आत्महत्या

आत्महत्या

आत्महत्या करना पाप है या पुण्य है यह तो बहोत जटिल विषय है..लेकिन यहाँ हम इस बात में न अटकते हुवे…हमें यहाँ यह प्रयास करना है कि जब किसी के मन में यह विचार आये तो तुरंत वो दिल से सोचे न कि मन से सोचे..हम तो बहोत आसानी से कह देते है कि उसने आत्महत्या नहीं करनी चाहिए थी…या बहोत सी ऐसी बाते करते है जिसका कूछ भी उपयोग ना हो…कोई भी आदमी आत्म हत्या क्यूँ करता है…जिस आदमी ने कभी चूहा भी न मारा हो..वो आदमी कूद को खत्म कर देता है…ये कैसे होता है ? क्या सच में बहोत मनन करने जैसी बात है..यहाँ हम आत्महत्या क्यूं होती है इसके बारे में विचार करते है!

१) परीक्षा मे यश नहीं मिला..या परीक्षा में यश नहीं मिलेगा.

२) आर्थिक परेशानी

३)रिश्तों में दूरी

४)नकारात्मक सोच या वातावरण

 

यह कुछ कारणों के वजह से आत्महत्या की जाती है…इसके बारे में हम थोड़े विस्तार से चर्चा करते है!

 

परीक्षा में यश – अपयश – जीवन तो एक परीक्षा है लेकिन अनेक विद्यार्थी परीक्षा में यश मिलेगा या नहीं यह सोचकर मन मे भय निर्माण करते है..मन बोलता है तुम्हें यश नहीं मिलेगा और फीर मन नकारात्मकता तैयार हो जाती है..फिर मन बोलता है ..आत्महत्या कर लो अब यही एक रास्ता है..और अनेक विद्यार्थी आत्महत्या कर लेते है..जब रिजल्ट आता है तो वह विद्यार्थी अच्छे गुणों से पास हो जाता है लेकिन यह देखने के लिए वह खुद ही नहीं होता.. सच में हम कई बार यह घटना देखते है..यह हम रोक सकते है..माता पिता ने अपने बच्चों से बात करनी चाहिए ..उसे समझाना चाहिए कि अरे परीक्षा में अच्छे गुण प्राप्त करना अच्छी बात है लेकिन कम गुण प्राप्त करना यह कोई गुनाह नहीं है..ऐसी अनेक परीक्षा तुम्हें जिंदगी में देनी है..कभी यश आएगा तो कभी अपयश आएगा लेकिन तुम उदास..निराश मत होना..हम हमेशा तुम्हारे साथ है..देखो यह बात करने के बाद आपका बच्चा आत्महत्या करने का नहीं सोचेंगा.. आपसे खुल कर बात करेगा.. लेकिन इसके लिए आपको उसका सच्चा मित्र बनना जरूरी है..!!

आर्थिक परेशानी- पैसा है तो सबकुछ है..यह आदमी हमेशा सुनता है ..लेकिन आप है इसलिए पैसा है..यह बात जब तब आप नहीं बात आपके दिल में पक्की नहीं होती तब तक आप कभी सुखी नहीं हो सकते…आप ने आत्महत्या करने से क्या होगा!

प्रेम का वियोग – अनेक लड़के लडकिया प्रेम का वियोग होने से आत्महत्या कर लेते है.सच में यह प्रेम है!

बातचीत का अभाव -अभी इस युग में हम एक दूसरे से बात ही नहीं करते..हम और हमारी दुनिया इतनी ही हमारी दुनिया इसमें अनेक बार हम आत्महत्या करने जैसे कदम उठाते है!

अभी हम आत्महत्या का जो विचार हमारे मन में आया है उसके ऊपर स्व- संवाद करेंगे!

 

शांत बैठो ..आँखे बंद करो..आगे जो बातें है उसके ऊपर मनन करो…अब यहाँ जो चिंतन करना है.. वो हर एक के परिस्थिति के अनुसार होंगा!

मेरे मन आत्महत्या का विचार क्यूं आ रहा है..

