भगवान का अभिषेक

भगवान का अभिषेक

हम सभी लोग अनेक देवी- देवतावों का हम अभिषेक करते है कोई भी कर्म हम जब करते है उसके बारे में पूरी जानकारी होंगी तो उसे करने में हमें ज्यादा आनंद लाभ फल  भी प्राप्त होगा |  इसलिए आज हम सब के दिल का जो विषय है उसके बारे में हम जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करने वाले है |

आज तक हमने बहोत बार अभिषेक किया होगा

लेकिन अभिषेक यानी क्या होता है अगर इसके बारे में हमें पूर्ण ज्ञान होगा तो फल भी परिपूर्ण आएगा…चलो तो आज हम  एक प्रयास करते है |

पंडित जी नीचे दिए  गए  उपचार ( पूजा ) अभिषेक में करते है आवश्यक मंत्रो के साथ यहाँ हम सिर्फ जो भी विधि होती है उसकी जानकारी यहाँ ले रहे है

 

१) आवाहन – सर्प्रथम जिस भी देवता की पूजा की जाती इस उस देवता का आवाहन किया जाता है… यानी उस देवता को पूजा में आने के लिए  विनती की जाती है|

२) आसान – हमारे घर में कोई मेहमान आता है तो हम उसे बैठने के लिए  आसान देते है उसी तरह पूजा में हम भगवान् जी को आसान देते है

३)पाद्य- उसके बाद पाद्य  पूजा की जाती है |

४) आचमन – उसके बाद भगवान् जी को आचमन करने के लिए  जल दिया जाता है

५) अर्घ्य –  उसके बाद भगवान् जी को  अर्घ्य  दिया जाता है |

६ ) पंचामृत – उसके बाद पंचामृत का स्नान कराते  है  ( दूध दही घी  शहद  ,चीनी  )

 ७ ) स्नान – उसके बाद  भगवान् जी को स्नान कराते  है |

८ ) चन्दन – भगवान् जी को चन्दन लगाया जाता है |

९ )अक्षता – उसके बाद अक्षता चढ़ाते है

१० ) पुष्पम – उसके बाद भगवान जी को फूल चढ़ाया जाता  है |

११) धुप और दीप की आरती  की जाती है|

१२) भगवान् जी को नैवेद्य दिखाया जाता है.

१३) ऊपर जो भी जानकारी दी गई है यह सब भगवान जी को पूजा की थाली में रख कर की जाती है |

१४) इसके बाद पंडित जी विभिन्न स्तोत्रों  के साथ भगवान् जी का अभिषेक करते है – इसमें पुरुष सूक्त स्त्री सूक्त महिम्न रूद्र पवमान इसमें से जो भी स्तोत्र आवश्यक है उसका पठन  करके भगवान् जी का अभिषेक करते है|

१५) अभिषेक होने के बाद भगवान जी को उनके स्थान पर रखा जाता है |

१६) यज्ञोपवीत – भगवान् जी को यज्ञोपवीत (जनेवू ) दिया जाता है |

१७ ) वस्त्र – जब हमारे पास कोई मेहमान आता है तो हम उस नए कपडे लेते है उसी तरह हम भगवान् जी को वस्त्र अर्पण करते है|

१८ ) चन्दन – भगवान् जी को चन्दन लगाया जाता  है |

१९ ) हल्दी – कुंकुम – भगवान् जी को हल्दी – कुंकुम लगाया जाता है |

२० ) पुष्पम – उसकी बाद विभिन्न फल भगवान् जी को चढ़ाये जाते है |

२१ ) अगर हम देवी का अभिषेक कर रहे हो तो देवी को विविध अलंकार अर्पण किए  जाते है |

२२) उसके बाद धुप और दीप की आरती  की जाती है|

२३) भगवान् जी को नैवैद्य दिखाया जाता है|

२४ ) उसके बाद भगवान् जी की आरती की जाती है |

इस तरह के षोडश उपचारों  से अभिषेक का विधि होती है यहाँ सिर्फ हम क्या करते है इसके बारे में

