सभी लोग अब श्री गोविंद बुवा जी का कीर्तन सुनने के लिए आये थे… श्री गजानन महाराज भी नीम के पेड़ के पास बैठकर कीर्तन सुन रहे थे… श्री गोविन्द बुवा जी ने कीर्तन के लिए श्रीमद भागवत के एकादश स्कंध का हंस गीता का श्लोक कीर्तन सेवा के लिए लिया था… बुवा ने कीर्तन की पूर्वार्ध बताया … कीर्तन का उत्तरार्ध करते वक्त उनको दिक्कत आने लगे तब… श्री महाराज ने सभी को कीर्तन का उत्तरार्ध बताया…उनका कीर्तन सुनकर सभी लोग तृप्त हो गए… तब श्री गोविंद बुवा ने उधर उपस्थित लोगो को बोले…श्री महाराज को इधर आने की विनती करो… तब बंकटलाल और कुछ लोग श्री महाराज के पास जाकर उनको उधर आने के लिए प्रार्थना करते है… लेकिन श्री महाराज नहीं आते… तब गोविंद बुवा खुद श्री महाराज के पास आते है और उनको मंदिर आने के लिए विनंती करते है… आप स्वयंम शिव स्वरुप है… कृपया आप शिव मंदिर में चलिए…आपके बिना मंदिर सुना सुना है… मेरी पूर्व जन्म की कुछ तो पुण्य कर्म के कारण मुझे आपका दर्शन हुवा और आपके वाणी से कीर्तन का उत्तरार्ध सुनने को मिला…तब श्री महाराज ने उनकी तरफ देखा और बोले अरे लोगों को बताते हो ” ईश्वर सर्वत्र है… अंदर बाहर ऐसा कुछ बह नहीं है… और खुद उस कीर्तन कथा के विरुद्ध बर्ताव कर रहे हो… लोगों को एक बात बताते हो और खुद उसके अनुसार आचरण नहीं करते …औरों जैस व्यवहारिक कीर्तन कार मत बनो… जावो कीर्तन समाप्त करो… मै इधर बैठकर कीर्तन सुनता हु…गोविंद बुवा व्यास पीठ पर आये और उन्होंने सभी को बताया की हम सभी नसीबवाले है… हमारे गांव में प्रत्यक्ष परब्रम्ह आये है… उनकी सेवा करो… हम सभी का कल्याण होगा…सभी ने एक साथ श्री गजानन महाराज का जयघोष किया।।। बोलो गजानन महाराज की जय
बोध – उपरोक्त लीला का बोध समझने की पात्रता दो… उपरोक्त लीला में श्री गोविंद बुवा ने कीर्तन शुरू किया…वो बहोत बड़े कीर्तनकार थे उन्होंने पूर्वार्ध तो बताया लेकिन उत्तरार्ध बताते वक्त उनको क्या बताये यह समझ में नहीं आ रहा था… उसी वक्त श्री गजानन महाराज कीर्तन का उत्तरार्ध पूर्ण किया …ऐसा हमारे जीवन में भी बहोत बार होता है.. हम किसी समस्या में होते है.. और हम ईश्वर से प्रार्थना करते है। .. वस् वक्त हमें कोई आकर मदत कर जाता है…उसे ईश्वर ने ही हमारी साहयता के लिए भेजा होता है… और हम कहते है.. भगवान् की तरह आकर आपने मेरी मदत की… लेकिन कुछ दिन बाद हम यह बात भूल जाते है… श्री गोविंद बुवा श्री महाराज से कहते है आप शिव स्वरुप है कृपया मंदिर में चलिए…तब श्री महाराज उन्हें बोलते है आप कीर्तन में लोगों बताते है की ईश्वर सर्वत्र है और आप ही यह बात भूल जा रहे हो… आप व्यवहारिक मत बनो… यहाँ श्री महाराज हमें बता रहे है मै सर्वत्र हु… अमुक एक स्थल पर जावोगे तो ही मैं मिलूंगा ऐसा नहीं है… यहाँ श्री महाराज यह भी बोध दे रहे है की अच्छी बाते सिर्फ लोगों को बताने के लिए नहीं होती पहले उसका अनुकरण हमने खुद करना चाहिए…इसके ऊपर जितना हम अधिक चितन मनन करेंगे उतना घर बोध श्री महाराज हमें देंगे
चलो श्री गजानन महाराज जी से प्रार्थना करते है.. प्रार्थना श्री गजानन महाराज आप हमारी हर एक प्रार्थना की पूर्ति करते हो… जब आप हमारी इच्छा की पूर्ति करते हो उस वक्त हमारी श्रद्धा का स्तर बहोत ऊँचा होता है… लेकिन कुछ दिन के बाद यह फिर से कम हो जाता है… जिस तरह श्री गोविंद बुवा जी को समझ दी… वैसी समझ हमें दो… हम में आध्यात्मिकता में जो व्यव्यहारिकता है वो दूर करो और हमें सच्ची समझ दो… जिससे है आपकी सच्ची भक्ति मिल जाए… धन्यवाद महाराज…यह प्रार्थना करवा लेने के लिए धन्यवाद।।। श्री गजानन महाराज की जय !!!