परीक्षा में अपयश मिलेगा या कम मार्कस मिलेंगे यह बात के लिए में आत्महत्या करने का सोच रहा हूं …सचमें इस वजह से आत्महत्या करने से क्या होगा…अगर सिर्फ इस वजह से में आत्महत्या करूँगा तो…उससे अच्छा में परिस्थितियों का सामना करूँगा तो..ऐसे अनेक लोग है..जो परीक्षा में कम मार्क्स से पास हुवे है..या पास भी नहीं हुवे..लेकिन वो लोग आज बहोत सफल है…में आत्महत्या नहीं करूंगा..में भी सफल हो सकता हूं… सफल हूँगा!!!

 

आर्थिक स्थिति के कारण में आत्महत्या करने का सोच रहा हु..सचमें पैसा मेरे लिए है ..या में पैसे के लिए हु..आज मेरे पास पैसा नही..मेरे ऊपर कर्जा हुवा है..मुझे किसी भी काम में यश प्राप्त नहीं हो रहा..नोकरी नहीं मिल रही..पैसा न आ रहा..पैसा मेरे पास नहीं रहता.. मेरे ऊपर बहोत कर्जा हुवा है..अब मेरे पास आत्महत्या करने के सिवाए कुछ भी रास्ता नहीं… सचमें अगर तुमने आत्महत्या करने से तुम्हारे घर की आर्थिक स्थिति अच्छी होंगी क्या? मेरे मरने से कर्जा खत्म होगा क्या? घर वाले सुख-चैन से रह सकते है क्या?मेरे मरने के बाद उनको जो मदत मिलेगी उससे मेरा परिवार सुखी होंगा क्या? अगर आप इसका उत्तर नहीं ऐसा मिलेगा तो..अब सोचो कितने बड़े ..बड़े लोग कर्जा लेकर बैठे है..वो लोग आत्महत्या नहीं करते..मेरे ऊपर थोडासा ही कर्जा है..जो में आज नहीं तो कल दे सकता हु..आर्थिक स्थिति के वजह से में आत्महत्या नहीं करूंगा..देखो आप जल्द ही कर्ज मुक्त हो जाएंगे!!

प्रेम वियोग – प्रेम वियोग हुवा इसलिए लोग आत्महत्या करते है…सच में हम प्रेम कर रहे है दूसरों पर लेकिन खुद पर प्रेम नहीं करते और बोलते है..मैं तुम्हारे बिना जी नहीं सकता / सकती…यह प्रेम नही विकृति है..अगर आप सच में प्रेम करते हो तो फिर आत्महत्या क्यूँ कर रहे हो!! देखो सच में अगर इसके ऊपर मनन करेंगे तो आप कभी भी आत्महत्या नहीं करेंगे!!

बातचीत का अभाव- आज कल लोग एक दूसरे से बातचीत नहीं करते..जो भी करना है वह मन में ही करते है..खुद से जो बातचीत करते है..वो भी नकारात्मक करते है..क्या होता जब हमारे मन कूछ आत्महत्या जैसे विचार आते है..उस वक्त भी हम खुद से..सच्चाई से बात नहीं करते.. और इस वजह से हमारा मन हम पर ही हावी हो जाता है…इससे बचने के लिए हमें हमारी मन की बाते एक दूसरे से शेयर करनी चाहिये..कम से कम अपना खुद से स्व-संवाद होगा तो हम सपने ने भी आत्महत्या नहीं करेंगे!!

यहाँ एक प्रयास किया है कि आत्महत्या का विचार आये तो उसके ऊपर चिंतन.. मनन हो..आत्महत्या न हो!!

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परब्रम्ह श्री स्वामी समर्थ महाराज