संक्षेप में अभिषेक यानी ऊपर दिए  गए सभी उपचारोंसे भगवान जी को मंत्र के साथ स्नान यहाँ जानकारी देना का प्रयास किया है इसमें कुछ कम जादा हो सकता हैलेकिन हम यहाँ सिर्फ हम अभिषेक यानी क्या यह बताने का प्रयास किया जिससे आप जब भी यह करेंगे तो हम में भक्ति का भाव जागृत हो जाए |

यहाँ दी हुवी बाते में अगर कुछ आपको गलत लगे तो उसे जरूर छोड़ दे |

आप सभी को धन्यवाद

 

हम और हमारा भविष्य-

हम और हमारा भविष्य-

 

आज हम इस बात पर मनन करने वाले है कि हम और हमारा भविष्य…हम सब के नजदीकी विषय है..सच में हम सब हमारे भविष्य के बारे हमेशा सजग रहते है…इसलिए हम इसके ऊपर विस्तार से चर्चा करने का प्रयास करने वाले है..सर्वप्रथम यहाँ हम एक चीज बताते है की हम किसी भी चीज पर टीका करना नही है…हर एक शास्त्र उनकी जगह पर बराबर है ..अब हम बात करने वाले है वह है हम और हमारा भविष्य..समस्या नहीं ऐसा कोई इंसान नहीं.. और समस्या आयी कि बहोत से लोक भविष्य देखने का प्रयास करते है…यानी रोज कुछ कुछ समस्याएं आती है तो लोग तुंरत किसी के पास जाकर भविष्य देखते है..यानी कोई भी समस्या खुद प्रयास करने से पहले भविष्य जाकर पूछते है..सचमें हम यह योग्य कर रहे है क्या..हम समस्या आने के बाद जब किसीं से भविष्य पुछते तब बहोत से बार बताया जाते है की अमुक अमूक ग्रह..नक्षत्र.. या योग की वजह से आप को तकलीफ हो रही है..अभी पहली बात हमे इस बात पर बात करना आवश्यक हैं.. यहाँ हमे अपने आप से एक प्रश्न  पूछना है की हमारी किसी ईश्वर के ऊपर श्रद्धा है क्या ? जरूर हम सभी की किसी ईश्वर पर श्रद्धा होती है! लेकिन जब हमें समस्या आती है तो फिर हम क्यूँ  भविष्य के बारे जानने की कोशिश करते है… हमारी अगर किसी भी इष्ट देवता के ऊपर श्रद्धा है तो फिर क्यूँ  हम भविष्य की चिंता कर रहे है…हमारे मन को पहले तो हमें हमारे अंतर्मन तक यह चीज   पहुचानी है की मेरा कुछ भी अनिष्ट नहीं हो सकता क्यूँ  की ईश्वर हमारा अनिष्ट नहीं होने देगा… जब हम समस्या आने की बाद भविष्य जानते है तब बताया जाता है की अमुक… अमुक ग्रहों… नक्षत्रों  के वजह से हमें समस्या आ रही है… यहाँ हमारे मन में उस ग्रहों… नक्षत्रों   के बारे भय , निर्माण होता है …यहाँ एक विचार करने वाली चीज है की यह सब सृष्टि हमारी जिस ईश्वर के ऊपर श्रध्दा है उन्होंने यह सृष्टि निर्माण की .. ग्रहों… नक्षत्रों की निर्मिति की उस भगवान  की हम सेवा कर रहे है तो हमें उस ग्रहों… नक्षत्रों  से तकलीफ हो सकती है क्या ? हमें जो तकलीफ हो रही है सच में क्यूँ  हो रही है… यह समस्या देकर ईश्वर हमे कुछ सिखाने का प्रयास तो नहीं कर रहा है .. इस के ऊपर चिंतन करना जरुरी है…ग्रहों… नक्षत्रों वजह से हमको तकलीफ हो रही है यह हम थोड़ी देर के लिए मान लेते है लेकिन जब हम उस ग्रहो को हमारे समस्या के लिए  दोष देते है…  तो हम उसको दिल से प्रार्थना भी नहीं कर सकते है की समस्या दूर करने में मुझे मदत करो ..