गजानन महाराज चरित्र दर्शन 4

श्री गजानन महाराज जी के दर्शन क प्यास जगी श्री बंकटलाल जी के मन में

 

श्री गजानना चरित्र दर्शन ४ – श्री बंकटलाल जी को पूर्ण विश्वास था की श्री गजानन महाराज जी ब्रम्हांड नायक है… अब उनके मन में श्री दर्शन की प्यास जग गई थी… उनको भूख प्यास मीट  गई थी… उनकी आँखे अब सिर्फ श्री महाराज के दर्शन  की राह  देख रही थी… उनको सब तरफ श्री महाराज ही है ऐसा लगने लगा था… उनके चित्त की यह स्थिति वे किसी को बता बह नहीं सकते थे… उनके हाव भाव देख कर उनके पिताजी ने उसे पूछा बेटा  क्या हुवा कुछ चिंता है क्या? तुम्हारी प्रकृति तो ठीक है ना… उन्होंने पिताजी को सब कुछ ठीक है यह बताया..लेकिन उनकी खोज शुरू ही थी… उनके घर के पास श्री रामाजी पंत  देशमुख नाम एक व्यस्क सद्गृहस्थ रहते थे… वे बुजुर्ग थे… उनको श्री बंकटलाल जी ने श्री महाराज के बारे में बताया तब उन्होंने बंकटलाल की बाते  सुनकर कहाँ  वे जरूर बड़े संत महात्मा होंगे…इस तरह ४ दिन  गए… श्री बंकटलाल के मन में वही शुरू था… उन्हीं  दिन गांव में श्री गोविन्द बुवा टाकलीकर जो बहोत बड़े कीर्तनकार थे उनका कीर्तन था ..उनके कीर्तन के लिए बंकटलाल गया वहा पर उनके दोस्त पीताम्बर भी आया था… वो दोनों की वहाँ  मुलाखत हो गई… तब बंकटलाल ने उन्हें श्री गजानन महाराज के बारे  में बताया..उसी वक्त उन्हें श्री महाराज का दर्शन हो गया फिर क्या उनकी दर्शन की इच्छा पूर्ण हो गयी… बोलो गजानन महाराज की जय !!

उपरोक्त लीला का बोध तो भक्ति की परमोच्च अवस्था का हमारे लिए एक पाठ है… देखो ना श्री बंकटलाल जी का विश्वास इतना गहरा था की एक ही मुलाखत में उन्होंने  श्री महाराज पर श्रद्धा बैठ गई…उनको श्री महाराज के दर्शन की प्यास इतनी गहरी  थी की उनको ४ ही दिन में फिर से श्री महाराज का दर्शन हो गया…यहाँ और एक बात हमें बोध हो रहे है श्री बंकटलाल जी से वो यह की.. पिताजी का आदर करने का.. देखो उनके पिताजी ने उनसे पूछा था  की क्या कुछ समस्या है क्या ? लेकिन बंकटलाला ने उनको तकलीफ न हो…उस तरह आदर पूर्वक उनको बताया की कुछ भी समस्या नहीं है… उसके बाद उन्होंने श्री गोविन्द बुवा  को यह सब बात बताई तो उन्होंने भी उन्हें सकारात्म भाव से कहाँ  के वे जरुर कोई महापुरुष ही होंगे यह बात सुनकर उनकी श्रद्धा बढ़ी…इस सबके बीच में उन्होंने बहोत सी प्रार्थना ये  की होंगी और इसका परिणाम यह हुवा की उनको श्री ब्रम्हांड नायक गजानन दर्शन प्राप्त हुवा बोलो श्री गजानन महाराज की जय!!

प्रार्थना – है ब्रम्हांडनायका।आज आपने हमें आज के लीला के माध्यम से जो श्रद्धा..भक्ति..और विश्वास का पाठ सिखाया उसके लिए धन्यवाद..इतना श्रद्धा..भक्ति..और विश्वास हमारे मन में जगावो जिस से आपके लीलावो का अर्थ हम समझ आपके कृपा पात्री हम बने… यह प्रार्थना करवा के लेने के लिए धन्यवाद… कोटि कोटि धन्यवाद !

