आत्महत्या

Oct 18, 2021 | प्रेरनादाई कथा, हिंदी

Share

आत्महत्या

आत्महत्या करना पाप है या पुण्य है यह तो बहोत जटिल विषय है..लेकिन यहाँ हम इस बात में न अटकते हुवे…हमें यहाँ यह प्रयास करना है कि जब किसी के मन में यह विचार आये तो तुरंत वो दिल से सोचे न कि मन से सोचे..हम तो बहोत आसानी से कह देते है कि उसने आत्महत्या नहीं करनी चाहिए थी…या बहोत सी ऐसी बाते करते है जिसका कूछ भी उपयोग ना हो…कोई भी आदमी आत्म हत्या क्यूँ करता है…जिस आदमी ने कभी चूहा भी न मारा हो..वो आदमी कूद को खत्म कर देता है…ये कैसे होता है ? क्या सच में बहोत मनन करने जैसी बात है..यहाँ हम आत्महत्या क्यूं होती है इसके बारे में विचार करते है!

१) परीक्षा मे यश नहीं मिला..या परीक्षा में यश नहीं मिलेगा.

२) आर्थिक परेशानी

३)रिश्तों में दूरी

४)नकारात्मक सोच या वातावरण

 

यह कुछ कारणों के वजह से आत्महत्या की जाती है…इसके बारे में हम थोड़े विस्तार से चर्चा करते है!

 

परीक्षा में यश – अपयश – जीवन तो एक परीक्षा है लेकिन अनेक विद्यार्थी परीक्षा में यश मिलेगा या नहीं यह सोचकर मन मे भय निर्माण करते है..मन बोलता है तुम्हें यश नहीं मिलेगा और फीर मन नकारात्मकता तैयार हो जाती है..फिर मन बोलता है ..आत्महत्या कर लो अब यही एक रास्ता है..और अनेक विद्यार्थी आत्महत्या कर लेते है..जब रिजल्ट आता है तो वह विद्यार्थी अच्छे गुणों से पास हो जाता है लेकिन यह देखने के लिए वह खुद ही नहीं होता.. सच में हम कई बार यह घटना देखते है..यह हम रोक सकते है..माता पिता ने अपने बच्चों से बात करनी चाहिए ..उसे समझाना चाहिए कि अरे परीक्षा में अच्छे गुण प्राप्त करना अच्छी बात है लेकिन कम गुण प्राप्त करना यह कोई गुनाह नहीं है..ऐसी अनेक परीक्षा तुम्हें जिंदगी में देनी है..कभी यश आएगा तो कभी अपयश आएगा लेकिन तुम उदास..निराश मत होना..हम हमेशा तुम्हारे साथ है..देखो यह बात करने के बाद आपका बच्चा आत्महत्या करने का नहीं सोचेंगा.. आपसे खुल कर बात करेगा.. लेकिन इसके लिए आपको उसका सच्चा मित्र बनना जरूरी है..!!

आर्थिक परेशानी- पैसा है तो सबकुछ है..यह आदमी हमेशा सुनता है ..लेकिन आप है इसलिए पैसा है..यह बात जब तब आप नहीं बात आपके दिल में पक्की नहीं होती तब तक आप कभी सुखी नहीं हो सकते…आप ने आत्महत्या करने से क्या होगा!

प्रेम का वियोग – अनेक लड़के लडकिया प्रेम का वियोग होने से आत्महत्या कर लेते है.सच में यह प्रेम है!

बातचीत का अभाव -अभी इस युग में हम एक दूसरे से बात ही नहीं करते..हम और हमारी दुनिया इतनी ही हमारी दुनिया इसमें अनेक बार हम आत्महत्या करने जैसे कदम उठाते है!

अभी हम आत्महत्या का जो विचार हमारे मन में आया है उसके ऊपर स्व- संवाद करेंगे!

 

शांत बैठो ..आँखे बंद करो..आगे जो बातें है उसके ऊपर मनन करो…अब यहाँ जो चिंतन करना है.. वो हर एक के परिस्थिति के अनुसार होंगा!

मेरे मन आत्महत्या का विचार क्यूं आ रहा है..

परीक्षा में अपयश मिलेगा या कम मार्कस मिलेंगे यह बात के लिए में आत्महत्या करने का सोच रहा हूं …सचमें इस वजह से आत्महत्या करने से क्या होगा…अगर सिर्फ इस वजह से में आत्महत्या करूँगा तो…उससे अच्छा में परिस्थितियों का सामना करूँगा तो..ऐसे अनेक लोग है..जो परीक्षा में कम मार्क्स से पास हुवे है..या पास भी नहीं हुवे..लेकिन वो लोग आज बहोत सफल है…में आत्महत्या नहीं करूंगा..में भी सफल हो सकता हूं… सफल हूँगा!!!