इससे क्या होता है हमारी समस्या दूर तो नहीं होती लेकिन वह समस्या बढ़ती है कभी कभी बताया जाता है की अमुक अमुक वयक्ति के वजह से आप को तकलीफ हो रही है… यह बात बहोत गलत लगती है… अगर किसी के वजह से किसी को तकलीफ होती है.. यह बात हमारे मन में जब घर करती है तो इससे समस्या मुक्त होने से पहले हमारे मन में दूसरी समस्या बन जाती है वह यह की हमे कुछ भी समस्या आती है तो हम दूसरों  को दोष देते है..सच में यह बहोत ही बुरी चीज है… अगर हम इसमें मनन चिंतन करेंगे तो हमारा हर समस्या का मूल हमारे विचारो में है ..हमारे जीवन जो भी कुछ आता है वह पहले कही तो हमने गलत प्रार्थना का फलस्वरूप होता है… लेकिन हम हमेशा दूसरों को दोष देते है… और समस्या और बढ़ जाती है.. यहाँ हम किसी भी चीज को गलत नहीं कह रहे है.. हर एक चीज सृष्टि में उसकी जगह पर ठीक ही है… लेकिन अगर हम हर एक समस्या में भविष्य के पीछे भागेंगे तो हम कभी भी सुखी नहीं हो सकते और हर एक समस्या में दूसरो  को दोष देते रहेंगे…हम कभी भी सुखी नहीं हो सकते… अगर हमें सचमे हमारा भविष्य बनाना है क्या ? यह प्रश्न खुद  से पूछो… क्या मेरा भविष्य जो दूसरा जो बतायेगा वही होगा क्या ? मेरा खुद के ऊपर विश्वास है क्या ? मेरा अगर खुद पर विश्वास नहीं होगा तो में मेरा भविष्य कैसे बना सकता हु.. अगर मुझे अच्छा भविष्य चाहिए तो… पहले मुझे खुद  के ऊपर विश्वास होना जरुरी है… जब में खुद के ऊपर विश्वास रखूँगा तभी तो ईश्वर मुझे साथ दे सकता है… आज से में हर एक समस्या को ईश्वर का उपहार समझ कर उस पर कार्य करूँगा… क्यूंकि में ईश्वर की संतान हूँ… मेरे माता-पिता  का आशीर्वाद मेरे साथ है…ईश्वर मुझे समस्या देकर मुझे मेरे ऊपर काम करने का अवसर दे रहा है…ईश्वर के इस कार्य में बाधा  न बनते हुवे .. उस समस्या के ऊपर खुद चिंतन मनन करके… मेरा भविष्य के ऊपर खुद काम करूँगा..ईश्वर के ऊपर मुझे पूर्ण भरोसा है जो भी होगा वह अच्छा  ही होगा..में आज का कर्म सच्चे दिल से करूँगा..भविष्य की चिंता नहीं..मेरे हर कर्म के ऊपर चिंतन करूँगा….भविष्य तो तो आनंदमय ही है… धन्यवाद स्वामी…धन्यवाद ईश्वर

आपको लेख कैसा लगा जरूर मेल करके बताए …. किसी को गलत या सही  ठहराना उद्देश्य नहीं है हमें खुद पे काम करना है.

