श्री गजानन महाराज दर्शन लीला-2

Sep 26, 2021 | संत गजानन महाराज, हिंदी

Share

श्री बंकटलाल अग्रवाल जी बोले हमारा शेगांव धन्य है… ब्रम्हांड नायक योगिराज शेगांव  में आये। ..!!

हमने प्रथम लीला में देखा ब्रम्हांड नायक श्री गजाजन महाराज कूड़े में फेंके हुवे फेके हुंए थाली से चावल के शीत उठाकर खा रहे थे ! अभी यह जो दृश्य है वह आने जाने वाले लोग देखरहे थे… लेकिन उधर जाकर उनसे किसीने बात नहीं की ! उसी वक्त उधर श्री बंकटलाल अग्रवाल अपने स्नेही श्री दामोदरपंत कुलकर्णी  के साथ उधर आये… श्री बंकटलाल अग्रवाल  जी ने देखा की महाराज कूड़े में फेंके हुवे फेके हुंए थाली से चावल के शीत उठाकर खा रहे है.. उन्होंने श्री दामोदरपंत कुलकर्णी  जी को कहाँ की यह दिखने में तो यह एक सामान्य व्यक्ति दीखते  है… लेकिन ये कोई सामन्य वयक्ति नहीं हो सकते क्यूंकि अगर ये सामान्य व्यक्ति होती तो अन्न  माँग  कर खाते और श्री पातुरकर भी उन्हें अन्न  दे देते ! ये जरूर कोई बड़े संत है ! इसके बाद विनय पूर्वक श्री बंकटलाल अग्रवाल इन्होने श्री महाराज से पूछा… महाराज आप ये क्या कर रहे है… आपको भूख  लगी  है तो हम आपके लिए भोजन लेकर आये क्या ? श्री महाराज  ने उनकी तरफ देखा…उनका तेजः पुंजः मुद्रा देखकर उनके भी मुख से कुछ शब्द नहीं निकले और वो तुरंत श्री पातुरकर जी के पास गए और उनको सभी बात बताकर उनसे भोजन की थाली लेकर आये ! उस थाली में विभिन्न प्रकार के पदार्थ थे… सभी ने श्री महाराज को भोजन ग्रहण करने की विनती की… श्री महाराज ने सभी पदार्थ एकत्रित किये और भोजन किया ! यह सब देखकर सभी लोग …आश्चर्यचकित हो गए और श्री बंकटलाल अग्रवाल बोले हमारा शेगांव धन्य है… ब्रम्हांड नायक योगिराज शेगांव  में आये। ..!!

बोध – उपरोक्त लीला से हमें असंख्य बोध प्राप्त हो रहे है.. ब्रम्हांड नायक की हर लील हमारे लिए  बोध ही होती है… लेकिन वह समझ ने के लिए श्री बंकटलाल अग्रवाल जैसे भक्ति चाहिए! देखो ना उपरोक्त लीला में उस रस्ते से… उधर से असंख्य लोग गए रहेंगे…लेकिन सभी ने यही सोचा की कोई आम इंसान होगा…भूख लगी होंगी इसलिए खाने को कुछ मिलेगा इसलिए कूड़े में फेंके हुवे फेके हुंए थाली से चावल के शीत उठाकर खा रहा होगा ! लेकिन उसी रस्ते से  श्री बंकटलाल अग्रवाल जा रहे थे स्नेही के साथ उनकी चेतना की अवस्था इतनी उच्च थी की उनकी लीला देखकर ही पहचान गए की ये कोई सामन्य वयक्ति नहीं हो सकते ! कितनी उनकी चेतना की अवस्था उच्चतम थी ! श्री महाराज ने सभी पदार्थ एकत्रित करके भोजन करके श्री बंकटलाल अग्रवाल के मन में जो विचार आ रहे थे उसका कुछ न बोल के उसे उत्तर दे दिया ! सचमे क्या भक्ति होंगी श्री बंकटलाल अग्रवाल जी की उन्होंने श्री महाराज की लीला से पहचान लिए की ये कोई सामान्य व्यक्ति नहीं हो सकते ! हमें श्री महाराज ये भी बोध दे रहे है की… अनेक बार हम खाना खाते  वक्त अनेक पदार्थ पसंद नहीं इसलिए नहीं खाते! लेकिन श्री महाराज यहाँ हमें  बता रहे की कोनसे भी पदार्थ  का स्वाद सिर्फ जीभ के लिए होता अन्न तो हमारे शरीरः की जरूरत है ! उसका मुख्य काम है हमारे उदर की तृष्णा को शांत करना और हमें चुस्ती स्फूर्ति देना न की स्वाद लेना ! इसलिए सभी अन्न पदार्थ का सेवन हमें भगवान् का प्रसाद समझ कर ग्रहण करना चाहिए और यह बात हमें अपने बच्चों  को भी सिखानी  है… बोलो श्री गजानना महाराज की जय !