 

आर्थिक स्थिति के कारण में आत्महत्या करने का सोच रहा हु..सचमें पैसा मेरे लिए है ..या में पैसे के लिए हु..आज मेरे पास पैसा नही..मेरे ऊपर कर्जा हुवा है..मुझे किसी भी काम में यश प्राप्त नहीं हो रहा..नोकरी नहीं मिल रही..पैसा न आ रहा..पैसा मेरे पास नहीं रहता.. मेरे ऊपर बहोत कर्जा हुवा है..अब मेरे पास आत्महत्या करने के सिवाए कुछ भी रास्ता नहीं… सचमें अगर तुमने आत्महत्या करने से तुम्हारे घर की आर्थिक स्थिति अच्छी होंगी क्या? मेरे मरने से कर्जा खत्म होगा क्या? घर वाले सुख-चैन से रह सकते है क्या?मेरे मरने के बाद उनको जो मदत मिलेगी उससे मेरा परिवार सुखी होंगा क्या? अगर आप इसका उत्तर नहीं ऐसा मिलेगा तो..अब सोचो कितने बड़े ..बड़े लोग कर्जा लेकर बैठे है..वो लोग आत्महत्या नहीं करते..मेरे ऊपर थोडासा ही कर्जा है..जो में आज नहीं तो कल दे सकता हु..आर्थिक स्थिति के वजह से में आत्महत्या नहीं करूंगा..देखो आप जल्द ही कर्ज मुक्त हो जाएंगे!!

प्रेम वियोग – प्रेम वियोग हुवा इसलिए लोग आत्महत्या करते है…सच में हम प्रेम कर रहे है दूसरों पर लेकिन खुद पर प्रेम नहीं करते और बोलते है..मैं तुम्हारे बिना जी नहीं सकता / सकती…यह प्रेम नही विकृति है..अगर आप सच में प्रेम करते हो तो फिर आत्महत्या क्यूँ कर रहे हो!! देखो सच में अगर इसके ऊपर मनन करेंगे तो आप कभी भी आत्महत्या नहीं करेंगे!!

बातचीत का अभाव- आज कल लोग एक दूसरे से बातचीत नहीं करते..जो भी करना है वह मन में ही करते है..खुद से जो बातचीत करते है..वो भी नकारात्मक करते है..क्या होता जब हमारे मन कूछ आत्महत्या जैसे विचार आते है..उस वक्त भी हम खुद से..सच्चाई से बात नहीं करते.. और इस वजह से हमारा मन हम पर ही हावी हो जाता है…इससे बचने के लिए हमें हमारी मन की बाते एक दूसरे से शेयर करनी चाहिये..कम से कम अपना खुद से स्व-संवाद होगा तो हम सपने ने भी आत्महत्या नहीं करेंगे!!

यहाँ एक प्रयास किया है कि आत्महत्या का विचार आये तो उसके ऊपर चिंतन.. मनन हो..आत्महत्या न हो!!

आप को अगर यह लेख पसंद आया हो तो जरूर शेयर करे..आपके अभिप्राय हमे मेल कर के बताए

 


Share
और पढिये !!

१ मंगलाचरण – श्री रामचरित मानस श्री तुलसीदास

आपण संत श्रेष्ठ तुलसी दास यांच्या श्री रामचरित मानस यावर चिंतन मनन करणार आहोत प्रथम सोपान बालकाण्ड.. सर्व प्रथम मंगलाचरण केले आहे त्यात श्री गणपती बाप्पा , श्री सरस्वती माता , भगवान श्री शंकर , कवीश्वर वाल्मिकी , श्री हनुमानजी , श्री सीता माता प्रभू श्री राम यांना...

देवी भगवतीला प्रार्थना –

https://youtu.be/TCahq34720k हे देवी भगवती.. राजा सुरथ आणि समाधी यांना निमित्त करून तू आम्हाला आमच्यातील मोह, लोभ, मायेचे दर्शन करून दिलेस त्याबद्दल धन्यवाद मधू आणि कैटभ ज्या प्रमाणे बलवान होते त्याप्रमाणे आमच्यातील हे लोभ , मोह , माया हे विकार आमच्यात खोलवर रुजले...

