जिस पर ध्यान देंगे वही मिलेगा
आज हम एक ऐसी कहानी सुनेंगे जो हमें हमारे जीवन का लक्ष कैसा हो यह बताएगी ! चलो तो आज सुनते है महाभारत की कहानी ! गुरु द्रोणाचार्य जी के पास अर्जुन और उनके भाई और बहोत से विद्यार्थी धनुर्विद्या सिख रहे थे ! उनकी शिक्षा शुरू थी एक दिन गुरु द्रोणाचार्य जी को लगा आज इन सबकी परीक्षा लेनी चाहिए ! उन्होंने सभी शिष्यों को बुलाया और बोले की आज हम परीक्षा लेंगे जिससे आपका कितना अभ्यास हुवा है यह समझ आएगा! उन्होंने पेड़ की ढाली को एक लकड़ी का तोता बाँधा था और सभी को बोले की जो भी इस तोते की आँख पर निशाना साधेगा वो इस परीक्षा में सफल हो जायेगा ! सर्व प्रथम भीम आगे आया… उसने निशाना लगाया वो बाण छोड़ने ही वाला था उसी वकत गुरु द्रोणाचार्य जी उसे बोले पहले मुझे बतावो तुम्हे क्या दिख रहा है ? भीम बोला मुझे..आकाश , बादल ,सूर्य दिख रहा है…तब गुरु द्रोणाचार्य बोले तुम आँख नहीं भेद पावोगे ! अब युधिष्ठिर आये उसने भी निशाना लगाया तभी गुरु द्रोणाचार्य बोले बाण छोड़ने से पहले मुझे बतावो तुम्हे क्या दिख रहा है ? युधिष्ठिर बोले मुझे आकाश , बादल ,सूर्य ,पेड़ , पेड़ की डहलिया ! युधिष्ठिर का गुरु द्रोणाचार्य बोले जबाब सुनकर तुम आँख नहीं भेद पावोगे ! इस तरह बाकि सभी शिष्योंको गुरु द्रोणाचार्य ने यही सवाल पूछा लेकिन सभी ने भीष्म और युधिष्ठिर की तरह ही जबाब दिया अब आखरी में सिर्फ अजुर्न बचे थे अर्जुन आगे आये उन्होंने धनुष्य में बाण लगाया तब गुरु द्रोणाचार्य बोले बाण छोड़ने से पहले मुझे बतावो तुम्हे क्या दिख रहा है ? तब अर्जुन बोले मुझे सिर्फ आँख दिख रह है बाकि कुछ भी नहीं दिख रहा… यह जबाब सुनकर गुरु द्रोणाचार्य खुश होकर बोले बाण चलावो ! गुरु की आज्ञा की अनुसार अर्जुन ने बाण छोड़ा और तोते की आँख को भेदा ! सभी ने तालिया बजाकर अर्जुन का अभिनंदन किया !
उपरोक्त कथा आपने अनेक बार पढ़ी होंगी सुनी होंगी लेकिन कोनसी भी कथा केवल पढ़ने या सुनने के लिए नहीं होती तो उससे हमें जो बोध मिलता वह हमेशा हमारे जीवन में काम करता है ! देखो ना उपरोक्त कथा में हमें यह बोध मिलता है की अगर हमारा संपूर्ण ध्यान अगर हमारे लक्ष पर होगा तो हमें जरूर यश प्राप्त होता ही है ! इसलिए सदा हमें हमारे लक्ष पर ही ध्यान रखना है !