श्री गजानन महाराज दर्शन लीला 7

Oct 28, 2021 | संत गजानन महाराज, हिंदी

Share

श्री बंकटलाल इन्होंने  अपने पिताजी श्री भवानी रामजी से श्री गजानन महाराज जी के बारे सबकुछ बताया और उनसे श्री महाराज को अपने घर पर ले आने की अनुमती  माँगी ..श्री भवानी रामजी ने उनको अनुमति दी… अब  श्री बंकटलाल जी उन्हें ढूंढने लगे… चार दिन के  बाद संध्या समय को उनको श्री गजानन महाराज जी का दर्शन हुवा…उन्होंने देखा की  गौ माता के बीच में श्री महाराज बैठे है… श्री बंकटलाल श्री महाराज के पास आये और उन्होंने उनको विनम्रता पूर्वक प्रणाम किया और श्रद्धा पूर्वक उन्होंने श्री महाराज को विनती की श्री महाराज आप हमारे घर चलिए..बहोत  कृपा होगी…श्री महाराज उनके घर जाने के लिए  राजी हो गए… बंकटलाल सूर्यास्त के वक्त श्री महाराज को अपने घर लेकर आये… श्री महाराज की तेजपुंजः मूर्ति देखकर श्री भवानी रामजी उनके चरणों में नतमस्तक हो गए.. उन्होंने उनकी स्तुति मय  प्रार्थना की… है प्रभो आप साक्षात सांब  सदाशिव है… प्रदोष समय आप आये है.. मै आपसे प्रार्थना करता हु.. आप हमारे घर पर भोजन ग्रहण कीजिए ..उन्होंने बिल्व पत्र  अर्पण कर उनकी पूजा की .. श्री भवानी राम ने श्री महाराज   को प्रार्थना तो की वो श्री महाराज ने स्वीकार भी कर ली पर यही भोजन तैयार नहीं था… भोजन बनने में समय लगने वाला था उनके मन में आया की… भोजन तैयार होने तक श्री महाराज नहीं ठहरेंगे तो… उन्होंने सोचा क दोपहर का बनाया हुवा भोजन है… उसे हम ख़राब तो नहीं मान सकते … श्री महाराज भी इसका स्वीकार करेंगे… यह सोचेकर उन्होंने भोजन की थाली तैयार की …उसमे पूरी ..भाजी .. विविध फल… बादाम ..ऐसे वभिन्न पदार्थ उन्होंने श्री महाराज को भोजन  के लिए  लाए ..उनकी उन्होंने सर्वप्रथम श्री महाराज की पंचोपचार पूजा की और बाद में श्री महाराज को भोजन  करने के लिए श्री महाराज से प्रार्थना की… श्री महाराज ने भी बड़े प्रेम से वह भोजन स्वीकार किया …जो जो पदार्थ सभी श्री महाराज ने  खा लिए…. उस दिन श्री महाराज उन्हींके घर पर रहे…. बोलो श्री गजानना महाराज की जय

बोध –

ईश्वर हर एक लीला प्रेरणादाई होती है… जिससे के ऊपर अगर हम चिंतन मनन करेंगे तो… वह हमें हर एक समय मार्गदर्शन ही देती है… उपरोक्त लीला में श्री बंकटलाल जी की इच्छा तो बहोत थी की श्री महाराज को घर ले आने की… लेकिन उन्होंने सर्वप्रथम अपने पिताजी से अनुमति मांगी …यानी यहाँ हमें पितृ भक्ति की प्रेरणा यहाँ मिलती है… भगवान् कृपा के लिए  सर्वप्रथम हमारे घर में जो… मातृ- पितृ देव है उनकी सेवा करनी चाहिए तभी ईश्वर की भी कृपा होती है… श्री भवानीराम जी की भक्ति भी कितनी उच्चतम थी इसका हमें   दर्शन होता है… देखो भवानीराम जी की श्रद्धा और भक्ति कैसी  थी… जब श्री महाराज उनके घर आये वो समय सूर्यास्त का समय था… उस वक्त भोजन तैयार नहीं था… लेकिन श्री महाराज भोजन के लिए तैयार हुवे है…और अब ताजा  भोजन बनाने के वक्त लगेगा ..और इतने समय श्री महाराज नहीं ठहरेंगे तो… यह बात उनके मन में आयी इसलिए उन्होंने सोचै की दोपहर को जो भोजन बचा है वही श्री महाराज को भोजन के लिए दिया…इधर उनके मन श्री महाराज के प्रति श्रद्धा थी और मन विचार था की श्री महाराज हमारे घर से भूखे न जाये…कितनी उच्चतम श्रद्धा और भक्ति थी… श्री महाराज ने भी वह भोजन प्रेम से ग्रहण किया…यहाँ हमें बोध मिलता है की कोई भी हमारे घर से भूखा न जाए… उसी तरह हमारे भाव में अगर सच्चा पैन रहेगा तो ईश्वर हमारा हर एक प्रसाद ग्रहण करते ही है..  धन्यवाद महाराज कोटि कोटि धन्यवाद

चलो हम श्री गजानन महाराज जी से प्रार्थना करते है- है महाराज आज आपने आजकी लीला के माध्यम से जो भी मातृ पितृ भक्ति की हमें समझ दी उसके लिए  धन्यवाद …हमको भी ऐसी भक्ति दो… हमसे भी अन्नदान हो इस पात्र हमें बनावो…जैसी कृपा  भवानीराम पर हुवी वैसी  हम पर भी करो… यह प्रार्थना करवा लेने के लिया धन्यवाद…कोटि धन्यवाद।

श्री गजानन महाराज की जय!

 


Share
और पढिये !!