ध्यान म्हणजे काय?

https://youtu.be/OjvH-OX4ATo     ध्यान..ध्यान म्हणजे काय? खरंच ध्यान म्हणजे काय..आपण अनेकदा ऐकतो ध्यान केले पाहिजे..पण ध्यान म्हणजे काय..आपण याचे अनेक फायदे ऐकतो..मग आपणासही वाटते ध्यान करावे..मग प्रत्येक जण म्हणतो की अमुक अमुक ध्यानाची पद्धती श्रेष्ठ...

जेव्हा व्रत घेतले तेव्हा विचार नाही केला.. आता व्रताच्या पूर्तीची वेळ आली तेव्हा का विचार करत आहेस… !

https://youtu.be/ys7eNZGQJeU श्री गजानन महाराज म्हणत आहेत... जेव्हा व्रत घेतले तेव्हा विचार नाही केला.. आता व्रताच्या पूर्तीची वेळ आली तेव्हा का विचार करत आहेस... ! लीला -श्री गजानन महाराज बंकटलाल यांच्या घरी शेगांव येथेच रहात होते.. ते काशी चे गोसावी होते.. त्यांनी...

डॉक्टरांच्या अथक प्रयत्नांनी व लाखोंच्या सकारत्मक प्रार्थनेने मृत्यूच्या दारातून परत.. स्वामीं सेवेकरी…!

आपण नेहमी म्हणतो की स्वामींच्या इच्छेत इच्छा मिळवून रहावे.. म्हणजेच आपले कर्म निस्वार्थ भावनेने करावे..फळाची अपेक्षा करू नये...खरंच काय असते निःस्वार्थ सेवा..अशी निःस्वार्थ सेवा करणारे कुणी आहेत का... असा प्रश्न आपल्या मनात निर्माण होईल तर याचे उत्तर आहे हो..असे...

श्री गजानन महाराज लीला दर्शन ८ – गजाजन महाराज सांगत आहेत अती सर्व वर्ज्य करा

श्री गजानन महाराज लीला दर्शन ८ - गजाजन महाराज सांगत आहेत अती सर्व वर्ज्य करा... !  आपण लीला क्रमांक ७ मध्ये पाहिले कि श्री गजानन महाराज श्री बंकटलाल यांच्या घरीच राहिले.. दुसऱ्या दिवशी श्री गजानन महाराजांची विविध प्रकारचे सुंगधी द्रव्याने स्नान घातले.. षोडश उपचारे...

पितृपक्ष – पितृपक्ष किंवा पक्ष पंधरवाडा

पितृपक्ष - पितृपक्ष किंवा पक्ष पंधरवाडा, आपल्याकडे दरवर्षी भाद्रपद वद्य प्रतिपदा ते भाद्रपदी अमावास्या हा साधारण १५ ते १६ दिवसाची कालावधी ला आपण पितृपक्ष म्हणतो. पितृपक्ष म्हंटलं कि आपल्या कडे आपण म्हणतो कि कोणतेच धार्मिक  कार्य या महिन्यात करायची नाही हे आपण आज...

श्री गणपती बाप्पा ची मूर्ती आपणस काय प्रेरणा देत आहे

श्री गणपती बाप्पा ची मूर्तीची आपण स्थापना करतो हि मूर्ती आपणस अनेक गोष्टींची प्रेरणा देते.. चला तर मग आज आपण यावर चिंतन मनन करण्याचा प्रयत्न करूया...विशाल मस्तक आपणस प्रेरणा देते ज्या प्रमाणे बाप्पा बुद्धी ची देवता आहे त्याचप्रमाणे आपण कायम नवनवीन ज्ञान प्राप्त केले...

प्रार्थना – दोष कुणाचा

हे समर्था.. आज पर्यंत मला वाटत होते की समोरची व्यक्तीच चुकीची आहे..पण आज मला समजले की दोष समोरच्यात नाही तर माझ्या विचारांत आहे..माझ्या विचारांतील दोष दूर कर..कारण माझे जसे विचार तशीच सृष्टी मला प्राप्त होणार आहे..माझी दृष्टी..विचार..आचार प्रेम..आनंद..मौनमय...

प्रार्थना – प्रार्थना म्हणजे काय ?

प्रार्थना - प्रार्थना म्हणजे काय ? खरंतर आपण लहान पणा पासून प्रार्थना करत आलो आहोत..  तरी देखील आज यावर चिंतन मनन करणे आवश्यक आहे.. कारण अनेकदा आपण प्रार्थना करतो तरी देखील आपण पहातो कि काही प्रार्थना पुर्ण होतात काही होत नाही असे का ? खरंतर आपण प्रार्थना काय करतो...