देवाचे द्वार कुठे आहे..चिंतन मनन

Feb 22, 2023 | प्रार्थना व प्रेरणादायी विचार, मराठी

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श्री स्वामी समर्थ
देवाचिये द्वारी उभा क्षणभरी ।
तेणे मुक्ति चारी साधियेल्या ॥१॥

हरिपाठ ओवी चिंतन मनन

स्वामीं भक्तहो..संत श्रेष्ठ श्री ज्ञानेश्वर माऊली..हरिपाठच्या पहिल्या ओवीतून आपणस मुक्तीचा मार्ग सांगत आहेत..देवाच्या द्वारात क्षणभर जरी आपण विसावलो तरी आपणस मुक्ती ची अनुभूती येते..खरंतर देवाचं द्वार म्हणजे काय हे आधी समजून घेणे आवश्यक आहे.. देवाचे द्वार म्हणजे इथे माऊली आपणस कोणत्या मंदिरता जाण्यास सांगत आहेत का ? हो आपणस माऊली मंदिरात जाण्यास सांगत आहेत.. पण मग प्रश्न निर्माण होतो..कोणत्या मंदिरात ? माऊली सांगत आहेत ते मंदिर म्हणजे जे आपल्या सर्वांना मिळाले आहे..हे मंदिर नसेल तर आपले आस्तित्व संपते..हे मंदिर म्हणजे आपले शरीर..आपले शरीर मंदिरच आहे..पहा आपण थोडा वेळ श्वास रोखला तर काय होते..या मंदिरातून नाद होतो..श्वास घे ..नाहीतर माझे आस्तित्व संपेल..म्हणजेच आपणस प्राप्त शरीर हेच मंदिर आहे..आता हे मंदिर कसे आहे? आपण कधी आत डोकावतो का? आपण म्हणाला सिटी स्कॅन केले की संपूर्ण शरीर दिसते.. अहो पण आपल्यातील..चांगलेपणा किंवा वाईटपणा त्यात दिसतो का ? नाही..आपण स्वतःच आपले अंतर्मुख दर्शन घेऊ शकतो का उघड्या डोळ्यांनी? नाही..मग या मंदिरातील स्व चे दर्शन होणार कसे.. माऊली सांगतात क्षणभर जरी आपण आपल्या आत डोकावण्याचा प्रयत्न केला तरी आपणस मुक्ती चा अनुभव येईल..आता आपण म्हणाला हे लगेचच झाले पाहिजे..ते शक्य नाही.. त्या साठी आपणस स्वामीं नाम घ्यावे लागेल..श्री स्वामी समर्थ म्हणा , राम कृष्ण हरी म्हणा, किंवा आणखी कोणतेही नाम घ्या..यात सातत्य ठेवा.. नाम घेता घेता..नामात दंग व्हा..पहा.. हळुहळु आपले मन नामावर स्थिर होईत..अनेक स्व अनुभव येतील, व्यक्तिमत्व विकास होईल..अजूनही बरेच काही होईल..फक्त गरज आहे..आपल्याला जे शरीर रुपी मंदिर मिळाले आहे..त्याचा खरा अर्थ समजून उपयोग करण्याचा.. बाकी सर्व होईल..फक्त सेवेत सातत्य ठेवा.. धन्यवाद समर्था..कोटी कोटी धन्यवाद.. बोला श्री स्वामीं समर्थ महाराज की जय..!


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