प्रार्थना – श्री गजानन महाराज…आपकी लीला समझने में हम असमर्थ है… हमारी चेतना का स्तर तो बहोत कम है… लेकिन आपकी कृपा होंगी तो ये जरूर बढ़ेगा …हम आपसे प्रार्थना करते है की जैसी कृपा श्री बंकटलाल अग्रवाल  जी के ऊपर की…उस पात्रता के योग्य हमें बनावो…धन्यवाद माँ यह प्रार्थना करवा के लेने के लिए धन्यवाद !


Share
और पढिये !!

चोवीस तास स्वामीं भक्तीत कसे रहावे..!

स्वामी भक्तहो.. आपण अनेकदा म्हणतो ऐकतो.. अनेकदा स्वामी वाणीतून आपण ऐकतो "स्वामी भक्तीत रहावे" स्वामी भक्तीत राहणे याचा अर्थ असा आहे का आपण २४ तास स्वामी नाम घ्यायचे आहे.. हे शक्य सुद्धा नाही.. तर मग आपण स्वामी भक्तीत राहणार कसे.. स्वामी भक्तीत राहणे शक्य आहे का ? हो...

स्व अनुभव नसणारी गोष्ट इतरांना सांगू नये – संदर्भ – श्री गजानन विजय अध्याय ८

स्व अनुभव नसणारी गोष्ट इतरांना सांगू नये - संदर्भ - श्री गजानन विजय अध्याय ८ श्री गजानन महाराज श्री खंडू पाटील यांचे बंधू कृष्णाजी पाटील यांच्या घरी राहत होते.. श्री भास्कर पाटील आणि तुकाराम कोकाटे श्रीं ची सेवा करत होते.. अचानक एकेदिवशी त्या मळ्यात काही गोसावी आले...

अगर हमें कोई कुछ बता रहा हो.. हमें वो पसंद नहीं आ रहा हो.. क्यूंकि हम उसका अर्थ अपने विचारों से लगाते है. स्वामी वाणी

स्वामी भक्तो ..बहोत बार हम कुछ पढ़ते है या सुनते है लेकिन बहोत बार बार हम उसका अर्थ हमारी समझ की तहत लगाते है.. उससे बहोत बार हमें निराशा आती है या हमारे मन में शंका निर्माण होती है.. यह नियम केवल अध्यात्म में ही नहीं तो हमारे जीवन में लागु होता है.. इसे हम स्वामी वाणी...

हमें संकट में ईश्वर को दोष न देते हुवे ईश्वर का प्रसाद समझकर उस पर कार्य करना है.. स्वामी वाणी

हमारे जीवन में कोई समस्या आती है तो हमें लगता है की ईश्वर की हमपर अवकृपा है क्या इसलिए मेरे जीवन में समस्या आ रही है.. लेकिन ईश्वर किसी के ऊपर अवकृपा कभी नहीं करता..लेकिन हमारा मन ऐसा है की कभी कुछ अच्छा होता है तो हम क्या कहते है जरा सोचो..हम कहते है मैंने किया इसलिए...

स्थानों का महत्व

हमें पवित्र स्थानों को जाना चाहिए वहाँ हमे सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ती होती है..इसके बारे में शिव महा पुराण में कथा आती है..एक दिन नारद मुनि साधना करने के लिए हिमालय के एक गुफा में बैठे थे..अब इनकी साधना में बाधा निर्माण करने हेतु काम देव को विनती की..काम देव ने उनकी...

हमारा जीवन कब तक है हमे मालूम नहीं हमें सिर्फ हर एक कर्म ईश्वर सेवा समझ कर रहना है.

हमारा संपूर्ण जीवन नियोजित है.. कब हमारा जन्म होगा कब मृत्यु यह हमारे हाथ में नहीं.... फिर भी हमें ऐसा लगता है की मैं कर्ता हु.. लेकिन उस वक्त हम यह नहीं सोचते की कब ये साँस बंद हो पता नहीं फिर भी हम यह सब भूल जाते है.. हमें यह भूलना नहीं है.. चलो हम स्वामी वाणी की...

ईश्वर के दरबार में तो कोई जाती नहीं , धर्म नहीं या पंथ भी नहीं है

स्वामी भक्तो ईश्वर के दरबार में तो कोई जाती नहीं , धर्म नहीं या पंथ भी नहीं है.. लेकिन जब हम हमसे खुद से पूछे तो हम हमको सिर्फ एकहि धर्म के मानते है.. हमें हमारे धर्म का अभिमान जरूर होना चाहिए.. लेकिन और किसी धर्म पर घृणा नहीं होनी चाहिए.. क्यूंकि हम सब को निर्माण...