परब्रम्ह श्री स्वामी समर्थ महाराज

विश्व  के चालक- मालक-पालक भगवान् श्री स्वामी समर्थ महाराज का चरित्र तो अथांग सागर जैसा है वह किसी एक लेख में या पोस्ट में समा  नहीं सकता ये तो सभी स्वामी भक्त जानते ही है ! यहाँ हम आपको एक ऐसी वेबसाइट के बारे में जानकारी देने वाले है जहाँपर आपको श्री स्वामी समर्थ महाराज जी का चरित्र पढ़ने को मिलेगा उसेसे पहले आपको यहाँ थोड़ी जानकारी देने का हम यहाँ प्रयास करते है ! इ. स. ११४९ में छेले  खेड़े ग्राम में भगवान दत्तात्रय जी ने श्री स्वामी समर्थ अवतार लिया ! २२९ साल पुरे विश्व में यानी चीन मलाया सिंगापूर और संपूर्ण भारतभर स्वामी महाराज जी ने यात्रा की उन्हें अंधश्रद्धा बिलकुल पसंद नहीं थी ! इ.स १५२८ में महाराष्ट्र के कारंजा से अपना कार्य श्री  नृसिंहंसरस्वती अवतार  ले कर किया ! इ.स. १६७८ में उन्होनो अपने अवतार की सांगता करके फिर से १८५६ में श्री स्वामी समर्थ अवतार धारण किया ! स्वामी महाराज भगवान् श्री दत्तात्रय  जी के ही अवतार है ! वे हमेशा कहते थे की मै  नृसिंह  भान श्री शैलम में जो कर्दळी  वन है वहाँ  से में आया हु ! उन्होने हम सभी को अभय वरदान दिया वो यह है की – डरो मत मै  तुम्हारे साथ हू  ( भिऊ नकोस मी तुझ्या पाठीशी आहे ) यह जो अभय वचन उसकी अनुभूति हम सभी स्वामी भक्तो को हमेशा  आती है ! हम सब की स्वामी महाराज जी के ऊपर की  श्रद्धा विश्वास भक्ति बढे हमे  स्वामी महाराज जी चरित्र पढ़ना चाहिए उसके ऊपर मनन करना चाहिए ! आज अनेक ग्रंथ उपलब्ध है ! लेकिन आज के भागती दौड़ती जिंदगी हमें यह संभव नहीं होता लेकिन स्वामी महाराज जी की लीला तो बहोत गहरी है ! उन्होने हम सबके लिए चरित्र और उसका बोध आज वेबसाइट के माध्यम से हमें उपलब्ध  करा दिया है ! हमें सिर्फ हमारे समय अनुसार उस वेबसाइट के ऊपर जा कर वह पढ़ना है उसके ऊपर चिंतन मनन  करना है ! देखिए आपके अनेक सवालों का जबाब आपका हमारे स्वामी महाराज जी के लीला से प्राप्त होंगे  ! इस वेबसाइट के ऊपर स्वामी वाणी मराठी और हिंदी ये दोनों भाषा में उपलब्ध है ! इस लेख के माध्यम से में  जिन्होंने भी यह सेवा की उनको धन्यवाद देता हु ! स्वामी महाराज जी को भी धन्यवाद ! स्वामी महाराज जी से हम यहाँ यही प्रार्थना करेंगे की उन्हें और अधिकाधिक स्वामी वाणी का विश्लेषण करने का मौक़ा मिलता रहे और हमें स्वामी वाणी कर प्रसाद मिलता रहे – चलो स्वामी वाणी के गाँव जाते है ! हमारी है एक सांस स्वामी मया बने इसलिए हम भी स्वामी वाणी पढ़े और बाकी लोगो को भी इस बारे में  बताइये – स्वामी वाणी वेबसाइट WWW.SWAMIVAANI.COM

 