 

 

आत्महत्या

आत्महत्या

आत्महत्या करना पाप है या पुण्य है यह तो बहोत जटिल विषय है..लेकिन यहाँ हम इस बात में न अटकते हुवे…हमें यहाँ यह प्रयास करना है कि जब किसी के मन में यह विचार आये तो तुरंत वो दिल से सोचे न कि मन से सोचे..हम तो बहोत आसानी से कह देते है कि उसने आत्महत्या नहीं करनी चाहिए थी…या बहोत सी ऐसी बाते करते है जिसका कूछ भी उपयोग ना हो…कोई भी आदमी आत्म हत्या क्यूँ करता है…जिस आदमी ने कभी चूहा भी न मारा हो..वो आदमी कूद को खत्म कर देता है…ये कैसे होता है ? क्या सच में बहोत मनन करने जैसी बात है..यहाँ हम आत्महत्या क्यूं होती है इसके बारे में विचार करते है!

१) परीक्षा मे यश नहीं मिला..या परीक्षा में यश नहीं मिलेगा.

२) आर्थिक परेशानी

३)रिश्तों में दूरी

४)नकारात्मक सोच या वातावरण

 

यह कुछ कारणों के वजह से आत्महत्या की जाती है…इसके बारे में हम थोड़े विस्तार से चर्चा करते है!

 

परीक्षा में यश – अपयश – जीवन तो एक परीक्षा है लेकिन अनेक विद्यार्थी परीक्षा में यश मिलेगा या नहीं यह सोचकर मन मे भय निर्माण करते है..मन बोलता है तुम्हें यश नहीं मिलेगा और फीर मन नकारात्मकता तैयार हो जाती है..फिर मन बोलता है ..आत्महत्या कर लो अब यही एक रास्ता है..और अनेक विद्यार्थी आत्महत्या कर लेते है..जब रिजल्ट आता है तो वह विद्यार्थी अच्छे गुणों से पास हो जाता है लेकिन यह देखने के लिए वह खुद ही नहीं होता.. सच में हम कई बार यह घटना देखते है..यह हम रोक सकते है..माता पिता ने अपने बच्चों से बात करनी चाहिए ..उसे समझाना चाहिए कि अरे परीक्षा में अच्छे गुण प्राप्त करना अच्छी बात है लेकिन कम गुण प्राप्त करना यह कोई गुनाह नहीं है..ऐसी अनेक परीक्षा तुम्हें जिंदगी में देनी है..कभी यश आएगा तो कभी अपयश आएगा लेकिन तुम उदास..निराश मत होना..हम हमेशा तुम्हारे साथ है..देखो यह बात करने के बाद आपका बच्चा आत्महत्या करने का नहीं सोचेंगा.. आपसे खुल कर बात करेगा.. लेकिन इसके लिए आपको उसका सच्चा मित्र बनना जरूरी है..!!

आर्थिक परेशानी- पैसा है तो सबकुछ है..यह आदमी हमेशा सुनता है ..लेकिन आप है इसलिए पैसा है..यह बात जब तब आप नहीं बात आपके दिल में पक्की नहीं होती तब तक आप कभी सुखी नहीं हो सकते…आप ने आत्महत्या करने से क्या होगा!

प्रेम का वियोग – अनेक लड़के लडकिया प्रेम का वियोग होने से आत्महत्या कर लेते है.सच में यह प्रेम है!

बातचीत का अभाव -अभी इस युग में हम एक दूसरे से बात ही नहीं करते..हम और हमारी दुनिया इतनी ही हमारी दुनिया इसमें अनेक बार हम आत्महत्या करने जैसे कदम उठाते है!

अभी हम आत्महत्या का जो विचार हमारे मन में आया है उसके ऊपर स्व- संवाद करेंगे!

 

शांत बैठो ..आँखे बंद करो..आगे जो बातें है उसके ऊपर मनन करो…अब यहाँ जो चिंतन करना है.. वो हर एक के परिस्थिति के अनुसार होंगा!

मेरे मन आत्महत्या का विचार क्यूं आ रहा है..

