लगाते है.. उससे बहोत बार हमें निराशा आती है या हमारे मन में शंका निर्माण होती है.. यह नियम केवल अध्यात्म में ही नहीं तो हमारे जीवन में लागु होता है.. इसे हम स्वामी वाणी...
हमें संकट में ईश्वर को दोष न देते हुवे ईश्वर का प्रसाद समझकर उस पर कार्य करना है.. स्वामी वाणी
हमारे जीवन में कोई समस्या आती है तो हमें लगता है की ईश्वर की हमपर अवकृपा है क्या इसलिए मेरे जीवन में समस्या आ रही है.. लेकिन ईश्वर किसी के ऊपर अवकृपा कभी नहीं करता..लेकिन हमारा मन ऐसा है की कभी कुछ अच्छा होता है तो हम क्या कहते है जरा सोचो..हम कहते है मैंने किया इसलिए...
स्थानों का महत्व
हमें पवित्र स्थानों को जाना चाहिए वहाँ हमे सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ती होती है..इसके बारे में शिव महा पुराण में कथा आती है..एक दिन नारद मुनि साधना करने के लिए हिमालय के एक गुफा में बैठे थे..अब इनकी साधना में बाधा निर्माण करने हेतु काम देव को विनती की..काम देव ने उनकी...
हमारा जीवन कब तक है हमे मालूम नहीं हमें सिर्फ हर एक कर्म ईश्वर सेवा समझ कर रहना है.
हमारा संपूर्ण जीवन नियोजित है.. कब हमारा जन्म होगा कब मृत्यु यह हमारे हाथ में नहीं.... फिर भी हमें ऐसा लगता है की मैं कर्ता हु.. लेकिन उस वक्त हम यह नहीं सोचते की कब ये साँस बंद हो पता नहीं फिर भी हम यह सब भूल जाते है.. हमें यह भूलना नहीं है.. चलो हम स्वामी वाणी की...
ईश्वर के दरबार में तो कोई जाती नहीं , धर्म नहीं या पंथ भी नहीं है
स्वामी भक्तो ईश्वर के दरबार में तो कोई जाती नहीं , धर्म नहीं या पंथ भी नहीं है.. लेकिन जब हम हमसे खुद से पूछे तो हम हमको सिर्फ एकहि धर्म के मानते है.. हमें हमारे धर्म का अभिमान जरूर होना चाहिए.. लेकिन और किसी धर्म पर घृणा नहीं होनी चाहिए.. क्यूंकि हम सब को निर्माण...
ईश्वर हमको जब कोई समस्या देता है वह चाहता है की हमारी प्रगति हो
ईश्वर हमको जब कोई समस्या देता है वह चाहता है की हमारी प्रगति हो.. लेकिन हमारा मन समस्या आने के डर से या विचारों के कारण हम यह सब भूल जाते है.. चलो आज हम स्वामी वाणी के माध्यम से इसको समझते है.. श्री स्वामी समर्थ महाराज के भक्त बसप्पा नाम के भक्त थे.. उनकी स्वामी चरणों...