डिजिटल दुनिया –

डिजिटल दुनिया –

आज का युग डिजिटल युग है .. हम सभी डिजिटल हो गए है … एक समय था की हम एक दूसरे से  सवांद करने के लिए कई महीने- साल रुकना पड़ता था… क्यूंकि लोगों को एक गांव से दूसरे गांव संदेशा  देने के लिए  किसीको भेजना पड़ता था ..बाद में संदेशा  भेजने के लिए पत्रों का ..टेलीग्राम का प्रयोग शुरू हुवा उसमे भी कुछ दिनों का समय लगता था .. लेकिन हर कोई अपने परिजनों को चिठ्ठी लिखता था… वो कैसा है .. उसके घर के सभी की खुशियाली पूछता था …हर रोज हम पोस्टमैन मामाजी की राह देखते थे … अगर वो रास्ते से जाते हुवे दीखते तो हम उन्हें पूछते थे की हमारी कोई चिट्ठी  आयी है क्या  ? स्कुल में थे तब पोस्टमन जी के ऊपर निबंध भी लिखते थे .. पोस्ट के साथ .. कूरियर की सुविधा भी शुरू हुवी .. फिर भी हम चिट्ठी की राह तो देखते ही थे ..जैसे जैसे प्रगति होती गई वैसे वैसे संवाद के नए साधन आने लगे… फोन के ऊपर से बातचीत लोग कर पाने लगे.. गांव में किसी एक के पास टेलीफोन होता था .. उसी का नंबर हम हमारे रिश्तेदारों के देते थे… अब एक दूसरे से संवाद करना थोड़ा आसान हुवा था… फिर भी कुछ गावों में यह सुविधा नहीं थी .. बाद में और प्रगति होने के बाद अब गांव में कुछ कुछ घरो में फोन आने लगे… लेकिन उसका जो भी रेंट था .. हर कॉल जो खर्चा था वो बहुत ही ज्यादा था …ज्यादा बिल न आए इसलिए बहोत से घरो में घरो में उस टेलीफोन को ताला भी लगाते  थे….उसके बाद और प्रगति होने के बाद पेजर भी आया जिससे हमें  एक दूसरे के साथ मेसेज करके संवाद कर सकते थे … उसके बाद और प्रगति हुवी .. जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी थी वे लोग मोबाईल लेने लगे …. लकिन वो भी इतना महंगा था की हमको फोन आया तो भी हमें चार्जेस  लगते थे…. इसलिए उसका भी उपयोग कम होता था ..जैसे जैसे  प्रगति होती गई और एक  समय आया जिस समय इनकमिंग कॉल्स फ्री हो गए .. मोबाइल के दाम कम हो गए .. और एक प्रभावी संदेश का माध्यम सबके लिए  खुला होने लगा ..  तब लोग थोड़ा बहोत संवाद करने लगे  .. उस वक्त इंटरनेट का शुरू शुरू में इतना कोई प्रयोग नहीं था… सभी एक दूसरे से फोन करके बात करने का प्रयास करते थे ..क्यूंकि इंटरनेट बहोत ही महंगा था .. हम प्रगति की और बढ़ ही रहे थे.. अब डिजिटल युग में हम पैर रखने वाले है .. अब एक दिन ऐसा हुवा की जो १ जीबी  डेटा हमें महीने के लिए  मिलता था अब वह हमें हर रोज के लिए १ जीबी डेटा मिलने लगा …उसके साथ और भी एक ऑफर शुरू हो गई की अनलिमिटेड टॉकटाइम की यानी हम अगर २०० का रिचार्ज करेंगे तो हमें एक महीने के लिए … हर रोज हमें कितने भी वक्त बात कर सकते है और हमें १ जीबी डेटा  भी हमें उपलब्ध हो गया… सृष्टि ने सोचा  