परीक्षा में अपयश मिलेगा या कम मार्कस मिलेंगे यह बात के लिए में आत्महत्या करने का सोच रहा हूं …सचमें इस वजह से आत्महत्या करने से क्या होगा…अगर सिर्फ इस वजह से में आत्महत्या करूँगा तो…उससे अच्छा में परिस्थितियों का सामना करूँगा तो..ऐसे अनेक लोग है..जो परीक्षा में कम मार्क्स से पास हुवे है..या पास भी नहीं हुवे..लेकिन वो लोग आज बहोत सफल है…में आत्महत्या नहीं करूंगा..में भी सफल हो सकता हूं… सफल हूँगा!!!

 

आर्थिक स्थिति के कारण में आत्महत्या करने का सोच रहा हु..सचमें पैसा मेरे लिए है ..या में पैसे के लिए हु..आज मेरे पास पैसा नही..मेरे ऊपर कर्जा हुवा है..मुझे किसी भी काम में यश प्राप्त नहीं हो रहा..नोकरी नहीं मिल रही..पैसा न आ रहा..पैसा मेरे पास नहीं रहता.. मेरे ऊपर बहोत कर्जा हुवा है..अब मेरे पास आत्महत्या करने के सिवाए कुछ भी रास्ता नहीं… सचमें अगर तुमने आत्महत्या करने से तुम्हारे घर की आर्थिक स्थिति अच्छी होंगी क्या? मेरे मरने से कर्जा खत्म होगा क्या? घर वाले सुख-चैन से रह सकते है क्या?मेरे मरने के बाद उनको जो मदत मिलेगी उससे मेरा परिवार सुखी होंगा क्या? अगर आप इसका उत्तर नहीं ऐसा मिलेगा तो..अब सोचो कितने बड़े ..बड़े लोग कर्जा लेकर बैठे है..वो लोग आत्महत्या नहीं करते..मेरे ऊपर थोडासा ही कर्जा है..जो में आज नहीं तो कल दे सकता हु..आर्थिक स्थिति के वजह से में आत्महत्या नहीं करूंगा..देखो आप जल्द ही कर्ज मुक्त हो जाएंगे!!

प्रेम वियोग – प्रेम वियोग हुवा इसलिए लोग आत्महत्या करते है…सच में हम प्रेम कर रहे है दूसरों पर लेकिन खुद पर प्रेम नहीं करते और बोलते है..मैं तुम्हारे बिना जी नहीं सकता / सकती…यह प्रेम नही विकृति है..अगर आप सच में प्रेम करते हो तो फिर आत्महत्या क्यूँ कर रहे हो!! देखो सच में अगर इसके ऊपर मनन करेंगे तो आप कभी भी आत्महत्या नहीं करेंगे!!

बातचीत का अभाव- आज कल लोग एक दूसरे से बातचीत नहीं करते..जो भी करना है वह मन में ही करते है..खुद से जो बातचीत करते है..वो भी नकारात्मक करते है..क्या होता जब हमारे मन कूछ आत्महत्या जैसे विचार आते है..उस वक्त भी हम खुद से..सच्चाई से बात नहीं करते.. और इस वजह से हमारा मन हम पर ही हावी हो जाता है…इससे बचने के लिए हमें हमारी मन की बाते एक दूसरे से शेयर करनी चाहिये..कम से कम अपना खुद से स्व-संवाद होगा तो हम सपने ने भी आत्महत्या नहीं करेंगे!!

यहाँ एक प्रयास किया है कि आत्महत्या का विचार आये तो उसके ऊपर चिंतन.. मनन हो..आत्महत्या न हो!!