 

सच्ची पितृ पूजा

हर साल हम पितृ पूजा करते है.. हमारी संस्कृति में साल में १६ दिन हमारे पूर्वजों  की पूजा के लिए दिए है.. यह हमारे पूर्वजों  के प्रति सदभावना व्यक्त करने का दिन… सचमें हमारे पूर्वजोंने कितना विचार पूर्वक यह सब बनाए है..सचमें यह सब देखने के बाद गर्व होता है.. लेकिन कुछ चीजों के बारे में जब चिंतन मनन होता है तब लगता है की कुछ तो गलत हो रहा है…जिन पूर्वजोंकी हम पूजा करते है… वो जब जीवित होते है सचमें  उनकी सेवा करते है क्या ? उनको क्या चाहिए…उनकी हमसे जो भी कुछ अपेक्षा है उसकी हम पूर्ति करते है क्या? उनसे हम आदर पूर्वक बात करते  है क्या ? उनका कभी दिल तो नहीं दुःखा  रहे.. कुछ बच्चे अपने माता पिता  को वृद्धाश्रम में रखते है.. अगर इसका उत्तर नकारात्मक है और उनके जाने के बाद अगर हम सिर्फ पितृ दोष के डर  से उनकी पितृ पक्ष में या उनकी स्मृति के प्रीत्यर्थ पूजा करते है तो….उसका कुछ भी फायदा हो नहीं सकता क्यूंकि जीते जी अगर उनको क्या चाहिए यह देखा नहीं और मरने के बाद कितने भी पूजा कर्म करने से उनका आशीर्वाद कैसे प्राप्त हो सकता है…सचमे हर एक ने इसके प्रति चिंतन मनन करना चाहिए…दूसरी एक चीज जो देखी  जाती है वह देख कर तो बहोत बुरा लगता है.. अपने पूर्वजों  की पूजा सभी बच्चे अपने अपने घर में अलग अलग करते है क्यूंकि भाई भाई में झगड़ा है..भाई भाई से बात नहीं करता..  और इस वजह  हर एक बेटा  अलग अलग अपने पूर्वजों  की पूजा करता है.. सचमें  यह पूजा आपके पूर्वज स्वीकार कर सकते है.. अगर आप सच्चे दिल से इसके ऊपर चिंतन मनन करेंगे तो आपको भी उत्तर मिलेगा इस तरह की पूजा से पूर्वज खुश नहीं हो सकते .. सचमे आपको लगता है.. आपके पूर्वजों  को मुक्ति मिले? उनका कृपा आशीर्वाद सदा आपको मिलता रहे… तो आज से जो भी आपके घरमें आपके माता पिता  है उनसे आदरपूर्वक बात करो उनको आपसे कुछ भी नहीं चाहिए सिर्फ आपका प्यार चाहिए…अगर माता पिता  नहीं है और आपको  उनकी पूजा करनी है उनका आशीर्वाद चाहिए तो पहले एक काम करो जो भी अपने पूर्वजों  की पूजा करने चाहते है वो सभी भाई मिलकर एक जगह पर करो.. आपस में प्रेम रखो.. देखो आपके पूर्वज तो सिर्फ इसी एक बात से खुश होकर भरपूर आशीर्वाद देंगे..