अब लोग एक दूसरे के साथ संवाद करेंगे… जो लोग एक दुसरे के साथ बात कर नहीं सकते वे अब एक दूसरे के साथ… फोन के द्वारा संवाद करेंगे… वैसा होने ही वाला था की तुरंत सोशल मीडिया के कुछ  ऍपस  जिस से हम एक दूसरे के साथ मेसेज भेज सकते है … फोटो भेज सकते है … हमारा  स्टेटस लगा सकते है … और  उससे कॉल भी कर सकते है .. ऐसे ऍपस आये … अब कुदरत  ने सोचा की अब लोग एक दूसरे के साथ बहोत बात कर सकते है … जरूर लोग अब एक दूसरे के करीब आएंगे .. संवाद बढ़ेगा.. जो लोगों को सालो साल बात नहीं कर सकते थे वे अब एक दूसरे के साथ बात करेंगे.. एक दूसरे की खुशियाली पूछेंगे .. सभी तरफ खुशियाँ ही खुशियाँ आएँगी.. लेकिन हम कुदरत जो चाहती थी वे नहीं हुवा.. हमें ऍपस इस तरह से वश किया की हमारी दुनिया ऍपस की दुनिया बन गई…  हम ऍपस में अटक गए… हमें अनलिमिटेड टॉकटाइम मिल रहा है पर हम किसको को कॉल नहीं करते … ऍप्स  द्वारा भी कॉल नहीं करते …किसीका जन्म दिन आया .. उसको मेसेज करते है … उसके फोटो का स्टेटस लगा देते है…फोट भी ऐसा लगाते है जिसका जन्मदिन है उसको मुगुट पहनाते  है… लोगों  ने सोचने का है इसका जन्मदिन लगता है .. कोई पास हो गया उसका फोटो लगाएंगे.. कोई मर गया उसका फोटो लगाएंगे और लिखेंगे RIP  या भावपूर्ण श्रद्धांजलि .. RIP  का भी शब्द पूरा नहीं लिख रहे उसका पूरा शब्द भी बहोत लोगों को मालूम नहीं… या और कुछ लिखेंगे.. इतना किया हो गया काम .. पति पत्नी भी एक दूसरे से मेसेज के द्वारा बात कर रहे है .. घर के सभी सदस्य मोबाइल के दुनिया में अटक गए … अरे जरा सोचो …सच में हम हमारे भाव प्रगट कर रहे है ? या सिर्फ दिखावा कर रहे है ? सच में हम जिसका स्टेटस लगा रहे है.. उससे हमारी मैत्री है ..  वो हमारा रिश्तेदार है ..  या वो आदमी है ..या एक मशीन है.. या हमारा उसके साथ जो भी रिश्ता है वह सिर्फ दिखावट है क्या ? सच में हम उसके सुख में शामिल है तो उसे फोन करके बधाई नहीं दे सकते ? कोई आदमी मर गया तो उसके घर वालों  को फ़ोन भी नहीं कर सकते ? आखिर हम क्या कर रहे ? सचमे हम डिजिटल हो रहे या ..जूठे इंसान बन रहे है.. अगर हम फोन करेंगे तो .. हम जिसे फ़ोन कर रहे है उसे खुशी  तो होगी..  उसके  साथ हमको जो आंतिरक समाधान प्राप्त होगा  … वह बहोत बड़ा होगा .. डिजिटल बनो लेकिन पहले लोगों  से बात करो जिससे हमको सच्चा सुख… आंनद… प्रेम… प्राप्त होगा ..!! और आज से एक निश्चय करो की .. हम फोन करके संवाद करेंगे.. हम ऐसा नहीं सोचेंगे की उसने मुझे फोन करके शुभेच्छा  नहीं दी..  उसने फोन नहीं किया इसलिए में भी नहीं करूँगा.. सृष्टि  का नियम है.. जो आप उसको देंगे वह आपको और किसी माध्यम से ..  दुगना करके देती है.. चलो आज से शुरवात करते है…

