दत्त येऊनिया ऊभा ठाकला

Feb 5, 2023 | प्रार्थना व प्रेरणादायी विचार, मराठी

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स्वामी वाणी पुष्प ५२५(पर्व ४ थे भाग २९)

दत्त येऊनिया ऊभा ठाकला ,
सदभावे साष्टांगेसी प्रणिपात केला |
प्रसन्न होऊनि आशीर्वाद दिधला ,
जन्ममरणाचा फेरा चुकवीला ||

– श्री दत्त महाराजांची आरती
www.SwamiVaani.com

स्वामीं भक्तहो..वरील ओवी वर आपण चिंतन मनन केले असेलच.. लहानपणा पासून श्री दत्त प्रभूंच्या आरती चे कडवे मी म्हणत आहे..आपण ही म्हणत।असाल..पण जेव्हा यावर चिंतन मनन करण्याची आज वेळ आली.. काहीच चिंतन झाले नाही..मग स्वामीं मार्ग दाखवतात.. आणि एका क्षणात स्वामीं नी एका स्वामीं भक्ता मार्फत उत्तर दिले..सर्व प्रथम त्यांना धन्यवाद..ही आरती श्री समर्थ रामदास स्वामी यांनी लिहिली असे म्हंटले जाते..या बाबत आपणस माहिती असेल तर आपण सांगावे..भाव इतका खोल आहे की..तो शब्दांत नाही..हे आरतीचे कडवे म्हणजे अनुभव.. दत्त येऊनिया उभा ठाकला..इथे दत्त म्हणजे..परमेश्वराची अनुभीत…आपण म्हणतो संकटात कुणी मदत केली की..दत्ता सारखा उभा राहिलास..म्हणजेच आपल्या ध्यानी मनी नसताना कुणी तरी मदत करते..स्वामीं अनुभूती सुद्धा अशीच आहे..कोणतीच अपेक्षा न करता आपण जेव्हा स्वामीं सेवा करतो..नाम घेतो..नामातून आपण सहज ध्यानात प्रवेश करतो..ध्यानात कधी आपणस स्वामीं अनुभव येतो..आपणस ही कळत नाही..या अनुभूती मध्ये.. फक्त स्वामीं आणि आपणच असतो..या अवस्थेत जेव्हा आपण असतो..ती अवस्था म्हणजे स्वामीं च्या प्रसन्न मुद्रेची अवस्था..स्वामीं यात आशीर्वाद देतात..ही अवस्था म्हणजे.. जन्म आणि मृत्यू च्या पली कडची अवस्था..स्वामीं महाराज आपल्या प्रत्येक भक्ताला ही अवस्था मिळावी असे स्वामीं आईचे नियोजन आहे..फक्त गरज आहे..अखंड स्वामीं नाम सेवेची..स्वामीं भक्तहो..चला आपण सर्व मिळून स्वामींना प्रार्थना करूया..हे समर्था..आज या आरतीतील भावाला निमित्त करून आमच्यात जो भक्ती भाव जागृत केलास त्याबद्दल धन्यवाद.. तुझी तर इच्छा आहे की प्रत्येकाला स्वामीं तत्वाची अनुभूती द्यावी..परंतु माझे मन त्यात बाधा निर्माण करते..कृपा।कर माझ्या मनाची चावी तुझ्याकडे घे.. आमच्याकडून अखंड स्वामीं नाम सेवा..अखंड ध्यान सेवा करून घे…कारण तुझ्या इच्छे शिवाय हे होऊ शकत नाही..धन्यवाद समर्था..धन्यवाद चिंतन मनन करून घेतल्याबद्दल.. धन्यवाद प्रार्थना करून घेतल्याबद्दल..!


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