पंडित जी तो पूजा करेंगे ही लेकिन घर सभी सदस्य..मिलकर अपने पूर्वजों  से प्रार्थना करे

है हमारे पूर्वजों..हम आपके सदैव ऋणी रहेंगे..हम आपका ऋण तो चुकता नहीं कर सकते..लेकिन हम आपको आश्वासन देते है की.. हम सब भाई.. बहन.. हमेशा साथ साथ रहेंगे..कौनसी भी परिस्थिति आये हम एक दूसरे का साथ नहीं छोड़ेंगे.. कभी भी आपके दिल को चोट पहुचेंगी ऐसा बर्ताव हम नहीं करेंगे..आज तक हमसे जो भी गलती हुवी होंगी इसके लिए हमें  माफ़ करो.. और हमें ऐसा आशीर्वाद दो की हम सभी में हमेशा एकता रहे…हमारा हर एक कर्म हमारे पूर्वजों  के लिए और हमारी  आने वाली पीढ़ी के लिए प्रशंसनीय रहे.. यह समझ हमको देने के लिए  धन्यवाद..ऐसी ही कृपा हमारे ऊपर रहे !!

श्री महालक्ष्मी पूजा

भाई और बहनो  आप सभी को नमस्कार ! हम सभी लोग अभी श्री गणपति बाप्पा और  साथ में कुछ लोग श्री महालक्ष्मी की भी पूजा कर रहे… सभी तरफ खुशियों का वातावरण है… या सभी पूजा पाठ जब देखता हु… उसके पीछे अपने पूर्वजों  की जो धारणा थी बहोत ऊँची थी… गणपति के साथ… श्री महालक्ष्मी का भी आगमन होता है… सभी जानते है  महालक्ष्मी  माता आती है यानी वो आपने मायके आती है… उसका हम सब बहोत ही जोरदार स्वागत करते है… विभिन्न पदार्थ बनाये जाते है… प्रसाद के लिए १६ प्रकार के पदार्थ बनाए जाते है… मायके आने के बाद घर में एक आन्दोत्सव मनाया जाता है… लेकिन जब ये सब चीजे अपने जीवन लागु करने का समय आता है तो ? आज हम इस विषय को लेकर थोड़ा चिंतन मनन  करने वाले है… चलो… हमने देखा की गौरी पूजन यानी महालक्ष्मी माता अपने मायके आती है तो उसका पूजन… सच में अपने  आप से एक सवाल पूछने का है… सचमे जब महालक्ष्मी यानी आपकी बहन आपके घर आती है तो आप इस तरह उसका स्वागत करते है  क्या ? अगर आपका उत्तर नहीं आ रहे है तो समझ लेना…महालक्ष्मी माता इतने बार प्रत्यक्ष रूप में आती लेकिन अभी तक मैंने उसे पहचाना नहीं…अभी देखो उसका स्वागत क्यूँ  नहीं हो रहा तो उसने उसके ही माँ  पिता के घर में खेत का हिस्सा मांगा…और बहन भी इस तरह से झगड़ती  है… जैसे  अगर उसे वह  नहीं मिला तो वो भूखी  रहने वाली है… अभी कुछ सवाल भाई और बहनजी आप अपने आप से पूछो।।

१) ये जो भी मेरे माता पिता  ने कमाया है ? वो हम सभी झगड़ने के लिए  कमाया क्या?

२) अगर ये मुझे नहीं मिला तो क्या होगा ? या सब कुछ मुझे मिला तो क्या होगा

३) सच में हम सगे  भाई बहन है ?

४) मेर माँ बाप के पास कुछ भी नहीं होता तो

५) मेरे बच्चे भी इसी तरह से झगड़ा करेंगे तो

६) मरने के बाद में ये सब लेकर जा सकता हु / सकती हु

७) सिर्फ भौतिक वस्तु  के लालच में हम एक दूसरे के दुश्मन हो गए

८) यह सब देखकर मेरे माता पिता  हमको आशीर्वाद देते होंगे या कहते  होंगे क्यूँ  मैंने इतना कमाया की मेरे ही बच्चे भाई… बहन का नाता भूल गए

९) जो भी झगड़ा आज तक हुवा अब वह मिट सकता है क्या इसके लिए  मै  मेरा स्वार्थ छोड़ सकता हु क्या

