भगवान का अभिषेक

Oct 18, 2021 | प्रेरनादाई कथा, हिंदी

Share

भगवान का अभिषेक

हम सभी लोग अनेक देवी- देवतावों का हम अभिषेक करते है कोई भी कर्म हम जब करते है उसके बारे में पूरी जानकारी होंगी तो उसे करने में हमें ज्यादा आनंद लाभ फल  भी प्राप्त होगा |  इसलिए आज हम सब के दिल का जो विषय है उसके बारे में हम जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करने वाले है |

आज तक हमने बहोत बार अभिषेक किया होगा

लेकिन अभिषेक यानी क्या होता है अगर इसके बारे में हमें पूर्ण ज्ञान होगा तो फल भी परिपूर्ण आएगा…चलो तो आज हम  एक प्रयास करते है |

पंडित जी नीचे दिए  गए  उपचार ( पूजा ) अभिषेक में करते है आवश्यक मंत्रो के साथ यहाँ हम सिर्फ जो भी विधि होती है उसकी जानकारी यहाँ ले रहे है

 

१) आवाहन – सर्प्रथम जिस भी देवता की पूजा की जाती इस उस देवता का आवाहन किया जाता है… यानी उस देवता को पूजा में आने के लिए  विनती की जाती है|

२) आसान – हमारे घर में कोई मेहमान आता है तो हम उसे बैठने के लिए  आसान देते है उसी तरह पूजा में हम भगवान् जी को आसान देते है

३)पाद्य- उसके बाद पाद्य  पूजा की जाती है |

४) आचमन – उसके बाद भगवान् जी को आचमन करने के लिए  जल दिया जाता है

५) अर्घ्य –  उसके बाद भगवान् जी को  अर्घ्य  दिया जाता है |

६ ) पंचामृत – उसके बाद पंचामृत का स्नान कराते  है  ( दूध दही घी  शहद  ,चीनी  )

 ७ ) स्नान – उसके बाद  भगवान् जी को स्नान कराते  है |

८ ) चन्दन – भगवान् जी को चन्दन लगाया जाता है |

९ )अक्षता – उसके बाद अक्षता चढ़ाते है

१० ) पुष्पम – उसके बाद भगवान जी को फूल चढ़ाया जाता  है |

११) धुप और दीप की आरती  की जाती है|

१२) भगवान् जी को नैवेद्य दिखाया जाता है.

१३) ऊपर जो भी जानकारी दी गई है यह सब भगवान जी को पूजा की थाली में रख कर की जाती है |

१४) इसके बाद पंडित जी विभिन्न स्तोत्रों  के साथ भगवान् जी का अभिषेक करते है – इसमें पुरुष सूक्त स्त्री सूक्त महिम्न रूद्र पवमान इसमें से जो भी स्तोत्र आवश्यक है उसका पठन  करके भगवान् जी का अभिषेक करते है|

१५) अभिषेक होने के बाद भगवान जी को उनके स्थान पर रखा जाता है |

१६) यज्ञोपवीत – भगवान् जी को यज्ञोपवीत (जनेवू ) दिया जाता है |

१७ ) वस्त्र – जब हमारे पास कोई मेहमान आता है तो हम उस नए कपडे लेते है उसी तरह हम भगवान् जी को वस्त्र अर्पण करते है|

१८ ) चन्दन – भगवान् जी को चन्दन लगाया जाता  है |

१९ ) हल्दी – कुंकुम – भगवान् जी को हल्दी – कुंकुम लगाया जाता है |

२० ) पुष्पम – उसकी बाद विभिन्न फल भगवान् जी को चढ़ाये जाते है |

२१ ) अगर हम देवी का अभिषेक कर रहे हो तो देवी को विविध अलंकार अर्पण किए  जाते है |

२२) उसके बाद धुप और दीप की आरती  की जाती है|

२३) भगवान् जी को नैवैद्य दिखाया जाता है|

२४ ) उसके बाद भगवान् जी की आरती की जाती है |

इस तरह के षोडश उपचारों  से अभिषेक का विधि होती है यहाँ सिर्फ हम क्या करते है इसके बारे में

संक्षेप में अभिषेक यानी ऊपर दिए  गए सभी उपचारोंसे भगवान जी को मंत्र के साथ स्नान यहाँ जानकारी देना का प्रयास किया है इसमें कुछ कम जादा हो सकता हैलेकिन हम यहाँ सिर्फ हम अभिषेक यानी क्या यह बताने का प्रयास किया जिससे आप जब भी यह करेंगे तो हम में भक्ति का भाव जागृत हो जाए |

यहाँ दी हुवी बाते में अगर कुछ आपको गलत लगे तो उसे जरूर छोड़ दे |

आप सभी को धन्यवाद

 


Share
और पढिये !!