इसमें जो भी कुछ लिखा है दिल से लिखा है .. शब्दों की कमी हो सकती ….कहाँ  शब्दों में गलती भी हो सकती है … उसके लिए  माफ़ करना…. किसी की भी भावना को दुःख पहुंचाने के लिए नहीं बल्कि हम खुद सोचे की हम क्या कर रहे है.. आपने आप का बहुमूल्य समय देकर यह सब पढ़ा इसके लिए  धन्यवाद … कुछ गलत लगा हो तो उसके लिए क्षमा  मांगते है .. पसंद आया तो औरों को शेयर जरूर करो… आपके सुझाव भी हमें जरूर बतावो … धन्यवाद स्वामी .. कोटि कोटि धन्यवाद

 

संकष्टी चतुर्थी

संकष्टी चतुर्थी  – गणेश भक्तोंका एक व्रत  है जिसे संकष्टी चतुर्थी  कहाँ  जाता है ! अनेक भक्त यह व्रत करते है ! इस व्रत के पीछे बहोत सी कथाये है ! अभी हम गणेश पुराण में जो कथा है वो यहाँ देखते है ! कृतवीर्य  नाम के राजा थे वे एक परिपूर्ण ऐसे राजा थे ! उनकी पत्नी का नाम सुगंधा था वो भी पति सेवा में मग्न रहती थी ! वे दोनों का संसार खूब अच्छा चल रहा था ! लेकिन उनके जीवन में एक ही बात की न्यूनता थी ! उनको संतान नहीं थी ! उन्होने बहोत से वैद्य  को दिखाया , बहोतसे व्रत किये लेकिन उनको संतान सुख प्राप्त नहीं हो रहा था ! आगे जाकर उन्हें संसार में रुची नहीं रही इसलिए वे दोनों सभी सुखोंका  त्याग करके वन में चले गए ! वहाँ जाने के बाद उन्होंने सभी सुखोंका त्याग किया था इसलिए जो भी कुछ मिलेगा उसके ऊपर वे अपना उदर निर्वाह करने लगे , इस वजह से वे दोनों की सेहत कमजोर होने लगी ! वे दोनों की स्थिति देखकर श्री नारदमुनि जी को बहोत दुःख हुआ ! नारद मुनि तुरंत स्वर्गलोक गए और उन्होंने कृतवीर्य के पिताजी को उनके बेटे के बारे में बताया तो उन्हें भी बहोत दुःख हुआ ! उन्होंने ब्रम्हदेव जी को प्रार्थना की – हे ब्रम्हदेव जी आपको प्रणाम – कृतवीर्य मेरा पुत्र है ! उसे संतति सुख नहीं मिल रहा ! अभी आप ही कृपा करके इसके लिए कुछ मार्ग दिखा दी जे ! ब्रम्हदेव जी ने उन्हें बताया  पिछले जन्म में तुम्हारा पुत्र एक चोर था ! वह लोगोंको लूटकर उन्हें मारकर अपने कुटुंब की उदरनिर्वाह चलता था ! एक दिन उसने कुछ ब्राम्हणोकि हत्या की.. वो दिन माघ कृष्ण चतुर्थी का था ! उस दिन उसने पुरे दिन कुछ भी नहीं खाया था…  उसे रात को घर आते आते बहोत देर हो गयी थी  ! चंद्रोदय  के बाद उसने खाना खाया ! इस प्रकार जाने अनजाने में उससे यह व्रत हुआ !  इस पुण्य के प्रभाव से उसे इस जन्म  में राज्य पद प्राप्त हुआ… लेकिन ब्रम्हहत्या होने के कारन उसे संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ… अगर वो संकष्टी चतुर्थी का व्रत करेगा… तो उसे अवश्य संतान  सूख प्राप्त होगा ! पिता के आज्ञा के अनुसार , संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया उसे संतान सुख प्राप्त हुवा ! इस  तरह संकष्टी चतुर्थी व्रत के पीछे का रहस्य है ! ऊपर के कथा से हमें संकष्टी चतुर्थी के बारे में पता चला  इसके ऊपर हमें चिंतन मनन करके हमें बोध हो रहा है की हम जो भी कुछ कर्म करते है  उस कर्म का फल हमें जरूर मिलता है फिर वो राजा हो या रंक  हो ! इसलिए हमें अपना कर्म अच्छा ही करना है ! सच्ची संकष्टी चतुर्थी का उपवास वही होगा  अगर हमारा हर एक कर्म अच्छा कर्म हो, फिर हमारा हर एक दिन संकष्टी चतुर्थी का व्रत बन जायेगा और गणेश जी की कृपा प्राप्त हो जाएगी ! आपको हमारा यह ब्लॉग कैसा लगा हमें जरूर बताइये ! धन्यवाद श्री गणेश जी … कोटि कोटि धन्यवाद !

भगवान् श्री गणेश जी की पूजा सर्वप्रथम क्यूँ की जाती है ?

