आपण सर्व एकाच ईश्वराची लेकरं आहोत

Feb 18, 2023 | प्रार्थना व प्रेरणादायी विचार, मराठी

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स्वामी वाणी पुष्प ५९२(पर्व ४ थे भाग ९६)

प्रेरणादायी बोल
आपण सर्व एकाच ईश्वराची लेकरं आहोत..तो आपला पालनकर्ता आहे.. हा विश्वास ठेवा.. जग सूंदर दिसू लागेल..!!
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स्वामी भक्तहो आजच्या स्वामी वाणी चा बोध घेण्यासाठी स्वामींची लीलाच पाहूया…अक्कलकोट गावात स्वामी प्रथम गावा बाहेरील खंडोबाच्या मंदिरात आले. तीन दिवस हे परब्रम्ह उपाशी होते. अहमद अलीखान ह्या रिसालदार ने स्वामींना एक वेडा व्यक्ती समजून मजाक मध्ये रिकामी चिलीम देऊन ” हुक्का पीता का?” असे विचारले…तेव्हा स्वामीनी ‘ हो मी हुक्का पितो !!’ असे म्हणून रिकामी चिलीम हातात घेतली आणि ओढण्यास सुरुवात केली तर चमत्कार असा घडला कि त्या चिलीम मधून धूर यायला लागला… हा चमत्कार बघून रिसालदार आश्चर्य चकित झाला आणि महाराज कोणीतरी अवलिया असावेत ह्याची त्याला खात्री झाली ..ह्या नंतर स्वामी तीन दिवस उपाशीच आहे हे समजल्या नंतर चोळप्पाच्या घरी स्वामींना जेवणासाठी नेले …
चोळप्पाच्या घरी जेवणास गेल्या नंतर स्वामीनी सर्वप्रथम रीसालदारास ताटाला हात लावण्यास सांगितले ..पण मी मुसलमान ताटाला हात कसा लावू म्हणून त्याचे धाडस झाले नाही ..पुन्हा स्वामीनी पुन्हा आज्ञा केली अरे! रिसालदार माझ्या ताटाला हात लाव !! तूझ्या हाताने जेवणाला चव येईल !! मग मात्र रिसालदाराने ताटाला हात लावला.. आणि त्या नंतर स्वामींनी जेवण केले .


बोध

स्वामी तर परब्रम्ह आहे..खोल महासागराच्या तळाशी असलेल्या छोट्याश्या मासोळीच्या अन्नाची सोय स्वामीनी केली आहे मग त्यांना तीन दिवस उपाशी राहण्याची गरज काय ? हा प्रश्न सहाजिकच आहे .. खरे तर..स्वामीच्या मनातील आपण काय ओळखणार? पण भक्तीयुक्त अंत:करणाने स्वामिनीच जे मनन करवून घेतले त्यातून असे समजते कि , ह्या आगळ्या वेगळ्या अवतारात स्वामीनी अक्कलकोट हे स्थान पुढील कार्या साठी निश्चित केले होते.. ह्यातूनच अहमद अलीखान च्या हाताने एका हिंदू घरात स्वामीनी जेवण करून “ईश्वरा समोर कुणी हिंदू नाही अथवा कुणी मुसलमान नाही तो फक्त भक्ती भावनेचा भुकेला आहे ” हा स्पष्ट संकेत दिला आणि विशेष म्हणजे अशा काळात कि ज्या काळात हे स्पृश्य अस्पृश्य असे कर्मकांड स्तोम जास्त माजलेले होते..


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