मन निशंक कसे करावे

निशंक - स्वामी भक्त हो आपण तारक मंत्रात निशंक हा शब्द ऐकतो अनेकदा आपण म्हंटला आहे.. पण मग आपले मन नक्की निशंक झाले आहे का? छोटी मोठी समस्या आली कि आपले मन शंकां निर्माण करते का ? नक्कीच करते कारण आपले मन अजून निशंक झाले नाही आहे त्या मुळे हे होते.. या साठी सर्व प्रथम...

चिंतन- नाम जप करताना मनात वाईट विचार येतात?

चिंतन- नाम जप करताना मनात वाईट विचार येतात? मनन- नाम जप करत असताना किंवा ध्यान करत असताना..मनात वाईट विचार येतात... असे वाटते की नको तो जप नको ते ध्यान...खरंतर जेव्हा हे विचार येत असतात ती आपली आंतरिक सफाई असते.. जी आपण आज पर्यत कधीच केलेली नसते म्हणून आपणस नको...

कोणती सेवा केली तर आमची समस्या सुटेल?

चिंतन- कोणती सेवा केली तर आमची समस्या सुटेल? मनन- कोणतीही सेवा करा..समस्या सुटणार नाही..कारण जो पर्यंत आपला त्या सेवेवर विश्वास नसेल...अनेकदा आपण म्हणतो की अमुक सेवा करतो...तमुक सेवा करतो पण माझी समस्या सुटत नाही...अहो आपण एक नाही अनेक सेवा करतो...जो पर्यंत आपण एका...

स्वामीं नाम

प्रातः काळी उठोन ! आधी करावे नामस्मरण !अंतरी घ्यावे स्वामी चरण ! शुद्धमन करोनी ! संदर्भ - श्री स्वामी चरित्र सारामृत - बोला श्री स्वामी समर्थ महाराज कि जय !...

वास्तू दोष निवारण प्रार्थना

स्वामी भक्तहो आपण नेहमी ऐकतो किंवा बोलत असतो कि वास्तू दोष आहे.. पण जर कुणाला विचारले कि वास्तू दोष म्हणजे नेमके काय.. तर नक्कीच आपणस सांगता येणार नाही.. वास्तू दोष असतो किंवा नसतो.. यात आपणस पडायचे नाहीये.. पण आपण ज्या वास्तू मध्ये राहतो तिथे दोष आहे असे आपण जेव्हा...

स्वर्ग नाम सेवेत आहे

ज्ञानदेवा पाठ हरि हा वैकुंठ । भरला घनदाट हरि दिसे ॥४॥ हरिपाठ स्वामी भक्त हो माऊली सांगत आहेत.. हरिपाठ काय आहे वैकुंठ आहे.. पहा आपण म्हणतो कि स्वर्ग सुख हवे आहे.. मग आपण म्हणतो हे केले कि स्वर्ग सुखाची अनुभूती येईल.. पण काही केले तरी आपणस आनंद प्राप्त होत नाही.. सुखाची...

ईश्वर एकच आहे

एक हरि आत्मा जीवशिव सम । वायां तू दुर्गमी न घालीं मन ॥३॥ हरिपाठ पहा काय बोध होतो...स्वामीं नाम घ्या..स्वामीं नाम..किमान रोज १ माळ जप करा www.chetnakeswar.com स्वामी भक्तो... वरील ओवी तून माऊली आपणस काय सांगत आहेत.. हरी हा एकच आहे.. जो शिव आहे.. जो आत्मा आहे.. आपण...

मंथन करा..आपल्यातील विचारांचे

!!श्री स्वामी समर्थ!! मंथुनी नवनीता तैसे घे अनंता । वायां व्यर्थ कथा सांडी मार्ग !!हरिपाठ पहा काय बोध होतो..स्वामीं नाम घ्या..स्वामीं नाम..रोज किमान १ माळ..! स्वामीं भक्तहो.. माऊली वरील ओवीतून खूप खोल असे मार्गदर्शन आपणस करत आहेत..मंथन करा..आपण अनेक ग्रँथ पुस्तके...

सर्वजण हरीचा महिमा वर्णन करतात

!!श्री स्वामी समर्थ!! चहूं वेदीं जाण साहीशास्त्रीं कारण । अठराही पुराणें हरिसी गाती ॥५॥ हरिपाठ पहा काय बोध होतो..स्वामीं नाम घ्या..स्वामीं नाम..रोज किमान रोज १ माळ..,! www.chetnakeswar.com स्वामीं भक्तहो.. माऊली सांगत आहेत.. चारही वेद, सहा शास्त्र व अठरा पुराणे ही...