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परब्रम्ह श्री स्वामी समर्थ महाराज

परब्रम्ह श्री स्वामी समर्थ महाराज

विश्व  के चालक- मालक-पालक भगवान् श्री स्वामी समर्थ महाराज का चरित्र तो अथांग सागर जैसा है वह किसी एक लेख में या पोस्ट में समा  नहीं सकता ये तो सभी स्वामी भक्त जानते ही है ! यहाँ हम आपको एक ऐसी वेबसाइट के बारे में जानकारी देने वाले है जहाँपर आपको श्री स्वामी समर्थ महाराज जी का चरित्र पढ़ने को मिलेगा उसेसे पहले आपको यहाँ थोड़ी जानकारी देने का हम यहाँ प्रयास करते है ! इ. स. ११४९ में छेले  खेड़े ग्राम में भगवान दत्तात्रय जी ने श्री स्वामी समर्थ अवतार लिया ! २२९ साल पुरे विश्व में यानी चीन मलाया सिंगापूर और संपूर्ण भारतभर स्वामी महाराज जी ने यात्रा की उन्हें अंधश्रद्धा बिलकुल पसंद नहीं थी ! इ.स १५२८ में महाराष्ट्र के कारंजा से अपना कार्य श्री  नृसिंहंसरस्वती अवतार  ले कर किया ! इ.स. १६७८ में उन्होनो अपने अवतार की सांगता करके फिर से १८५६ में श्री स्वामी समर्थ अवतार धारण किया ! स्वामी महाराज भगवान् श्री दत्तात्रय  जी के ही अवतार है ! वे हमेशा कहते थे की मै  नृसिंह  भान श्री शैलम में जो कर्दळी  वन है वहाँ  से में आया हु ! उन्होने हम सभी को अभय वरदान दिया वो यह है की – डरो मत मै  तुम्हारे साथ हू  ( भिऊ नकोस मी तुझ्या पाठीशी आहे ) यह जो अभय वचन उसकी अनुभूति हम सभी स्वामी भक्तो को हमेशा  आती है ! हम सब की स्वामी महाराज जी के ऊपर की  श्रद्धा विश्वास भक्ति बढे हमे  स्वामी महाराज जी चरित्र पढ़ना चाहिए उसके ऊपर मनन करना चाहिए ! आज अनेक ग्रंथ उपलब्ध है ! लेकिन आज के भागती दौड़ती जिंदगी हमें यह संभव नहीं होता लेकिन स्वामी महाराज जी की लीला तो बहोत गहरी है ! उन्होने हम सबके लिए चरित्र और उसका बोध आज वेबसाइट के माध्यम से हमें उपलब्ध  करा दिया है ! हमें सिर्फ हमारे समय अनुसार उस वेबसाइट के ऊपर जा कर वह पढ़ना है उसके ऊपर चिंतन मनन  करना है ! देखिए आपके अनेक सवालों का जबाब आपका हमारे स्वामी महाराज जी के लीला से प्राप्त होंगे  ! इस वेबसाइट के ऊपर स्वामी वाणी मराठी और हिंदी ये दोनों भाषा में उपलब्ध है ! इस लेख के माध्यम से में  जिन्होंने भी यह सेवा की उनको धन्यवाद देता हु ! स्वामी महाराज जी को भी धन्यवाद ! स्वामी महाराज जी से हम यहाँ यही प्रार्थना करेंगे की उन्हें और अधिकाधिक स्वामी वाणी का विश्लेषण करने का मौक़ा मिलता रहे और हमें स्वामी वाणी कर प्रसाद मिलता रहे – चलो स्वामी वाणी के गाँव जाते है ! हमारी है एक सांस स्वामी मया बने इसलिए हम भी स्वामी वाणी पढ़े और बाकी लोगो को भी इस बारे में  बताइये – स्वामी वाणी वेबसाइट WWW.SWAMIVAANI.COM

 