रोजची क्षमा प्रार्थना

श्री स्वामी समर्थ हे समर्था.. मला माफ कर.. दिवसभरात जर माझ्याकडून काही चुकी झाली असे तर मला माफ कर.. परत ती चुकी होणार नाही अशी प्रेरणा मला दे.. दिवसभरात माझ्याकडून कुणाचे मन दुखावले गेले असेल तर मला माफ कर.. समोरच्या व्यक्तीला हि माफ कर.. मनात कोणतेच किंतु परंतु राहू...

जसे पांडवांना श्री कृष्ण भेटले..तसा अनुभव आपणस येईल का?

!!श्री स्वामी समर्थ!! ज्ञानदेव म्हणे व्यासाचिया खुणा । द्वारकेचा राणा पांडवांघरीं ॥४॥ हरिपाठ पहा काय बोध होतो..स्वामीं नाम घ्या ..स्वामीं नाम..किमान रोज १ माळ..! www.chetnakeswar.com स्वामीं भक्तहो..माऊली आपणस वरील ओवीतून नामाची महती सांगत आहेत..व्यास महाराजांनी जे...

असोनी संसारी जिह्वे वेगु करी ।

!!श्री स्वामी समर्थ!! असोनी संसारी जिह्वे वेगु करी । दशास्त्र उभारी बाह्या सदा ॥३॥ हरिपाठ www.chetnakeswar.com स्वामीं भक्तहो....संत श्रेष्ठ श्रीज्ञानेश्वर माऊली इथे आपणस नामाची महती सांगत आहेत..संसारात असताना नाम घ्या..पहा किती सोपे आहे..हाताने प्रापंचिक कर्म..मुखाने...

हरि मुखे म्हणा.. हरि मुखे म्हणा

!!श्री स्वामी समर्थ!! हरि मुखे म्हणा हरि मुखे म्हणा । पुण्याची गणना कोण करी ॥२॥ हरिपाठ पहा नामाचा महिमा..रोज किमान १ माळ स्वामीं नाम जप करूया..! www.chetnakeswar.com स्वामीं भक्तहो..संत श्रेष्ठ ज्ञानेश्वर माऊली सांगत आहेत..मुखाने नाम घ्या..त्या सारखे दुसरे पुण्य...

देवाचे द्वार कुठे आहे..चिंतन मनन

श्री स्वामी समर्थ देवाचिये द्वारी उभा क्षणभरी । तेणे मुक्ति चारी साधियेल्या ॥१॥ हरिपाठ ओवी चिंतन मनन स्वामीं भक्तहो..संत श्रेष्ठ श्री ज्ञानेश्वर माऊली..हरिपाठच्या पहिल्या ओवीतून आपणस मुक्तीचा मार्ग सांगत आहेत..देवाच्या द्वारात क्षणभर जरी आपण विसावलो तरी आपणस मुक्ती ची...

खरा कर्ता मी आहे का?

श्री स्वामी समर्थ हे मना मला वाटते की..मी करतो म्हणूनच कार्य होत आहे..पण मी नव्हतो तेव्हाही कार्य सुरू होते..मी नसतानाही कार्य सुरूच असणार आहे..मग मी कसा कर्ता.. कर्ता आणि करविता..तू एक स्वामींनाथा..माझ्यातील कर्ता भाव दूर कर..धन्यवाद समर्था..! www.chetnakeswar.com...

आपले विचार इतरांवर लादू नका!

!!श्री स्वामी समर्थ!! हे मना..कोणत्याही व्यक्तींवर.. आपल्या इच्छा..अपेक्षा..विचार लादू नकोस किंवा असेच त्यांनी करावे असा हट्ट धरू नकोस..कारण सर्वांना प्रेरणा देणारे स्वामीं च तर आहेत..धन्यवाद स्वामीं कोटी कोटी धन्यवाद..! स्वामीं भक्तहो.. वरील ओवीतून स्वामीं काय सुचवत...

आर्थिक समस्या दूर करण्यासाठी रोज ११ वेळेस म्हणा

!! श्री स्वामी समर्थ !! स्वामी भक्तहो कोणतीही आर्थिक समस्या नसून आपल्या विचारातील मानसिकता आहे.. आपल्या अंतर्मनातील विचार आहेत.. चला आपले विचार बदल्या.. खालील विचार रोज १ वेळेस किंवा ११ वेळेस म्हणा पहा काय बदल घडतात.. धन्यवाद स्वामी कोटी कोटी धन्यवाद !! हे मना मला...

प्रामाणिक कष्ट कर.. कष्टाला लाजू नकोस.

स्वामी वाणी पुष्प ५९३(पर्व ४ थे भाग ९७) प्रेरणादायी बोल प्रामाणिक कष्ट कर.. कष्टाला लाजू नकोस..अरे विश्वास ठेवा !! प्रामाणिक कष्ट करणाऱ्याच्या पाठीशी स्वतः स्वामी असतात.. स्वामींची सम्पूर्ण शक्ती असते..!! www.SwamiVaani.co.in स्वामी भक्तहो.. स्वामी महाराज आजच्या...

यशाला कधीच शॉर्टकट नसतो.

स्वामी वाणी पुष्प ५९१(पर्व ४ थे भाग ९५) प्रेरणादायी बोल हे मना !! लक्षात ठेव.. यशाला कधीच शॉर्टकट नसतो.. त्यामुळे स्वामींवर विश्वास ठेवून प्रामाणिक कष्ट कर.. शाश्वत यश मिळेल..!! www.SwamiVaani.co.in स्वामी भक्तहो.. आजच्या स्वामी वाणी तुन स्वामी आपणस यशाचा मंत्रच...