भगवान् श्री गणेश जी की पूजा सर्वप्रथम क्यूँ  की जाती है ?
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
कार्य कोनसा भी हो उस कार्य का आरंभ भगवान् श्री गणेश जी की पूजा से किया जाता है ! यह प्रथा बरसो से चल रही है और चलती रहेगी जब हम कोनसा भी कार्य करते है… अगर उस कार्य के बारे में हमें अगर सम्पूर्ण  जानकारी होगी तो वह कार्य अधिकधिक् आसान होता है और हमें आनंद भी प्राप्तः होता है ! अनेक बार हम हमारे घर में पंडित जी को बुलाते है और वह कहते की गणेश जी की पूजा से हम कार्य की शुरुवात करते है ! आज तक आपने कभी यह सोचा है क्या गणेश जी की ही पूजा सर्वप्रथम क्यूँ  की जाती है सिर्फ पहले पूजा करते इसलिए हमें गणपति जी की पूजा करनी है क्या अगर यह सवाल आपके मन में आया  हो लेकिन आपको इसका जबाब  नहीं मिला हो ! आज हम इसी के बारे में यहाँ जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करने वाले है ! वैसे तो इसके बारेमे बहोतसी कथाये है लेकिन हम यहाँ एक कथा के द्वारे यह समज़ने का प्रयास करते है !   एक दिन सभी देवो की चर्चा शुरू थी उस चर्चा का विषय था की सबसे पहले पूजनीय कौन  है  सबसे पहले किसकी पूजा करनी चाहिए  अभी यह चर्चा  तो सभी देवो के बीच में शुरू थी ! हम अक्सर देखत है की हमें लगता है की में ही सर्व श्रेष्ठ हु सबने मुझसे सलाह मसलत करनी चाहिए मेरी ही बात सुननी चाहिए मेरी ही वाह वाह  करनी चाहिए ! लगता है की नहीं आप अपने आप से पूछो ! उसी तरह सभी देवो की बीच में इस विषय पर चर्चा शुरू थी ! हर एक को लग रहा था में ही सर्वश्रेष्ठ हु मेरी ही पूजा सर्व प्रथम हो ! इस पर उनकी बहोत चर्चा हुई लेकिन उसमे किसका भी एक मत नहीं हो रहा था ! तब सभी देवो ने अपना प्रश्न वंदनीय श्री नारद जी से पूछा  तब उन्होने सोच कर बोले की हम इस प्रश्न को लेकर भगवान श्री शंकर जी और पार्वती  माता जी के पास जाते है ! वे सभी  कैलास पे जाते है और उनका प्रश्न  भगवान् जी से पूछते है !  की सब पहले किसकी पूजा सर्व  प्रथम होनी चाहिए तब भोलेनाथ जी बोले की यह बहोत कठिन सवाल है !  इसका जबाब देने के लिए हमें एक परीक्षा  लेनी पड़ेगी उस में जो प्रथम आएगा उसकी पूजा हर एक कार्य से पहले की जाएगी ! सभी देव इस  परीक्षा के लिया तैयार हो गए ! उस वक्त उधर भगवान्  श्री गणेश जी भी थे ! भोलेनाथ जी बोले की आप सभी को  ब्रह्मांड की परिक्रमा करनी है जो भी कोई यह  परिक्रमा पूर्ण करके सर्व  प्रथम आएगा वही सर्व प्रथम पूजा के लिए  पात्र हो गा ! सभी देव इस परिक्रमा के लिए तैयार हो गए ! सभी देव परिक्रमा को शुरवात करते है लेकिन श्री गणेश जी उधर खड़े रहते है तब श्री नारद मुनि जी उनसे पूछते है की आप नहीं जाएंगे क्या ?  आप इस परिक्रमा में भाग नहीं ले रहे क्या ! भगवान् श्री गणेश जी ने कुछ भी नहीं कहाँ और माता पार्वतीजी और भोलेनाथ जी को नमस्कार किया किया और उन्ही दोनों को सात परिक्रमा  की और उनके सामने हाँथ  जोड़कर खड़े हो गए ! सभी देव एक एक करके अपनी परिक्रमा पूर्ण करके आ रहे थे ! सबसे पहले कार्तिकेय  जी  आ गए सभी को लगा की अब कार्तिकेय  जी को ही प्रथम पूजा का सन्मान प्राप्त होगा ! सभी लोगो को लगा अब शिवजी  कार्तिकेय जी का नाम लेंगे लेकिन भगवान् शिवजी ने कहा की श्री गणेश जी को सर्वप्रथम  पूजा का सन्मान मिलेगा यह शिवजी के वचन सुनकर सभी को आश्चर्य हुआ की ये कैसे  हुआ तब भगवान श्री गणेश जी बोले सभी ब्रम्हांड तो  यही है उनकी परिक्रमा की इसका मतलब सभी विश्व की परिक्रमा पूर्ण हो गयी ! यह सब सुनकर सभी को गणेश जी की बात पे सभी ने एक घोष में कहाँ  की सच में भगवान् गणेश जी प्रथम वंदनीय है ! इस तरह सभी कार्यसे पहले गणपति जी की पूजा प्रथम करना शुरू हुआ !
उपरोक्त कथा में हम सभी को प्रथम गणपति पूजन क्यूँ  होता है इसका जबाब आपको  मिला होगा ! इसके बारे में बहोत सी कथाये है ! लेकिन हमें यहाँ इस कथा के में जो भाव है उसके उपर हमें चिन्तन करना है ! श्री गणेश जी ने अपनी माता पिताजी को परिक्रमा  की उस वक्त सभी देव विश्व परिक्रमा करने में लगे थे श्री गणेश जी कही भी नहीं जाकर अपनी माता पिताजी की परिक्रमा की इस में हमें बहोत गहरा संदेश प्राप्त होता है ! हम  सूख प्राप्ति के लिए अनेक उपाय करते है लेकिन घर में जो हमारे माता  पिताजी है सांस – ससुरजी  है उनकी सेवा नहीं करते ! सच में उपरोक्त कथा के माध्यम से हमें यह  सीख मिलती है की अगर हमें आगे बढ़ना है तो हमें पहले हमारे माता पिताजी की सेवा करनी चाहिए ! आप ने अपना अमूल्य समय निकालकर पढ़ने के लिए धन्यवाद !