डिजिटल दुनिया –

डिजिटल दुनिया –

आज का युग डिजिटल युग है .. हम सभी डिजिटल हो गए है … एक समय था की हम एक दूसरे से  सवांद करने के लिए कई महीने- साल रुकना पड़ता था… क्यूंकि लोगों को एक गांव से दूसरे गांव संदेशा  देने के लिए  किसीको भेजना पड़ता था ..बाद में संदेशा  भेजने के लिए पत्रों का ..टेलीग्राम का प्रयोग शुरू हुवा उसमे भी कुछ दिनों का समय लगता था .. लेकिन हर कोई अपने परिजनों को चिठ्ठी लिखता था… वो कैसा है .. उसके घर के सभी की खुशियाली पूछता था …हर रोज हम पोस्टमैन मामाजी की राह देखते थे … अगर वो रास्ते से जाते हुवे दीखते तो हम उन्हें पूछते थे की हमारी कोई चिट्ठी  आयी है क्या  ? स्कुल में थे तब पोस्टमन जी के ऊपर निबंध भी लिखते थे .. पोस्ट के साथ .. कूरियर की सुविधा भी शुरू हुवी .. फिर भी हम चिट्ठी की राह तो देखते ही थे ..जैसे जैसे प्रगति होती गई वैसे वैसे संवाद के नए साधन आने लगे… फोन के ऊपर से बातचीत लोग कर पाने लगे.. गांव में किसी एक के पास टेलीफोन होता था .. उसी का नंबर हम हमारे रिश्तेदारों के देते थे… अब एक दूसरे से संवाद करना थोड़ा आसान हुवा था… फिर भी कुछ गावों में यह सुविधा नहीं थी .. बाद में और प्रगति होने के बाद अब गांव में कुछ कुछ घरो में फोन आने लगे… लेकिन उसका जो भी रेंट था .. हर कॉल जो खर्चा था वो बहुत ही ज्यादा था …ज्यादा बिल न आए इसलिए बहोत से घरो में घरो में उस टेलीफोन को ताला भी लगाते  थे….उसके बाद और प्रगति होने के बाद पेजर भी आया जिससे हमें  एक दूसरे के साथ मेसेज करके संवाद कर सकते थे … उसके बाद और प्रगति हुवी .. जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी थी वे लोग मोबाईल लेने लगे …. लकिन वो भी इतना महंगा था की हमको फोन आया तो भी हमें चार्जेस  लगते थे…. इसलिए उसका भी उपयोग कम होता था ..जैसे जैसे  प्रगति होती गई और एक  समय आया जिस समय इनकमिंग कॉल्स फ्री हो गए .. मोबाइल के दाम कम हो गए .. और एक प्रभावी संदेश का माध्यम सबके लिए  खुला होने लगा ..  तब लोग थोड़ा बहोत संवाद करने लगे  .. उस वक्त इंटरनेट का शुरू शुरू में इतना कोई प्रयोग नहीं था… सभी एक दूसरे से फोन करके बात करने का प्रयास करते थे ..क्यूंकि इंटरनेट बहोत ही महंगा था .. हम प्रगति की और बढ़ ही रहे थे.. अब डिजिटल युग में हम पैर रखने वाले है .. अब एक दिन ऐसा हुवा की जो १ जीबी  डेटा हमें महीने के लिए  मिलता था अब वह हमें हर रोज के लिए १ जीबी डेटा मिलने लगा …उसके साथ और भी एक ऑफर शुरू हो गई की अनलिमिटेड टॉकटाइम की यानी हम अगर २०० का रिचार्ज करेंगे तो हमें एक महीने के लिए … हर रोज हमें कितने भी वक्त बात कर सकते है और हमें १ जीबी डेटा  भी हमें उपलब्ध हो गया… सृष्टि ने सोचा  अब लोग एक दूसरे के साथ संवाद करेंगे… जो लोग एक दुसरे के साथ बात कर नहीं सकते वे अब एक दूसरे के साथ… फोन के द्वारा संवाद करेंगे… वैसा होने ही वाला था की तुरंत सोशल मीडिया के कुछ  ऍपस  जिस से हम एक दूसरे के साथ मेसेज भेज सकते है … फोटो भेज सकते है … हमारा  स्टेटस लगा सकते है … और  उससे कॉल भी कर सकते है .. ऐसे ऍपस आये … अब कुदरत  ने सोचा की अब लोग एक दूसरे के साथ बहोत बात कर सकते है … जरूर लोग अब एक दूसरे के करीब आएंगे .. संवाद बढ़ेगा.. जो लोगों को सालो साल बात नहीं कर सकते थे वे अब एक दूसरे के साथ बात करेंगे.. एक दूसरे की खुशियाली पूछेंगे .. सभी तरफ खुशियाँ ही खुशियाँ आएँगी.. लेकिन हम कुदरत जो चाहती थी वे नहीं हुवा.. हमें ऍपस इस तरह से वश किया की हमारी दुनिया ऍपस की दुनिया बन गई…  हम ऍपस में अटक गए… हमें अनलिमिटेड टॉकटाइम मिल रहा है पर हम किसको को कॉल नहीं करते … ऍप्स  द्वारा भी कॉल नहीं करते …किसीका जन्म दिन आया .. उसको मेसेज करते है … उसके फोटो का स्टेटस लगा देते है…फोट भी ऐसा लगाते है जिसका जन्मदिन है उसको मुगुट पहनाते  है… लोगों  ने सोचने का है इसका जन्मदिन लगता है .. कोई पास हो गया उसका फोटो लगाएंगे.. कोई मर गया उसका फोटो लगाएंगे और लिखेंगे RIP  या भावपूर्ण श्रद्धांजलि .. RIP  का भी शब्द पूरा नहीं लिख रहे उसका पूरा शब्द भी बहोत लोगों को मालूम नहीं… या और कुछ लिखेंगे.. इतना किया हो गया काम .. पति पत्नी भी एक दूसरे से मेसेज के द्वारा बात कर रहे है .. घर के सभी सदस्य मोबाइल के दुनिया में अटक गए … अरे जरा सोचो …सच में हम हमारे भाव प्रगट कर रहे है ? या सिर्फ दिखावा कर रहे है ? सच में हम जिसका स्टेटस लगा रहे है.. उससे हमारी मैत्री है ..  वो हमारा रिश्तेदार है ..  या वो आदमी है ..या एक मशीन है.. या हमारा उसके साथ जो भी रिश्ता है वह सिर्फ दिखावट है क्या ? सच में हम उसके सुख में शामिल है तो उसे फोन करके बधाई नहीं दे सकते ? कोई आदमी मर गया तो उसके घर वालों  को फ़ोन भी नहीं कर सकते ? आखिर हम क्या कर रहे ? सचमे हम डिजिटल हो रहे या ..जूठे इंसान बन रहे है.. अगर हम फोन करेंगे तो .. हम जिसे फ़ोन कर रहे है उसे खुशी  तो होगी..  उसके  साथ हमको जो आंतिरक समाधान प्राप्त होगा  … वह बहोत बड़ा होगा .. डिजिटल बनो लेकिन पहले लोगों  से बात करो जिससे हमको सच्चा सुख… आंनद… प्रेम… प्राप्त होगा ..!! और आज से एक निश्चय करो की .. हम फोन करके संवाद करेंगे.. हम ऐसा नहीं सोचेंगे की उसने मुझे फोन करके शुभेच्छा  नहीं दी..  उसने फोन नहीं किया इसलिए में भी नहीं करूँगा.. सृष्टि  का नियम है.. जो आप उसको देंगे वह आपको और किसी माध्यम से ..  दुगना करके देती है.. चलो आज से शुरवात करते है…

इसमें जो भी कुछ लिखा है दिल से लिखा है .. शब्दों की कमी हो सकती ….कहाँ  शब्दों में गलती भी हो सकती है … उसके लिए  माफ़ करना…. किसी की भी भावना को दुःख पहुंचाने के लिए नहीं बल्कि हम खुद सोचे की हम क्या कर रहे है.. आपने आप का बहुमूल्य समय देकर यह सब पढ़ा इसके लिए  धन्यवाद … कुछ गलत लगा हो तो उसके लिए क्षमा  मांगते है .. पसंद आया तो औरों को शेयर जरूर करो… आपके सुझाव भी हमें जरूर बतावो … धन्यवाद स्वामी .. कोटि कोटि धन्यवाद