ये ऊपर दिए हुवे सवाल खुद से कम से काम १० बार पूछो अगर उसके बाद आपको अपने गलती को एहसास हो तो जरूर एक दूसरों  की माफ़ी मांगो…देखो अगर आप खुद  इस पर चिंतन मनन करेंगे तो आपको ही आपकी गलत का एहसास होगा…और अगर यह गलती में आप सुधार  करेंगे तो आपको श्री महालक्ष्मी पूजा का अर्थ समझ में आ गया और आपके ऊपर सचमे श्री महालक्ष्मी देवी की कृपा हो गई है और ज्यादा  होने वाली है… यहाँ पर जो भी बात  समाज में दीख रही है  वह आपके सामने लाने का एक प्रयास किया है.. आपकी सचमें  यह बात में कुछ दम  है ऐसा लग रहा हो तो.. जरूर यह वीडियो शेयर करे चैनल  को सब्सक्राइब कीजिए  धन्यवाद। कोटि धन्यवाद

 

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन इनका जन्म ५ सितम्बर १८८८  को तिरुत्तनी गांव जो  चित्तोर जिल्हे में  तमिळनाडू राज्य में हुवा था | उन्होंने अपनी शिक्षा दर्शनशास्त्र में M.A. किया | उन्होंने शिक्षा पूरी होने के बाद साहयक प्रोफेसर का काम मद्रास प्रेसि डेंसी कॉलेज में और बाद में मैसूर महाविद्यालय में प्रोफेसर का काम किया | मैसूर विद्यापीठ ने उन्हें दर्शन शास्त्र के प्रोफेसर का संन्मान दिया | बाद में वो कलकत्ता विश्वविद्यालय में दर्शन शास्त्र के प्रोफेसर बने| आंध्र विश्वविद्यालय के कुलपति बने | वो बनारस विद्यालय के कुलगुरु भी थे| ऑक्स फ़र्ड विश्वविद्यालय में भी प्राध्यापक का काम किया | इंग्लंड ने उन्हें सर यह उपाधि प्रदान की | सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक भारतीय दार्शनिक थे। वह भारत के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति थे।डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।वो हमेशा कहते थे की शिक्षक से ही समाज का विकास होता है| शिक्षक हमारे जीवन में बहोत महत्त्वपूर्ण है | जिस देश में शिक्षक का सन्मान किया जाता है वो देश हमेशा प्रगति पथ पर ही रहेगा | सर्वपल्ली राधाकृष्णन स्वयं एक महान शिक्षक थे, भारत सरकार ने उनके 40 वर्षों के काम का सम्मान करने के लिए 5 सितंबर को ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में घोषित किया है।भारतरत्‍न’ पुरस्कार से भी उन्हें सन्मानित किया गया था  .

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के प्रेरणात्मक वाक्य

१) ज्ञान हमें शक्ति देता है, प्रेम हमें परिपूर्णता देता है।

२) पुस्तकें वह साधन हैं जिनके माध्यम से हम विभिन्न संस्कृतियों के बीच पुल का निर्माण कर सकते हैं।

३)किताबें पढ़ने से हमें एकांत में विचार करने की आदत और सच्ची खुशी मिलती है।

४)  आध्यात्मिक जीवन भारत की प्रतिभा है.

५) मानव का दानव बनना उसकी हार है . मानव का महामानव बनना उसका चमत्कार है. मनुष्य का मानव बनना उसकी जीत है.

सभी शिक्षकों को मेरा प्रणाम हम हमेशा आपके ऋणी रहेंगे

गजानन महाराज चरित्र दर्शन ३

गजाजन महाराज बोल रहे है – यह सम्पूर्ण सृष्टि ब्रम्ह व्याप्त है… यहाँ मैला या शुद्ध ऐसा कोई भेद नहीं

 

श्री गजानन महाराज जी ने भोजन किया यह हम ने दूसरी लीला में देखा… अब श्री महाराज जी का भोजन ख़त्म होने के बाद…उनको पीने के लिए  पानी चाहिए…यह विचार बंकटलाल और दामोदर इनके मन में आया… श्री महाराज जी के पास पानी पीने का बर्तन था लेकिन उसमे…पानी नहीं था… तब दामोदर जी ने उन्हें विनय पूर्वक पूछा…महाराज आपको पीने के लिए पानी लावू क्या ? श्री महाराज ने उनके तरफ देखा और हँसे… और बोले आपको जरूरत होंगी तो जरूर पानी लावो…जगदव्यवहार के अनुसार खाना खाने के बाद पानी पीना तो चाहिए… श्री महाराज के आज्ञा अनुसार दामोदर जी पानी लाने घर में गए… उधर एक गाय… भैस और प्राणियों को पानी पीने के लिए  उधर व्यवस्था की गई थी श्री महाराज उधर गए और वह पानी उन्होंने ग्रहण किया… यह सब देखकर सभी लोग अचंबित हो गए  … दामोदर पानी लेकर आ गया… तब तक तो श्री महाराज ने पानी पी लिया था… यह सब देखकर दामोदर श्री महाराज को बोलते है श्री महाराज वह पानी मैला है… वह प्राणियोंके लिए  पानी है… में आपके लिए मटके का ठंडा और शुद्ध पानी लेकर आया हु… तब श्री महाराज बोलते है यह सब व्यावहारिक बाते  हमें मत बतावो…यह सम्पूर्ण सृष्टि ब्रम्ह व्याप्त है… यहाँ मैला या शुद्ध ऐसा कोई भेद नहीं होता… पानी तो पानी ही होता है… पानी और पीने वाला और अलग नहीं है… श्री महाराज जी की यह वाणी सुनकर बंकटलाल और दामोदर दोनों श्री महाराज जी के चरण छूने के लिया आगे आये लकिन उसी वक्त श्री महाराज वायु वेग से उधर से निकल गए| बोलो श्री गजानना महाराज की जय !

उपरोक्त लील का बोध तो बहोत ही गहरा है.. देखो श्री महाराज खाना खाने के बाद पानी के बारे में दामोदर ने उनसे पूछा तो उन्होंने बताया की जगद व्यवहार के अनुसार खाना खाने के बाद पानी तो पीना ही चाहिए.. देखो इसमें तो बहोत गहरी  समझ श्री महाराज हमें दे रहे है.. वो तो ब्रम्हांड नायक थे फिर भी उन्होंने हमें समझ देने के लिए  जगद व्यवहार के अनुसार पानी ग्रहण किया.. हमें भी अपना संसार करते वक्त..सभी चीजों की पूर्ति हमें करनी है ऐसा नहीं की सिर्फ आध्यात्मिक ता करनी है या सिर्फ संसार करना है… ऐसा नहीं करना है तो हमें सभी चीजों में एकरूपता लानी है…जैसे पानी अगर दूध में मिलता है तो उसका रूप धारण कर लेता है… फिर वह जिस चीज में मिलाया जाता है उसका रूप धारण करता है उसी तरह हमें संसार में रहना है… लेकिन वह काम की पूर्ति होने के बाद उस चीज में अटकना नहीं है हमें सदैव हमें हमारे मन पानी जैसे निर्मल बनाना है… यहाँ महाराज  हमें पानी का महत्व भी समझा रहे है… लेकिन यह बहोत बड़ा विषय हो जायेगा… इसपर हमें आगे भी मनन चितन करते है… चलो हम श्री गजानन महाराज जी से प्रार्थन  करते है.. श्री महाराज आज के लीला को निमित्त बनाकर आपने हमें आज जो बोध दिया उसके लिए धन्यवाद… पानी जैसा हमारा मन भी निर्मल हो जाए… इस मन पर हमेशा आपके नाम का जादू रहे जिससे शुद्ध ज्ञान की प्राप्ति हमे हमेशा होगी…हमारे मन का मैल  दूर हो जिससे आप जो हमें ज्ञान हमें देना चाहते हो उसके लिए  हम पात्र बने… धन्यवाद महाराज .. कोटि कोट धन्यवाद